पूर्ण गणवेश में संघ के वाघ्ययंत्रों की धुन पर बाल पथ संचलन

बहराइच। सिखों के दसवें गुरु, गुरु गोविन्द सिंह के छोटे साहिबजादों बाबा जोरावर सिंह और बाबा फतेह सिंह के साहस को श्रद्धांजलि देने के लिए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सभी स्वयंसेवकों ने 25 दिसम्बर को वीर बाल दिवस मनाते नगर में पूर्ण गणवेश में संघ के वाघ्ययंत्रों की धुन पर कदम ताल करते हुए बाल पथ संचलन निकाला। पथ संचलन का नगरवासियों ने भव्य स्वागत किया। लोगों द्वारा जगह-जगह पुष्प वर्षा की गई। संचलन मार्ग को रंगोली बनाकर,बैनरों व होर्डिंगों से सजाया गया था। कई स्थान पर ध्वनियंत्रों पर देश भक्ति के गीत लगाये गए तो कुछ स्थानों पर जनता ने ही भारतमाता के जयकारों से वातावरण को राष्ट्रमय किया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि आरएसएस अवध क्षेत्र के प्रान्त प्रचारक कौशल किशोर रहे जबकि अध्यक्षता सरदार सरजीत सिंह ने किया।
आरएसएस के घोष आनक, बांसुरी एवं बिगुल, ड्रम की मनमोहक धुन पर हाथों में दंड, दिलों में देश भक्ति भाव संजोए सैनिकों की भांति पूरे जिले के लगभग 500 बाल स्वयंसेवकों का पथ संचलन महाराज सिंह इंटर कालेज से प्रारम्भ हुआ जो गुरुनानक चौक,छोटी बाजार,चित्रशाला टॉकीज,घण्टाघर चौक, पीपल तिराहा होते हुए गुरुद्वारा श्री गुरु सिंघ सभा पहुँचा। संघ के घोष दल की मधुर ध्वनि, स्वयंसेवकों की राष्ट्रभक्ति, सामूहिक संगठन शक्ति और अनुशासन का दर्शन सभी नगरवासियों और दर्शकों को रोमांचित कर रहा था। स्वयंसेवकों के अनुशासित पथ संचलन को देखने के लिए बड़ी संख्या में सड़क के दोनों ओर भीड़ लग गई।
बाल पथ संचलन शुरू होने से पूर्व कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए मुख्य अतिथि कौशल किशोर ने कहा कि पूरे देश में गुरुपुत्रों अजीत सिंह ,जुझार सिंह,जोरावर सिंह एवं फतेह सिंह का बलिदान वीर बाल दिवस के रूप में मनाया जा रहा है ।उन्होंने कहा कि राष्ट्र रक्षा एवं धर्म रक्षा के लिए गुरु तेग बहादुर सिंह एवं गुरुपुत्रों का बलिदान सभी के लिए अनुकरणीय है ,गुरु जी एवं गुरुपुत्र सर्वस्व दानी थे। उन्होंने कहा कि हिन्दू समाज में स्वाभिमान जागृति एवं संगठन हेतु 1925 में संघ संस्थापक डॉ हेडगेवार ने आरएसएस की स्थापना की थी और 1940 में नागपुर में संघ शिक्षा वर्ग में समूचे भारत देश के लोग उपस्थित हुए।
कहा कि अब जब आरएसएस आगामी वर्ष में अपना शताब्दी वर्ष मनाएगा तो ऐसे समय में संघ ने पंच परिवर्तन का अभियान शुरू करने की योजना बनाई है।
उन्होंने पंच परिवर्तन का उद्देश्य बताते हुए कहा कि परिवार जागरूकता, पर्यावरण संरक्षण, स्वदेशी जीवन शैली, सामाजिक समरसता और नागरिक कर्तव्य के पंच परिवर्तन का संदेश हर गांव और कस्बे तक पहुंचायें और लोगों को उनका अनुसरण करने के लिए प्रेरित करें।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सरदार सरजीत सिंह ने कहा कि मुगल काल में जब जबरन धर्मांतरण कराया जा रहा था तब धर्म की रक्षा के लिए गुरु जी एवं गुरु पुत्रों ने शहादत दी। सभी को गुरु एवं पूर्वजों के बारे में जानना चाहिए।
बाल पथ संचलन के अवसर पर सामाजिक समरसता के प्रान्तीय प्रमुख राजकिशोर,जिला संघ चालक वासुदेव,विभाग कार्यवाह अम्बिका प्रसाद,विभाग प्रचारक कृष्ण कुमार,जिला कार्यवाह भूपेन्द्र,सह जिला कार्यवाह अंकुश, जिला प्रचारक अजय,विभाग प्रचार प्रमुख अतुल, जिला प्रचार प्रमुख विपिन सहित सैकड़ों की संख्या में स्वयंसेवक शामिल हुए।यह जानकारी
विपिन
जिला प्रचार प्रमुख
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने दी।




