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उत्तर प्रदेश

अगर वो शंकराचार्य थे तो आपने लाठीचार्ज क्यों किया था? अविमुक्तेश्वरानंद के मामले पर सीएम योगी ने सपा को घेरा

अगर वो शंकराचार्य थे तो आपने लाठीचार्ज क्यों किया था? अविमुक्तेश्वरानंद के मामले पर सीएम योगी ने सपा को घेरा
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उत्तर प्रदेश के बजट सत्र में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने समाजवादी पार्टी पर जमकर कटाक्ष किए. उन्होंने माघ मेले में हुई घटना का भी जिक्र किया और सपा को आड़े हाथों लिया. शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद को लेकर उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति शंकराचार्य नहीं लिख सकता. हर व्यक्ति हर पीठ के आचार्य के रूप में जाकर के यहां-वहां जाकर वातावरण खराब नहीं कर सकता. उन मर्यादाओं का पालन सबको करना होगा और अगर वह शंकराचार्य थे तो आप लोगों ने वाराणसी में लाठीचार्ज क्यों किया था?

सीएम योगी ने कहा, अगर वह शंकराचार्य थे तो आपने एफआईआर क्यों दर्ज की थी. आप नैतिकता की बात करते हैं? जहां साढ़े चार करोड़ श्रद्धालु आए हों, वहां जो एग्जिट गेट हो, जहां से श्रद्धालु बाहर निकल रहे हों, उससे अंदर जाने का कोई प्रयास करता है तो एक नई भगदड़ को जन्म देता है. श्रद्धालुओं के जीवन के साथ खिलवाड़ करता है.

मुख्यमंत्री ने कहा, एक जिम्मेदार और मर्यादित व्यक्ति कभी इस प्रकार का आचरण नहीं कर सकता. आपको (सपा के लोग) पूजना है तो पूजें लेकिन मर्यादित लोग हैं. कानून पर विश्वास करते हैं. कानून पालन करना भी जानते हैं और करवाना भी. दोनों चीजों को एक साथ लागू करवाना जानते हैं लेकिन आप लोग इसके नाम पर गुमराह करना बंद करिए.

उन्होंने कहा, क्या हर व्यक्ति मुख्यमंत्री बनकर प्रदेश में घूमेगा? कोई भी मंत्री का बोर्ड लगाकर घूमेगा? कोई भी समाजवादी पार्टी या सपा का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनकर घूमेगा? एक सिस्टम है, एक व्यवस्था है. सनातन धर्म की भी यही व्यवस्थाएं हैं. शंकराचार्य का पद सनातन धर्म में सर्वोच्च और सम्मानित माना जाता है. ये बहुत पवित्र माना जाता है. सदन की व्यवस्था आप देखते होंगे, परंपरा से और नियमों से संचालित होता है.

मेरे लिए कोई अलग कानून नहीं

सीएम ने कहा, माघ मेला में मौनी अमावस्या के दिन साढ़े चार करोड़ श्रद्धालु आए. सबके लिए एक व्यवस्था बनाई गई. कानून तो सबके लिए बराबर होता है. मेरे लिए कोई अलग कानून नहीं. अगर मैं अपराध करूंगा तो उसी कानून से मैं भी देखा जाऊंगा जिस कानून से एक कॉमन मैन देखा जाएगा. मुख्यमंत्री का पद किसी कानून से ऊपर नहीं हो सकता. कोई व्यक्ति किसी कानून से ऊपर नहीं हो सकता. हम भारत के संवैधानिक व्यवस्था से जुड़े हुए लोग हैं. मेरा मानना है कि भारत के हर नागरिक को इस कानून को मानना चाहिए.

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