वाराणसी से मथुरा तक सजी श्रद्धा की सेतु- रंगभरी एकादशी और होली पर काशी से लड्डू गोपाल के लिए विशेष मंगल भेंट

वाराणसी से मथुरा तक आस्था की एक सुंदर और भावनात्मक कड़ी एक बार फिर सजीव हो उठी है। रंगभरी एकादशी और होली महोत्सव के पावन अवसर पर श्री काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास ने मथुरा स्थित श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संस्थान में विराजमान भगवान श्री लड्डू गोपाल के लिए विशेष पूजित उपहार और प्रसाद ससम्मान प्रेषित किया है।
यह परंपरा केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि काशी और मथुरा के मध्य आध्यात्मिक प्रेम, सांस्कृतिक समन्वय और सनातन एकात्मता का जीवंत प्रतीक है। इस वर्ष भी यह दिव्य पहल श्रद्धा और भक्ति के साथ आगे बढ़ाई गई, जो देशभर के श्रद्धालुओं को भावनात्मक रूप से जोड़ने का कार्य कर रही है।
आध्यात्मिक परंपरा का विस्तार
न्यास द्वारा प्रारंभ की गई यह पहल विगत वर्ष से निरंतर जारी है। काशी, जो भगवान शिव की नगरी मानी जाती है, और मथुरा, जो भगवान श्रीकृष्ण की जन्मस्थली है—दोनों ही सनातन संस्कृति के प्रमुख आध्यात्मिक केंद्र हैं।
इन दोनों तीर्थों के मध्य यह सांस्कृतिक आदान-प्रदान श्रद्धालुओं के लिए विशेष महत्व रखता है और यह दर्शाता है कि हमारी परंपराएँ केवल अनुष्ठान नहीं, बल्कि जीवंत सांस्कृतिक सेतु हैं।
होली श्रृंगार की विशेष सामग्री
प्रेषित सामग्री में भगवान के होली श्रृंगार हेतु विशेष वस्त्राभूषण, सुगंधित पुष्प, अबीर-गुलाल, पूजित प्रसाद, मिष्ठान और अन्य मांगलिक सामग्री सम्मिलित है। समस्त सामग्री को बाबा विश्वनाथ के सान्निध्य में विधिवत पूजित कर भेजा गया है, ताकि मथुरा में होली उत्सव के दौरान काशी की आध्यात्मिक सहभागिता साकार हो सके।
काशी-मथुरा की सांस्कृतिक एकता
यह आयोजन दर्शाता है कि सनातन परंपरा में विभिन्न तीर्थों के मध्य परस्पर सम्मान और सहयोग की परंपरा आज भी जीवंत है। जिस प्रकार मथुरा से काशी के लिए गुलाल और प्रसाद भेजे जाते हैं, उसी भाव से काशी से मथुरा यह मंगल भेंट प्रेषित की जाती है।
यह शिव और कृष्ण, भक्ति और प्रेम, उत्सव और आध्यात्मिकता का अनूठा संगम है।
श्रद्धालुओं के लिए संदेश
न्यास ने समस्त भक्तों से अपील की है कि वे इस पावन अवसर पर आध्यात्मिक सेवा और होली महोत्सव में सहभागी बनें। काशी और मथुरा की यह दिव्य परंपरा एकता, प्रेम और सनातन संस्कृति की गौरवमयी धारा को और सशक्त करने का संदेश देती है।




