Janta Ki Awaz
उत्तर प्रदेश

संगोष्ठी में भाजपा की नीतियों पर उठे सवाल, दीनदयाल व अटल के सिद्धांतों से भटकने का आरोप

संगोष्ठी में भाजपा की नीतियों पर उठे सवाल, दीनदयाल व अटल के सिद्धांतों से भटकने का आरोप
X

लखनऊ। बौद्धिक सभा द्वारा आयोजित एक संगोष्ठी में समाजवादी चिंतक दीपक मिश्र ने वर्तमान भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की नीतियों पर तीखी आलोचना करते हुए कहा कि पार्टी अपने संस्थापक विचारकों पंडित दीनदयाल उपाध्याय और अटल बिहारी वाजपेयी के सिद्धांतों से पूरी तरह विचलित हो चुकी है।

संगोष्ठी को संबोधित करते हुए मिश्र ने आरोप लगाया कि मौजूदा भाजपा का मुख्य लक्ष्य केवल सत्ता और संपत्ति अर्जित करना रह गया है। उन्होंने कहा कि पार्टी भले ही समय-समय पर दीनदयाल उपाध्याय और वाजपेयी का नाम लेती हो, लेकिन उसके आचरण में उनके विचारों की झलक नहीं दिखाई देती।

मिश्र ने कहा कि दीनदयाल उपाध्याय के एकात्म मानववाद, स्वदेशी, सादगी और सत्यनिष्ठा जैसे मूल्यों से भाजपा दूर हो गई है। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि उपाध्याय को भारत रत्न न दिया जाना उनके योगदान का सम्मान न करने के समान है। उनके अनुसार, वर्तमान नीतियों में स्वदेशी के स्थान पर विदेशी पूंजी और कंपनियों को बढ़ावा दिया जा रहा है, जिससे देश की अर्थव्यवस्था प्रभावित हो रही है।

आर्थिक मुद्दों पर बोलते हुए उन्होंने दावा किया कि देश पर बढ़ता कर्ज आर्थिक कुप्रबंधन का संकेत है और बजट का बड़ा हिस्सा ब्याज चुकाने में खर्च हो रहा है। उन्होंने कहा कि इससे देश का आर्थिक स्वावलंबन और संप्रभुता संकट में पड़ सकती है।

वहीं अटल बिहारी वाजपेयी के संदर्भ में मिश्र ने याद दिलाया कि 1980 में भाजपा की स्थापना के समय पार्टी के संविधान में “समाजवाद” शब्द जोड़ा गया था, लेकिन वर्तमान भाजपा उस विचारधारा से दूर होती जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी समाजवाद से जुड़े प्रतीकों को समाप्त करने का प्रयास कर रही है।

संगोष्ठी में अन्य वक्ताओं, जिनमें प्रोफेसर अमिता, प्रो. डी. राय, अवनीश त्रिपाठी और विकास चंद्र यादव शामिल थे, ने भी विभिन्न विषयों पर अपने विचार व्यक्त किए।

कार्यक्रम में उपस्थित वक्ताओं ने समकालीन राजनीतिक परिदृश्य और वैचारिक बदलावों पर विस्तृत चर्चा की।

Next Story
Share it