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उत्तर प्रदेश

एक कौम–एक वतन के उद्घोष संग लखनऊ में ऐतिहासिक संगोष्ठी सम्पन्न

एक कौम–एक वतन के उद्घोष संग लखनऊ में ऐतिहासिक संगोष्ठी सम्पन्न
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अनवार खाँ मोनू

लखनऊ।

देश की एकता, अखंडता और सामाजिक समरसता को नई धार देने के उद्देश्य से मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के तत्वावधान में आयोजित “एक कौम, एक वतन—हिंदुस्तान” विषयक संगोष्ठी मंगलवार को राजधानी लखनऊ में उत्साह, राष्ट्रभाव और वैचारिक दृढ़ता के साथ सम्पन्न हुई। इंदिरा नगर स्थित इस्म गर्ल्स डिग्री कॉलेज, सी-ब्लॉक में आयोजित इस संगोष्ठी ने राष्ट्र प्रथम के संकल्प को जन-जन तक पहुंचाने का कार्य किया।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के मार्गदर्शक माननीय डॉ. इंद्रेश कुमार ने अपने ओजस्वी उद्बोधन में कहा कि—

“हिंदुस्तान किसी एक मजहब, वर्ग या विचारधारा का नहीं, बल्कि 140 करोड़ भारतीयों की साझा विरासत है। जब सोच में एकता आती है, तभी राष्ट्र अडिग बनता है।”

उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि आज जरूरत है मजहब की दीवारों को तोड़कर राष्ट्र की मजबूती के लिए एक स्वर में खड़े होने की।

विशिष्ट अतिथि उत्तर प्रदेश सरकार में अल्पसंख्यक कल्याण, मुस्लिम वक्फ एवं हज राज्यमंत्री दानिश अंसारी ने कहा—

“देश की तरक्की तभी संभव है, जब हर नागरिक खुद को पहले भारतीय माने। ‘एक कौम–एक वतन’ का संदेश सामाजिक समरसता की मजबूत नींव है।”

उन्होंने युवाओं से राष्ट्र निर्माण में सक्रिय सहभागिता निभाने का आह्वान किया।

संगोष्ठी में जामिया हमदर्द के रजिस्ट्रार कर्नल ताहिर मुस्तफा ने कहा—

“हिंदुस्तान की पहचान विविधता में एकता है। हमारी ताकत अलग-अलग होने में नहीं, बल्कि एक साथ खड़े होने में है।”

मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के राष्ट्रीय संयोजक सैयद रज़ा रिज़वी ने कहा कि—

“हिंदुस्तान फर्स्ट और हिंदुस्तानी बेस्ट की भावना ही राष्ट्र को वैश्विक नेतृत्व की ओर ले जाएगी।”

सामाजिक कार्यकर्ता व लेखिका डॉ. शालिनी अली बक़ा ने अपने विचार रखते हुए कहा—

“जब महिलाएं और युवा राष्ट्रवादी सोच से जुड़ते हैं, तब सामाजिक परिवर्तन स्वतः तेज हो जाता है।”

कार्यक्रम में प्रो. डॉ. शाहिद अख़्तर (कार्यवाहक अध्यक्ष, एनसीएमआई, भारत सरकार) ने कहा—

“शिक्षा ही वह माध्यम है, जो समाज को जोड़ने और राष्ट्र को मजबूत करने का कार्य करती है।”

वहीं डॉ. राज कुमार मित्तल, कुलपति, अंबेडकर विश्वविद्यालय ने कहा—

“सकारात्मक संवाद और वैचारिक स्पष्टता ही सामाजिक समरसता की सबसे बड़ी पूंजी है।”

आयोजकों के अनुसार संगोष्ठी का उद्देश्य समाज के सभी वर्गों को राष्ट्र प्रथम की भावना से जोड़ते हुए आपसी भाईचारा, राष्ट्रीय एकता और सौहार्द को मजबूत करना रहा, जिसमें कार्यक्रम पूर्णतः सफल सिद्ध हुआ।

कार्यक्रम में शिक्षाविदों, बुद्धिजीवियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, युवाओं एवं विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधियों की भारी सहभागिता रही। समापन अवसर पर स्वागतकर्ता रजा हुसैन, आलोक चतुर्वेदी एवं डॉ. शौकत खान ने कहा—

“जब राष्ट्र सर्वोपरि होगा, तभी समाज सुरक्षित और सशक्त बनेगा।”

कार्यक्रम का समापन राष्ट्र की एकता, अखंडता और सौहार्द को और अधिक मजबूत करने के संकल्प के साथ किया गया।

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