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डॉ. चंद्र मौली द्विवेदी के साथ साक्षात्कार: सहानुभूति और उत्कृष्टता की संस्कृति को साकार करना

डॉ. चंद्र मौली द्विवेदी के साथ साक्षात्कार: सहानुभूति और उत्कृष्टता की संस्कृति को साकार करना
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"नो योर जिविकियन: जिविका हेल्थकेयर की नई पहल"


किसी भी संगठन की सच्ची ताकत उसके कर्मचारी होते हैं। हर व्यक्ति की अपनी एक कहानी होती है, जो संघर्ष, सफलता और दृढ़ संकल्प से बनी होती है। जिविका हेल्थकेयर ने इस विचार को केंद्र में रखते हुए एक अनूठी पहल शुरू की है – "नो योर जिविकियन"। यह पहल हर कर्मचारी की व्यक्तिगत और पेशेवर यात्रा को सामने लाने का एक मंच है।

पहल का उद्देश्य

"नो योर जिविकियन" पहल का मकसद है कि कर्मचारियों की कहानियों को साझा किया जाए ताकि एक-दूसरे के प्रति समझदारी और सम्मान को बढ़ावा दिया जा सके। यह मंच सहकर्मियों को न केवल पेशेवर रूप से बल्कि व्यक्तिगत रूप से भी जानने का अवसर प्रदान करता है।

पहला अध्याय: डॉ. चंद्र मौली द्विवेदी की प्रेरणादायक कहानी

इस पहल की पहली कड़ी में डॉ. चंद्र मौली द्विवेदी, सीएचआरओ और बोर्ड ऑफ डायरेक्टर, की असाधारण यात्रा पर प्रकाश डाला गया। उनके जीवन की कहानी केवल उपलब्धियों तक सीमित नहीं है; यह कहानी है सहानुभूति, दृढ़ता और उत्कृष्टता की।

बचपन और शिक्षा

डॉ. द्विवेदी का जन्म और पालन-पोषण अयोध्या में हुआ, जो अपनी समृद्ध सांस्कृतिक और पारिवारिक मूल्यों के लिए प्रसिद्ध है। उनके पिता एक चीनी मिल में पर्यवेक्षक थे और मां गृहिणी। सीमित साधनों के बावजूद, परिवार ने शिक्षा और अनुशासन को सर्वोपरि रखा। इन मूल्यों के साथ, डॉ. द्विवेदी ने मनोविज्ञान में स्नातक और स्नातकोत्तर दोनों में टॉप किया।

मानवीयता का परिचय

छात्र जीवन के दौरान ही उनकी दानशीलता और सहानुभूति सामने आई। मात्र ₹20 की राज्य छात्रवृत्ति से उन्होंने अपने दोस्तों की स्कूल फीस भर दी। यह छोटी सी घटना उनके भीतर के बड़े दिल और समाजसेवा की भावना को दर्शाती है।

भोपाल गैस त्रासदी और प्रेरणा

डॉ. द्विवेदी का जीवन उस समय एक बड़ा मोड़ लेता है जब उन्होंने भोपाल गैस त्रासदी के दौरान पीड़ित परिवारों के साथ दो साल तक काम किया। मानसिक आघात, चिंता और नुकसान से जूझ रहे परिवारों की मदद ने उनके भीतर मानवता और सेवा की भावना को और गहरा किया।

पेशेवर उपलब्धियां

राष्ट्रीय पहचान

28 वर्ष की उम्र में उन्होंने मात्र दो साल में पीएचडी पूरी की और "यंगेस्ट साइंटिस्ट अवार्ड" से सम्मानित हुए। उनकी उपलब्धियों का यह सिलसिला यहीं नहीं रुका। उन्होंने आरबीआई में यूपीएससी परीक्षा प्रणाली में नेगेटिव मार्किंग की शुरुआत की, जिससे योग्य उम्मीदवारों का चयन सुनिश्चित हुआ।

अंतरराष्ट्रीय मान्यता

डॉ. द्विवेदी ने कार्नेगी मेलॉन यूनिवर्सिटी से पीपल कैपेबिलिटी मैच्योरिटी मॉडल का अध्ययन किया। इसके बाद, उन्होंने भारत के सबसे युवा पीएचडी गाइड बनने का गौरव प्राप्त किया। उनके मार्गदर्शन में कई संगठनों ने न केवल अपनी संस्कृति को बदला बल्कि सफल आईपीओ लॉन्च किए।

जिविका हेल्थकेयर में योगदान

जिविका हेल्थकेयर में, डॉ. द्विवेदी केवल एक सीएचआरओ नहीं हैं; वह एक मेंटर और प्रेरणा स्रोत भी हैं। उन्होंने संगठन की संस्कृति को एक परिवार जैसा बनाया है, जहां हर कर्मचारी की कहानी मायने रखती है। उनकी दूरदर्शिता और नेतृत्व ने न केवल संगठन को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया है बल्कि हर जिविकियन को अपना सर्वश्रेष्ठ देने के लिए प्रेरित किया है।

हर कहानी है खास

"नो योर जिविकियन" पहल के माध्यम से हर सप्ताह एक कर्मचारी की कहानी साझा की जाएगी। यह पहल न केवल सहकर्मियों के बीच आपसी समझ और विश्वास को बढ़ाएगी, बल्कि यह भी दिखाएगी कि हर जिविकियन अपनी जगह एक नायक है।

नेतृत्व की नई परिभाषा

डॉ. द्विवेदी का जीवन और नेतृत्व हमें यह सिखाता है कि सच्चा नेतृत्व केवल उपलब्धियों में नहीं होता, बल्कि दूसरों को सशक्त और प्रेरित करने की क्षमता में होता है।

आगे की राह

"नो योर जिविकियन" पहल केवल शुरुआत है। यह मंच हर कर्मचारी को अपनी कहानी साझा करने का मौका देगा, और हर सप्ताह, एक नई प्रेरणा संगठन में गूंजेगी।

जिविका हेल्थकेयर ने यह साबित कर दिया है कि जब एक-दूसरे की कहानियों को जाना और समझा जाता है, तो संगठन और मजबूत बनता है। "नो योर जिविकियन" एक ऐसी पहल है जो सहानुभूति और उत्कृष्टता की संस्कृति को साकार करती है।

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