मौनी अमावस्या पर संगम में आस्था का महापर्व, करोड़ों श्रद्धालुओं ने किया पावन स्नान

रिपोर्ट : विजय तिवारी
प्रयागराज।
मौनी अमावस्या के पावन अवसर पर प्रयागराज स्थित संगम में आस्था का अद्भुत और ऐतिहासिक दृश्य देखने को मिला। तड़के ब्रह्म मुहूर्त से ही श्रद्धालुओं का सैलाब संगम तट की ओर उमड़ पड़ा। देश के कोने-कोने के साथ-साथ विदेशों से आए श्रद्धालु गंगा, यमुना और पौराणिक सरस्वती के संगम में पवित्र स्नान कर पुण्य अर्जित करते नजर आए।
अखाड़ों के संतों ने किया अमृत स्नान
मौनी अमावस्या के प्रमुख स्नान पर्व में विभिन्न अखाड़ों के साधु-संतों ने भी परंपरागत विधि-विधान से संगम में डुबकी लगाई। किन्नर अखाड़ा सहित अन्य अखाड़ों के संतों की उपस्थिति ने स्नान पर्व को और भी विशिष्ट बना दिया। संतों के स्नान के दौरान हर-हर गंगे और जयकारों से संगम क्षेत्र गूंजता रहा।
श्रद्धालुओं की संख्या ने तोड़े रिकॉर्ड
प्रशासनिक आकलन के अनुसार, मौनी अमावस्या से एक दिन पूर्व ही करीब 1.5 करोड़ श्रद्धालुओं ने संगम में स्नान किया था। मौनी अमावस्या के दिन यह संख्या और बढ़ते हुए लगभग 3 करोड़ श्रद्धालुओं तक पहुंचने का अनुमान जताया गया। देर शाम तक स्नान का क्रम लगातार जारी रहा।
व्यापक व्यवस्थाएं और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम
श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने अभूतपूर्व इंतजाम किए।
लगभग 3 किलोमीटर लंबे स्नान घाट तैयार किए गए
संगम क्षेत्र में अस्थायी पोंटून पुलों का निर्माण किया गया
श्रद्धालुओं के ठहराव के लिए विशाल टेंट सिटी विकसित की गई
सुरक्षा व्यवस्था के लिए पुलिस, अर्धसैनिक बल, जल पुलिस और गोताखोरों की तैनाती की गई
चिकित्सा शिविर, एंबुलेंस और आपातकालीन सेवाएं लगातार सक्रिय रहीं
भीड़ नियंत्रण और सुचारु आवागमन के लिए अलग-अलग स्नान मार्ग निर्धारित किए गए, जिससे किसी प्रकार की अव्यवस्था न हो।
आस्था, अनुशासन और प्रशासनिक समन्वय
मौनी अमावस्या को हिंदू धर्म में विशेष पुण्यदायी माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन मौन, स्नान और दान करने से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है। इसी आस्था के साथ श्रद्धालु कड़ाके की ठंड और लंबी यात्रा के बावजूद संगम पहुंचकर पवित्र स्नान करते दिखाई दिए।
श्रद्धालुओं के सहयोग और प्रशासनिक सतर्कता के चलते अब तक पूरा स्नान पर्व शांतिपूर्ण, सुरक्षित और सुव्यवस्थित ढंग से संपन्न होता नजर आया। संगम पर उमड़ा यह जनसैलाब न केवल गहरी आस्था का प्रतीक है, बल्कि भारतीय सांस्कृतिक और आध्यात्मिक परंपरा की विराटता को भी रेखांकित करता है।




