जब परंपरा बनी उत्सव: कुशवासी महोत्सव में जागी संस्कृति, आस्था और इतिहास की त्रिवेणी
श्रीराम पुत्र कुश के नाम पर पहली बार ऐतिहासिक पहल, पहले दिन आस्था पथ पर निकला कारवां
गोरखपुर
भस्मा की पावन धरती पर रविवार को इतिहास रचते हुए ‘कुशवासी महोत्सव–2026’ का शुभारंभ वैदिक मंत्रोच्चार के बीच हुआ। भगवान श्रीराम के पुत्र कुश के नाम पर आयोजित यह अनूठा महोत्सव केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि भारतीय सांस्कृतिक चेतना, आध्यात्मिक विरासत और सामाजिक एकता का जीवंत उत्सव बनकर उभरा।
धराधाम इंटरनेशनल, क्षेत्रीय सांस्कृतिक केंद्र (संस्कृति विभाग, उत्तर प्रदेश) एवं राजकीय बौद्ध संग्रहालय, गोरखपुर के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस तीन दिवसीय महोत्सव ने पहले ही दिन लोगों को धर्म, इतिहास और संस्कृति से जोड़ने का कार्य किया।
वैदिक मंत्रों से हुआ आरंभ, मंदिरों में गूंजा आस्था का स्वर
कार्यक्रम का शुभारंभ धराधाम परिसर स्थित बाबा गंगेश्वर नाथ मंदिर में विधि-विधानपूर्वक पूजन एवं नारियल फोड़कर किया गया। अंतरराष्ट्रीय बाल व्यास श्वेतिमा माधव प्रिया के वैदिक मंत्रोच्चार ने वातावरण को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया।
इसके पश्चात श्रद्धालुओं और अतिथियों ने कोलहट भगवती, चंदा घाट तथा मुक्तेश्वर नाथ मंदिर में दर्शन-पूजन कर अपनी आस्था व्यक्त की।
इतिहास से साक्षात्कार: संग्रहालय से गोरखनाथ धाम तक यात्रा
धार्मिक यात्रा के साथ प्रतिभागियों को इतिहास से भी जोड़ा गया। राजकीय बौद्ध संग्रहालय में प्राचीन धरोहरों का अवलोकन कराया गया, जहां उपनिदेशक डॉ. यशवंत सिंह राठौर ने संग्रहालय में संरक्षित विरासत की विस्तृत जानकारी दी।
इसके बाद सभी ने गोरखनाथ मंदिर में दर्शन कर आध्यात्मिक अनुभूति प्राप्त की और पुनः कार्यक्रम स्थल के लिए प्रस्थान किया।
आने वाले दिन और भी खास
महोत्सव के अंतर्गत सोमवार को स्कूली छात्र-छात्राओं की खेलकूद प्रतियोगिताएं और प्रदर्शनी आयोजित होंगी। वहीं, 31 मार्च को मुख्य मंच पर भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुति होगी, जिसमें स्थानीय से लेकर राष्ट्रीय स्तर की प्रतिभाएं हिस्सा लेंगी।
इनकी रही गरिमामयी उपस्थिति
नगर भ्रमण एवं उद्घाटन कार्यक्रम में संयोजक एवं धराधाम प्रमुख सौहार्द शिरोमणि डॉ. सौरभ पाण्डेय, डॉ. यशवंत सिंह राठौर, गौतम पाण्डेय, रुचिरांगद पति त्रिपाठी, डॉ. सुनील दुबे, लक्ष्मीचंद शुक्ल, श्रीचंद शुक्ल, डॉ. सतीश चंद्र शुक्ल, डॉ. विनय श्रीवास्तव, सोमनाथ पाण्डेय, राजन सिंह सूर्यवंशी, कृपाशंकर राय, विजय नारायण शुक्ल, अंतरराष्ट्रीय बाल व्यास श्वेतिमा माधव प्रिया, एकता गोरखपुरी, प्रशांत पाण्डेय, गुरु पाण्डेय, प्रिया शुक्ला, नंदू यादव, सोहेल शम्सी, शुभम सिंह सहित अनेक गणमान्य जनों की गरिमामयी उपस्थिति रही।






