अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय को नई ऊँचाइयों तक ले जाने की जिम्मेदारी डॉ. शाहिद अख्तर पर

राष्ट्रपति द्वारा बोर्ड ऑफ गवर्नर्स काउंसिल का सदस्य मनोनीत, देशभर में हर्ष की लहर
रजा रिज़वी/आनन्द गुप्ता
नई दिल्ली।
भारत की महामहिम राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने शिक्षा, सामाजिक सरोकार और राष्ट्र निर्माण के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले प्रख्यात शिक्षाविद् डॉ. शाहिद अख्तर को अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) की बोड ऑफ गवर्नर्स काउंसिल का सदस्य नामित कर एक ऐतिहासिक निर्णय लिया है। उनका यह कार्यकाल 18 जनवरी 2029 तक प्रभावी रहेगा।
डॉ. शाहिद अख्तर वर्तमान में जामिया मिल्लिया इस्लामिया, नई दिल्ली के प्रबंधन विभाग में प्रोफेसर के रूप में सेवाएं दे रहे हैं। इससे पूर्व वे झारखंड अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष तथा राष्ट्रीय उर्दू भाषा विकास परिषद के उपाध्यक्ष जैसे महत्वपूर्ण दायित्वों का कुशलतापूर्वक निर्वहन कर चुके हैं। अपने दीर्घ प्रशासनिक अनुभव, दूरदर्शी सोच और अकादमिक उत्कृष्टता के बल पर उन्होंने हर मंच पर अपनी अलग पहचान बनाई है।
राष्ट्रवादी विचारधारा से जुड़ाव रखते हुए डॉ. शाहिद अख्तर ने राष्ट्रीय अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थान आयोग (एनसीएमईआई) में कार्यकारी अध्यक्ष एवं सदस्य के रूप में कार्य करते हुए देशभर के अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों को प्रगति की मुख्यधारा से जोड़ने में अहम भूमिका निभाई। शिक्षा के क्षेत्र में उनका योगदान न केवल नीतिगत स्तर पर प्रभावी रहा है, बल्कि जमीनी स्तर पर भी दूरगामी परिणाम लेकर आया है।
डॉ. शाहिद अख्तर अपनी संयमित, ईमानदार और राष्ट्रवादी सोच के लिए विशेष रूप से जाने जाते हैं। वे आधुनिक विचारधारा और भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों का संतुलित समन्वय प्रस्तुत करते हुए एक जागरूक प्रबुद्ध वर्ग के प्रेरणास्रोत बने हैं। उनका मानना है कि शिक्षा ही वह माध्यम है, जो समाज को सशक्त, समरस और आत्मनिर्भर बना सकती है।
एएमयू की काउंसिल का सदस्य बनने पर डॉ0 इंद्रेश कुमार सहित मुस्लिम राष्ट्रीय मंच , देशभर के शिक्षाविदों, विश्वविद्यालयों के वाइस-चांसलरों, प्रोफेसरों एवं सामाजिक कार्यकर्ताओं ने उन्हें बधाई देते हुए इसे शिक्षा जगत के लिए एक युगांतकारी उपलब्धि बताया है। सभी ने आशा व्यक्त की कि डॉ. शाहिद अख्तर के मार्गदर्शन में अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय शिक्षा, शोध और नवाचार के क्षेत्र में नए कीर्तिमान स्थापित करेगा।




