लखनऊ पुस्तक मेले में कला साहित्य की धूम, ‘पत्नी पुराण’ सहित कई कृतियों का विमोचन

लखनऊ, 20 मार्च।
नवाबों की नगरी में साहित्य और संस्कृति का संगम बने रवीन्द्रालय चारबाग में चल रहे पुस्तक मेले ने अपने आठवें दिन भी पाठकों को आकर्षित किया। दिन में हुई हल्की बारिश ने जहां स्टॉल संचालकों की परेशानियां बढ़ाईं, वहीं मौसम खुशनुमा होने से पुस्तक प्रेमियों की उपस्थिति उत्साहजनक रही। मेला 22 मार्च को संपन्न होगा।
🎨 कला विषयों की पुस्तकों की बढ़ी मांग
इस बार मेले में पाठकों का रुझान विशेष रूप से कला और संस्कृति से संबंधित पुस्तकों की ओर देखा गया। नृत्य, संगीत, रंगमंच और अभिनय से जुड़ी पुस्तकों के स्टॉल पर दिनभर भीड़ रही। भारतीय शास्त्रीय नृत्य, हस्त मुद्रा थेरेपी, ओडिसी नृत्य और माइथोलॉजी आधारित प्रस्तुतियों पर केंद्रित पुस्तकों को पाठकों ने खासा सराहा। लखनऊ की सांस्कृतिक विरासत पर आधारित पुस्तिकाएं भी आकर्षण का केंद्र बनी रहीं।
📖 ‘पत्नी पुराण’ पर विमर्श
मंचीय कार्यक्रमों के अंतर्गत डॉ. डी.एस. शुक्ला की पुस्तक ‘पत्नी पुराण’ का विमोचन किया गया। इस अवसर पर पूर्व मंत्री डॉ. सरजीत सिंह डंग, आर्किटेक्ट के.के. अस्थाना, डॉ. सुशील अवस्थी, विनीता सहित अन्य वक्ताओं ने पुस्तक के विभिन्न पक्षों पर विचार व्यक्त किए। कथा वाचन ने कार्यक्रम को और प्रभावशाली बना दिया।
✍️ अलका प्रमोद की पांच पुस्तकों का लोकार्पण
लेखिका अलका प्रमोद की पांच कृतियों—अविरल धारा, बदलता दृश्य, मन की नदी, फुलवारी रंग बिरंगी और नुक्कड़ नुक्कड़ खेलें खेल—का विमोचन भी किया गया। इस दौरान साहित्यकारों ने उनकी रचनाओं के सामाजिक और सांस्कृतिक महत्व पर चर्चा की।
👮♂️ समसामयिक विषयों पर चर्चा
पूर्व आईपीएस हरीश कुमार की पुस्तकों कुंभ पुलिस, पोटली बाबा और इटावा: कल और आज पर भी परिचर्चा आयोजित हुई, जिसमें प्रशासनिक अनुभवों और सामाजिक परिवर्तनों पर प्रकाश डाला गया।
🎭 काव्य और कहानी ने बांधा समां
“कविता किस्से कहानियां” कार्यक्रम के तहत युवा रचनाकारों ने अपनी प्रस्तुतियों से श्रोताओं को भाव-विभोर कर दिया। कार्यक्रम बीते दौर के शायरों और साहित्यकारों को समर्पित रहा। दिन का समापन साहित्य साधक मंच के काव्य समारोह के साथ हुआ।
📅 आज और कल के प्रमुख कार्यक्रम
21 मार्च:
पुस्तक विमोचन, काव्योत्सव, “कलम से कम्प्यूटर” विषय पर परिचर्चा, कठपुतली प्रदर्शन और विभिन्न साहित्यिक गोष्ठियां आयोजित होंगी।
22 मार्च (समापन दिवस):
पुस्तक विमोचन, काव्य कार्यक्रम, विश्व जल दिवस पर विशेष आयोजन तथा शाम 5:30 बजे समापन समारोह आयोजित किया जाएगा।
🌟 निष्कर्ष
लखनऊ पुस्तक मेला इस बार केवल पुस्तकों का बाजार नहीं, बल्कि कला, संस्कृति और साहित्य का जीवंत मंच बनकर उभरा है। विशेष रूप से कला विषयों की पुस्तकों की बढ़ती मांग ने इस आयोजन को नई पहचान दी है।




