ऑर्थो वार्ड में इलाज के साथ चूहों का खतरा, वायरल वीडियो के बाद प्रशासन हरकत में गोंडा मेडिकल कॉलेज में स्वच्छता पर सवाल, डीएम की नाराजगी के बाद जांच शुरू

रिपोर्ट : विजय तिवारी
गोंडा।
उत्तर प्रदेश के गोंडा स्थित राजकीय मेडिकल कॉलेज एक बार फिर स्वास्थ्य व्यवस्थाओं को लेकर चर्चा में है। मेडिकल कॉलेज के ऑर्थोपेडिक वार्ड से जुड़ा एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद अस्पताल की स्वच्छता व्यवस्था और मरीजों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। वायरल वीडियो में वार्ड के भीतर चूहों की मौजूदगी साफ देखी जा सकती है, जो मरीजों के बेड, फर्श और ऑक्सीजन पाइपलाइन के आसपास घूमते नजर आ रहे हैं।
वीडियो ने खोली व्यवस्था की पोल
वायरल वीडियो में चूहे बिना किसी डर के वार्ड में
इधर-उधर दौड़ते दिख रहे हैं। बताया जा रहा है कि यह वही वार्ड है जहां गंभीर रूप से घायल और सर्जरी के बाद के मरीज भर्ती रहते हैं। ऐसे संवेदनशील वार्ड में चूहों की मौजूदगी से संक्रमण फैलने का खतरा बढ़ गया है, जिससे मरीजों और उनके परिजनों में भय का माहौल है।
जिलाधिकारी की फटकार,
कॉलेज प्रशासन पर दबाव
मामले की जानकारी मिलते ही जिलाधिकारी ने मेडिकल कॉलेज प्रशासन को कड़ी फटकार लगाई। डीएम की नाराजगी के बाद कॉलेज प्रबंधन पर तत्काल कार्रवाई का दबाव बना। इसके बाद मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल ने पूरे मामले की जांच के आदेश जारी किए हैं और संबंधित अधिकारियों से रिपोर्ट तलब की गई है।
प्रबंधन का पक्ष: बाहर से खाना आने का दावा
मेडिकल कॉलेज प्रशासन का कहना है कि वार्ड में भर्ती मरीजों के तीमारदार बाहर से भोजन लेकर आते हैं। खाने-पीने के सामान और जूठन के कारण चूहे वार्ड की ओर आकर्षित हो जाते हैं। प्रबंधन के अनुसार वीडियो सामने आने के बाद पेस्ट कंट्रोल और दवा का छिड़काव कराया गया है, ताकि स्थिति को नियंत्रित किया जा सके।
मरीजों की शिकायतें
ऑर्थो वार्ड में भर्ती एक मरीज ने बताया कि इस वार्ड में चूहों के साथ-साथ आवारा कुत्तों की समस्या भी बनी रहती है। चूहे कपड़े और दवाइयां तक कुतर देते हैं, जिससे नुकसान होता है और डर बना रहता है। मरीज का आरोप है कि वार्ड में सफाईकर्मी और स्टाफ की नियमित मौजूदगी नहीं रहती, जिससे समस्याओं की शिकायत करना भी मुश्किल हो जाता है।
स्वास्थ्य के लिए बड़ा खतरा
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक अस्पतालों में चूहों की मौजूदगी केवल गंदगी का मामला नहीं है। इससे लेप्टोस्पायरोसिस जैसी गंभीर बीमारियों के फैलने की आशंका रहती है। खासकर ऑर्थो वार्ड में, जहां मरीजों के घाव खुले होते हैं या सर्जरी हुई होती है, वहां संक्रमण का खतरा कहीं अधिक होता है।
इसके अलावा ऑक्सीजन पाइपलाइन के पास चूहों का घूमना तकनीकी और सुरक्षा दृष्टि से भी खतरनाक माना जा रहा है।
व्यवस्था पर उठे सवाल
गोंडा जिला अस्पताल को मेडिकल कॉलेज का दर्जा मिले काफी समय हो चुका है। नई इमारतें, बढ़ा हुआ स्टाफ और सफाई पर होने वाले भारी खर्च के बावजूद इस तरह की स्थिति सामने आना प्रशासनिक लापरवाही की ओर इशारा करता है। मरीजों के परिजनों पर जिम्मेदारी डालने को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं कि क्या इससे अस्पताल प्रबंधन अपनी जिम्मेदारी से मुक्त हो सकता है।
फिलहाल मेडिकल कॉलेज प्रशासन की ओर से जांच जारी होने की बात कही जा रही है। अब देखना यह होगा कि जांच के बाद किस स्तर पर जिम्मेदारी तय होती है और क्या भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए स्थायी और प्रभावी कदम उठाए जाते हैं या नहीं।




