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रामराज्य और समाजवाद की समदर्शिता पर विमर्श जरूरी : हरिवंश

रामराज्य और समाजवाद की समदर्शिता पर विमर्श जरूरी : हरिवंश
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लोकतंत्र में विचारधाराओं का विशेष महत्व – दीपक मिश्र

प्रख्यात पत्रकार, लेखक एवं राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश से समाजवादी चिंतक दीपक मिश्र ने शिष्टाचार भेंट की। इस अवसर पर दीपक मिश्र ने उन्हें अपनी पुस्तकें — “रामराज्य, राष्ट्रीयता और समाजवाद” तथा “समाजवाद ही क्यों” — भेंट कीं।

विमर्श के दौरान उपसभापति हरिवंश ने कहा कि रामराज्य की अवधारणा में समाजवाद और सामाजिक न्याय की सशक्त पैरोकारी निहित है। उन्होंने कहा कि इसी वैचारिक पृष्ठभूमि के कारण महान स्वतंत्रता सेनानी एवं समाजवादी चिंतक डॉ. राममनोहर लोहिया ने रामायण मेला की संकल्पना प्रस्तुत की थी। हरिवंश ने इस बात पर बल दिया कि नई पीढ़ी को रामराज्य और समाजवाद पर उपलब्ध प्रामाणिक साहित्य का अध्ययन करना चाहिए तथा इन शाश्वत विषयों पर सार्थक और तथ्यपरक बहस चलनी चाहिए।

समाजवादी चिंतक दीपक मिश्र ने कहा कि रामराज्य और समाजवाद दोनों का उद्देश्य समतामूलक, शोषणविहीन और समृद्ध समाज का निर्माण है। उन्होंने कहा कि ये दोनों अवधारणाएँ हमारे महान ऋषियों और भारतीय चिंतकों की यूटोपियन कल्पनाएँ हैं, जिनकी साझा वैचारिक विरासत पर अब तक सम्यक और व्यापक चर्चा नहीं हो सकी है, जबकि अलग-अलग इन विषयों पर पर्याप्त साहित्य उपलब्ध है।

दीपक मिश्र ने यह भी रेखांकित किया कि लोकतंत्र में वैचारिक अभियानों और विचारधाराओं की अपनी विशिष्ट और अपरिहार्य भूमिका होती है।

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