मंत्री ओमप्रकाश पर समाजवादी चिंतक दीपक का पलटवार, सांविधानिक पदों की गरिमा न गिराएं मंत्रीगण

धर्म के नाम पर झूठ की खेती गलत - मिश्र,
समाजवादी चिंतक और बौद्धिक सभा के अध्यक्ष दीपक मिश्र ने मंत्री ओमप्रकाश राजभर पर पलटवार करते हुए कहा कि बेतुके, तथ्यहीन और अतिरंजित बयान देकर मंत्रीगण सांविधानिक पदों की गरिमा न गिराएं। लोकतंत्र में प्रतिपक्ष की आलोचना उनका अधिकार है किंतु झूठ बोलकर दिग्भ्रमित करना नैतिक अपराध और धार्मिक अवधारणाओं को लेकर झूठ बोलना विधर्म और पाप है । रामराज्य, राष्ट्रीयता व समाजवाद के लेखक दीपक ने सलाह देते हुए कहा कि मंत्रीगण खासकर ओमप्रकाश राजभर पढ़ लिखकर बोलें , तो उनकी और सरकार की जग हंसाई नहीं होगी । हनुमानजी देवता, कपि व राजर्षि हैं जिन्हें जाति में बांधना मूर्खतापूर्ण कथन है । रामायणकालीन सामाजिक संघात में जाति प्रथा नहीं थी, वाल्मीकि, भवभूति और तुलसीदास की व्याख्याओं के अनुसार उस समय कर्म पर आधारित लचर वर्ण व्यवस्था के ही दृष्टांत मिलते है । दीपक ने कहा कि आंबेडकर और समाजवादियों का संबंध 1952 से प्रगाढ़ है जो अध्ययनहीन मंत्री महोदय को पता नहीं । बाबा साहब खुद समाजवादी थे, वे राज्य समाजवाद के कटिबद्ध समर्थक थे । आंबेडकर को तत्कालीन सोशलिस्ट पार्टी ने समर्थन दिया था जिसके लोहिया महासचिव थे । आंबेडकर और लोहिया के पत्र व्यवहार से दोनों के सौहार्द्रपूर्ण संबंध को समझा जा सकता है । मधुलिमए, मोहन सिंह से लेकर मेरे जैसे समाजवादियों ने बाबा साहब पर पुस्तकें लिखी हैं जो बाबासाहब के प्रति सम्मान का परिचायक है । विधान सभा के सामने वाली सड़क का नाम बाबा साहब के नाम पर नेताजी मुलायम सिंह यादव ने किया था । सपा शुरू से ही आंबेडकर की जयंती मना रही है ।
दीपक मिश्र ने कहा कि ओमप्रकाश राजभरजी के ऐसे बयानों से पूरे देश में उत्तर प्रदेश की छवि धूमिल होती है । वे दरअसल सभी को जाति के काले चश्मे से देखने की संकुचित मानसिकता से कुंठित हैं और भाजपा के ही झूठ बोलो आगे बढ़ो की कार्यप्रणाली के तहत काम कर रहे हैं । उल्लेखनीय है कि श्री राजभर ने बलिया में कहा था कि हनुमानजी राजभर थे और सपा 2012 के पहले आंबेडकर का नाम नहीं लेती थी ।




