श्रीराम कथा मर्मज्ञ स्वामी राघवाचार्य ने कहा- जो जितना अधिक विनम्र है, वह उतना बड़ा भक्त है

ईश्वर के अन्दर पाप नष्ट करने की अपार क्षमता है
मोतीमहल रामकथा पंडाल उत्तम चरित्र गढ़ने की पाठशाला बना
लखनऊ में श्रीराम कथा का दूसरा दिन. ...
लखनऊ 27 दिसम्बर। राजधानी के मोतीमहल लॉन में गुरुवार को शुरू हुई श्रीराम कथा के दूसरे दिन हजारों की संख्या में उपस्थित ज्ञान जिज्ञासुओं को संबोधित करते हुए अयोध्या से आए प्रख्यात रामकथा मर्मज्ञ स्वामिश्री राघवाचार्य जी महाराज ने कहा कि भगवान के अन्दर पाप नष्ट करने की जितनी क्षमता है, उतनी मनुष्य के अन्दर पाप करने की क्षमता नहीं है। उन्होंने पाप नाश करने के लिए भगवन्नाम का जप करने तथा दोबारा पाप नहीं करने का संकल्प लेने की सलाह दी।
स्वामी राघवाचार्य महाराज ने भक्ति का वर्णन करते हुए कहा कि भक्ति का एक नाम है नम्रता। जो व्यक्ति जितना अधिक विनम्र है, वह उतना ही बड़ा भक्त है। उन्होंने कहा कि विनम्रता ही भक्ति का आभूषण है। मानव जीवन में विनम्रता आ जाए, इससे बड़ा कोई सौभाग्य नहीं हो सकता। हम यह विनम्रता गुरुकुलों में सिखाते रहे हैं। स्वामी जी महाराज ने मनुस्मृति का उल्लेख किया और कहा कि
भगवान मनु ने कहा है कि "एतद्देश प्रसूतस्य सकाशादग्र जन्मन:
स्वं स्वं चरित्रं शिक्षेरन्प्रथिव्यां सर्व मानवा:"। अर्थात
सम्पूर्ण विश्व के मानव जीवन चरित्र निर्माण की शिक्षा भारत में संचालित गुरुकुलों में श्रेष्ठ आचार्यों से प्राप्त करते रहे हैं।
कथाव्यास स्वामी राघवाचार्य ने कहा कि मानव सभी हैं लेकिन उनकी अवस्थाएं भिन्न-भिन्न हैं। हमारे हाथ की पांचों उंगलियां समान है लेकिन उनमें कोई कनिष्ठा है तो कोई अनामिका। जब उंगलियां समान नहीं है तब मानव मानव एक समान नहीं हो सकता। उच्च साधनाओं द्वारा मानव को ऊंचा उठना पड़ता है।
श्रीराम कथा आयोजन समिति के संयोजक आचार्य डॉ. सप्तर्षि मिश्र एवं अधिवक्ता संजीव पाण्डेय ने लखनऊवासियों से कथा आयोजन में पधारने का आवाहन किया और कहा कि लखनऊ में मोती महल लॉन स्थित श्रीराम कथा पंडाल उत्तम चरित्र गढ़ने की पाठशाला बनता जा रहा है। यहां श्रीराम कथा के माध्यम से और पूज्य संतों के आशीर्वचनों से भक्तजन परम आनन्द का अनुभव कर रहे हैं तथा अनेकानेक प्रेरणास्पद शिक्षाएं प्राप्त कर रहे हैं।
डॉक्टर सप्तर्षि मिश्र ने बताया कि आज की कथा के मुख्य यजमान अखिल भारतीय साहित्य परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. सुशील कुमार त्रिवेदी एवं कात्यायन ग्रुप के निदेशक अरुण मिश्र थे। गाजियाबाद से पधारे प्रणामी संप्रदाय के संत सुदीप महात्मा, राज्य मंत्री वैश्य नटवर गोयल, ओम प्रकाश अग्रवाल, शिवानन्द पाण्डेय आदि ने भी रामकथा में भागीदारी की।




