संभल में जामा मस्जिद के पास बने अवैध मकान और दुकानों पर चलेगा बुलडोजर, सिविल कोर्ट ने खारिज किया स्टे

संभल। कोतवाली क्षेत्र स्थित विवादित स्थल जामा मस्जिद से सटे करीब 8 बीघा कब्रिस्तान की जमीन पर बने अवैध निर्माण हटाने का रास्ता साफ हो गया है। सिविल कोर्ट ने प्रशासनिक कार्रवाई पर लगाए गए अपने ही स्टे को खारिज कर दिया है। अब तहसील कोर्ट में अंतिम प्रक्रिया पूरी होने के बाद प्रशासन अवैध कब्जों को हटाने की कार्रवाई करेगा।
मालूम हो कि श्री कल्कि सेना के सुभाष त्यागी ने जिलाधिकारी से शिकायत कर बताया था कि वर्ष 1990 से पहले यह पूरी जमीन कब्रिस्तान के रूप में दर्ज थी, लेकिन बाद में इस पर अवैध रूप से मकान और दुकानें बना ली गईं। प्रशासन ने 30 दिसंबर 2025 को जमीन की पैमाइश कराई थी। इसके खिलाफ कुछ कब्जाधारियों ने इलाहाबाद हाईकोर्ट का रुख किया, लेकिन वहां से उन्हें राहत नहीं मिली।
बाद में मामला तहसील कोर्ट भेज दिया गया। प्रशासन द्वारा नोटिस जारी करने के बाद कब्जाधारियों ने सिविल कोर्ट में याचिका दाखिल कर दी, जिस पर कोर्ट ने पहले स्टे दे दिया था। मामले में 18 में से कुछ कब्जाधारियों सलमा रानी ने जनवरी 2026 में सिविल कोर्ट संभल में याचिका दायर की थी। इसमें नगर पालिका परिषद संभल के अधिशासी अधिकारी, उत्तर प्रदेश सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड के सीईओ और डीएम व तहसीलदार को प्रतिवादी बनाया गया था।
बाद में चार याचिकाकर्ताओं ने अपनी याचिका वापस ले ली। संभल सिविल जज ललित कुमार ने 27 फरवरी 2026 को सुनवाई पूरी होने तक यथास्थिति बनाए रखने के आदेश दिए थे। इसके बाद नगर पालिका के अधिवक्ता नलिन जैन ने कोर्ट में ठोस साक्ष्य पेश करते हुए बताया कि कब्रिस्तान की भूमि पर अवैध कब्जा कर कोर्ट को गुमराह कर स्टे हासिल किया गया था।
लगातार सुनवाई के बाद शुक्रवार को कोर्ट ने सच्चाई सामने आने पर स्टे को खारिज कर दिया। नगर पालिका के अनुसार अब कब्रिस्तान की जमीन पर बने किसी भी अवैध निर्माण पर कोई न्यायिक रोक नहीं है। वहीं तहसील कोर्ट की अंतिम प्रक्रिया पूरी होते ही कब्जा हटाने की कार्रवाई शुरू की जाएगी।




