प्रमुख सचिव गृह, डीजीपी, एडीजी आगरा जोन के आदेशों को ठेंगा दिखा रहे डीआईजी शैलेश पांडेय, फिरोजाबाद के एसपी सौरभ दीक्षित, एसपी सिटी, व सीओ प्रवीण तिवारी

फिरोजाबाद पुलिस पर संविधान और कानून को दरकिनार करने के गंभीर आरोप, 100 से अधिक शिकायती पत्र ‘गायब’, पत्रकार को धमकाने का आरोप
फिरोजाबाद। उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद जनपद में पुलिस अधिकारियों पर संविधान, कानून और उच्चाधिकारियों के आदेशों को खुलेआम नजरअंदाज करने के गंभीर आरोप सामने आए हैं। इलेक्ट्रॉनिक एवं प्रिंट मीडिया वेलफेयर एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष एवं पीड़ित पत्रकार ने आगरा रेंज व जिले के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों पर मनमानी, उत्पीड़न और साजिशन फंसाने का आरोप लगाया है।
पीड़ित पत्रकार का आरोप है कि एसएसपी फिरोजाबाद सौरभ दीक्षित, एसपी सिटी रवि शंकर प्रसाद, सीओ सिटी प्रवीण कुमार तिवारी एवं पूर्व एसपी ग्रामीण अखिलेश भदोरिया ने नियम, कानून और संविधान को ताक पर रख दिया है। इन अधिकारियों द्वारा प्रमुख सचिव गृह, डीजीपी, एडीजी एवं डीआईजी के आदेशों की खुलेआम अवहेलना की गई।
@dgpup @Rajeevkrishna69 व @adgzoneagra के आदेशों को ठेंगा दिखा रहे @firozabadpolice के sp @SaurabhDixit90
— सुघर सिंह पत्रकार 'प्रदेश प्रभारी' (@SugharSin) January 31, 2026
sp city रवि शंकर
cocity प्रवीण तिवारी
व पूर्व aspअखिलेश भदौरिया @myogiadityanath @myogioffice @SaurabhDixit90
100शिकायती पत्र गायब
नही दी जनसूचना
Dgp का आदेश हवा को ठेंगा pic.twitter.com/cnUlWOSFtM
👉 100 से अधिक से शिकायती पत्रों को किया गया नजरअंदाज
पीड़ित के अनुसार बीते एक वर्ष में उन्होंने अपने मुकदमे को लेकर विवेचना ट्रांसफर, विवेचक द्वारा की गई लापरवाही, की जांच को लेकर 100 से अधिक प्रार्थना पत्र मुख्यमंत्री, प्रमुख सचिव गृह, डीजीपी, एडीजी आगरा जोन, डीआईजी आगरा रेंज, एसएसपी, एसपी ग्रामीण एवं सीओ फिरोजाबाद को पंजीकृत डाक एवं ई-मेल के माध्यम से भेजे, लेकिन एक भी प्रार्थना पत्र की न तो जांच हुई और न ही कोई जवाब दिया गया। आरोप है कि सभी प्रार्थना पत्रों को जानबूझकर रद्दी की टोकरी में डाल दिया गया और संबंधित मामलों में कोई वैधानिक कार्रवाई नहीं की गई।
👉 जन सूचना अधिकार अधिनियम का भी उल्लंघन
पीड़ित पत्रकार सुघर सिंह जाटव ने बताया कि जब उन्होंने सूचना का अधिकार अधिनियम (RTI) के तहत दिनाँक 23 मई को जनसूचना अधिकारी पुलिस ऑफिस फिरोजाबाद से जन सूचना मांगी, तो फर्जी नियमों का हवाला देकर जनसूचना अधिकारी एसपी सिटी ने सूचना नही दी और बताया कि मुकदमे की विवेचना के दौरान जनसूचना नही दी सकती, जब कि मुकदमा कई माह पहले ही खत्म किया जा चुका है। इसके बाद पीड़ित द्वारा 7 अगस्त को डीजीपी से उक्त मामले की शिकायत की तो डीजीपी कार्यालय के जनसूचना अधिकारी ने 15 अगस्त को एसएसपी एसएसपी फिरोजाबाद को जनसूचना देने का निर्देश दिया लेकिन एसएसपी ने उस आदेश को रद्दी की टोकरी में डाल दिया। इसके बाद पीड़ित पत्रकार डीआईजी आगरा से मिलकर 7 पेज की शिकायत की जिसमें एसपी सिटी को भी आरोपी बनाया गया और दूसरे जिले से जांच कराए जाने का अनुरोध किया गया, लेकिन डीआईजी ने नियम कानून ताक पर रखकर एसएसपी फिरोजाबाद को जांच का आदेश कर दिया, जब तीन महीने तक कोई जांच नही हुई तो पीड़ित पुनः डीआईजी से मिला और न्याय की गुहार लगाई और जांच आख्या मांगी, तो 7 पेज की शिकायत की जांच सिर्फ 1 पेज में ही लीपापोती कर दी गयी, पता चला कि एसएसपी ने दागी आरोपी एसपी सिटी से ही जांच करा डाली और वादी का ब्यान भी दर्ज नही किया और खानापूरी करते हुए फर्जी जांच कर डाली, जब पीड़ित ने डीआईजी से निवेदन किया कि जांच किसी अन्य जिले से करा ली जाए तो डीआईजी ने एसएसपी फिरोजाबाद को फोन लगाया आदेश दिया कि यह पत्रकार पुलिस बहुत शिकायत करता है इसके ऊपर 4 -6 मुकदमे लादकर इसको जेल भेज दो और पीड़ित पत्रकार से अभद्रता करते हुए डीआईजी ने भगा दिया।
इसके बाद पीड़ित द्वारा डीआईजी आगरा रेंज कार्यालय को आवेदन भेजकर 5 जनवरी को जनसूचना के लिए आवेदन भेजा, जिसे डीआईजी कार्यालय द्वारा 7 जनवरी को एसएसपी फिरोजाबाद को पत्र भेजकर सूचना देने का निर्देश दिया गया लेकिन आज तक जनसूचना नही दी। पीड़ित ने बताया कि डीआईजी अपने कार्यालय से खुद जनसूचना दिला सकते थे लेकिन जानबूझकर अभियुक्तों और भृष्ट पुलिस अधिकारियों को बचाने के लिए पीड़ित को जनसूचना नही दी गयी। पीड़ित पत्रकार का कहना है कि जो प्रार्थना पत्र डीआईजी कार्यालय में दिए गए और पंजीकरण डाक व ईमेल से भेजे गए थे उनकी सूचना डीआईजी द्वारा देनी चाहिए थी लेकिन डीआईजी ने फिरोजाबाद पुलिस के ऊपर टाल दी जब कि फिरोजाबाद पुलिस ने पूर्व में ही जन सूचना नहीं दी तब उनसे क्या उम्मीद की जाए ?। इसकी शिकायत भी डीजीपी कार्यालय को भी की गई थी लेकिन 6 माह बीतने के बावजूद भी जन सूचना अभी तक प्राप्त नहीं हुई है
👉 पुलिस द्वारा पीड़ित पत्रकार की एक साल की कॉल डिटेल निकालकर फंसाने की गहरी साजिश का पर्दाफाश
पीड़ित पत्रकार ने आरोप लगाया कि डीआईजी, एसएसपी, अपर पुलिस अधीक्षक ग्रामीण अखिलेश भदौरिया, सीओ प्रवीण कुमार तिवारी, सहित अन्य अधिकारियों ने मिलकर आरोपी युवती से सांठगांठ कर, नियमों को दरकिनार करते हुए एक साल की कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) निकलवाई और छेड़छाड़ रेप के झूठे मामले में फंसाने का प्रयास किया गया। लेकिन लोकेशन न मिल पाने के कारण फांसने में असफल रहे। पीड़ित पत्रकार ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि विवेचक सीओ सिटी प्रवीण कुमार तिवारी ने उनको ब्यान लेने के बहाने बुलाकर जातिसूचक गालियां दीं, अभियुक्त युवती से समझौता न करने पर जेल भेजने की धमकी दी, बावजूद इसके आज तक कोई विभागीय जांच या कानूनी कार्रवाई नहीं की गई।
👉 पीड़ित पत्रकार बोला “अब सिर्फ हाईकोर्ट से ही उम्मीद”
इलेक्ट्रॉनिक एवं प्रिंट मीडिया वेलफेयर एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि “जब मुख्यमंत्री से लेकर डीजीपी तक को भेजे गए प्रार्थना पत्रों का कोई संज्ञान नहीं लिया गया, जन सूचना के आदेशों की अवहेलना हुई और पुलिस ने खुद ही कानून तोड़ना शुरू कर दिया, तो अब न्याय की आखिरी उम्मीद सिर्फ माननीय हाईकोर्ट ही बची है।” उन्होंने स्पष्ट किया कि वह सभी संबंधित पुलिस अधिकारियों के विरुद्ध हाईकोर्ट में याचिका दायर करेंगे और पूरे मामले की न्यायिक जांच की मांग करेंगे।
👉 1 वर्ष में पुलिस के उच्चाधिकारियों से 100 शिकायतें, कोई जाँच नही, पत्र किये गायब, नही दी जनसूचना
पीड़ित पत्रकार ने बताया कि 11 फरवरी, 13 फरवरी, 14 फरवरी, 15 फ़रवरी, 25 मार्च, 31 जुलाई, 15 सितम्बर, 22 नवंबर को मुख्य न्यायाधीश इलाहाबाद हाईकोर्ट, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग, राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग, मुख्यमंत्री, प्रमुख सचिव गृह, डीजीपी, डीजी विशेष जाँच प्रकोष्ठ, एडीजी आगरा जोन, डीआईजी आगरा रेंज, एसएसपी फिरोजाबाद, एसपी ग्रामीण फिरोजाबाद, सीओ शिकोहाबाद, को पंजीकृत डाक व ईमेल से लगभग 100 पत्र भेजे लेकिन 1 भी पत्र की कोई जांच नही हुई। न ही मेरे ब्यान दर्ज किए गए। सभी पत्रों में मनमाने तरीके से अभियुक्तों के आर्थिक लाभ लेकर फर्जी निस्तारण कर दिया।




