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विराट हिंदू सम्मेलन में एकता का संदेश - संगठित समाज से ही होगा राष्ट्र का सशक्त निर्माण : विष्णुदेवाचार्य

विराट हिंदू सम्मेलन में एकता का संदेश - संगठित समाज से ही होगा राष्ट्र का सशक्त निर्माण : विष्णुदेवाचार्य
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आनन्दगुप्ता / सीताराम गुप्ता

श्रावस्ती।

गिलौला नगर स्थित सरस्वती शिशु मंदिर परिसर में रविवार को आयोजित विराट हिंदू सम्मेलन ने पूरे क्षेत्र में सामाजिक चेतना और सांस्कृतिक एकता का संदेश फैलाया। बड़ी संख्या में लोगों की उपस्थिति के बीच आयोजित इस सम्मेलन में समाज को संगठित करने, जातीय भेदभाव से ऊपर उठकर एकजुट होने और सांस्कृतिक मूल्यों की रक्षा का आह्वान किया गया।

कार्यक्रम का शुभारंभ वैदिक मंत्रोच्चार के साथ हुआ, जिसके पश्चात अतिथियों का स्वागत अंगवस्त्र व पुष्पगुच्छ भेंट कर किया गया। सम्मेलन में मुख्य अतिथि के रूप में कौशल जी पीठाधीरेश्वर विष्णु देवाचार्य महाराज उपस्थित रहे। उनके साथ ब्रह्माकुमारी संस्थान से शकुंतला जी, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के जिला प्रचारक भानु जी, सेवा भारती के अध्यक्ष राजीव पांडे, खंड प्रचारक मनोज पांडे तथा कुलदीप जी विशिष्ट अतिथि के रूप में मंचासीन रहे।

संगठित हिंदू समाज ही समय की मांग

मुख्य वक्ता ने अपने ओजस्वी उद्बोधन में कहा कि आज आवश्यकता इस बात की है कि हिंदू समाज आपसी मतभेद और जातीय विभाजन को त्याग कर एकजुट हो। उन्होंने कहा, “जब समाज संगठित होता है, तभी वह अपनी संस्कृति, परंपरा और मूल्यों की रक्षा कर पाता है। बिखरा हुआ समाज कमजोर होता है, जबकि संगठित समाज राष्ट्र की रीढ़ बनता है।”

उन्होंने आगे कहा कि जातियों में बंटकर रहने से समाज का न तो समग्र विकास संभव है और न ही व्यक्ति का। अगर हर व्यक्ति समाज के हित को प्राथमिकता दे, तो इससे सामाजिक समरसता बढ़ेगी और आने वाली पीढ़ियों को एक मजबूत दिशा मिलेगी।

युवाओं से आगे आने का आह्वान

सम्मेलन में विशेष रूप से युवाओं से सामाजिक और सांस्कृतिक गतिविधियों में सक्रिय भूमिका निभाने की अपील की गई। वक्ताओं ने कहा कि आज का युवा अगर संस्कारों से जुड़कर आगे बढ़ेगा, तो समाज में सकारात्मक बदलाव निश्चित है। शिक्षा, सेवा और संस्कार—इन तीनों के माध्यम से ही सशक्त समाज की नींव रखी जा सकती है।

गणमान्य लोगों की रही मौजूदगी

कार्यक्रम में युवा नेता हरिओम तिवारी, अतुल पाठक, शिक्षक नेता जितेंद्र द्विवेदी, श्रवण कुमार सायक सहित क्षेत्र के अनेक सामाजिक कार्यकर्ता और बुद्धिजीवी मौजूद रहे। सभी ने एक स्वर में समाज में एकता, आपसी भाईचारे और सांस्कृतिक चेतना को मजबूत करने की आवश्यकता पर बल दिया।

सामाजिक समरसता पर हुई चर्चा

सम्मेलन के दौरान कई वक्ताओं ने सामाजिक समरसता, सेवा कार्यों के विस्तार और जरूरतमंदों तक सहायता पहुँचाने के विषय पर भी अपने विचार रखे। सेवा भारती द्वारा किए जा रहे सामाजिक कार्यों की सराहना करते हुए समाज के प्रत्येक वर्ग से सेवा भावना अपनाने का आग्रह किया गया।

सैकड़ों लोगों की सहभागिता

सम्मेलन में गिलौला सहित आसपास के गांवों और कस्बों से सैकड़ों की संख्या में लोग पहुंचे। पूरे कार्यक्रम के दौरान परिसर “भारत माता की जय” और “वंदे मातरम्” के नारों से गूंजता रहा। लोगों में कार्यक्रम को लेकर खासा उत्साह देखने को मिला।

आयोजन का उद्देश्य

आयोजकों ने बताया कि इस सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य हिंदू समाज को संगठित करना, युवाओं में सांस्कृतिक चेतना जगाना और सामाजिक कुरीतियों को दूर करने के लिए सामूहिक प्रयासों को बढ़ावा देना है। उन्होंने कहा कि इस तरह के आयोजन आगे भी निरंतर किए जाएंगे, ताकि समाज में जागरूकता की लौ जलती रहे।

कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ। अंत में आयोजकों ने सभी अतिथियों और उपस्थित जनसमुदाय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए समाजहित में निरंतर कार्य करने का संकल्प दोहराया।

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