लखनऊ - केजीएमयू प्रकरण की जांच एसटीएफ को सौंपे जाने का एनएमओ ने किया स्वागत

किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (केजीएमयू) से जुड़े कथित लव जिहाद, बलात्कार एवं मतांतरण के गंभीर आरोपों वाले मामले की जांच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर अब स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) को सौंप दी गई है। इसके साथ ही केजीएमयू प्रशासन द्वारा गठित आंतरिक जांच समिति को भंग कर दिया गया है।
इस निर्णय का स्वागत करते हुए एनएमओ लखनऊ महानगर के अध्यक्ष डॉ. शिवम कृष्णन ने कहा कि यह मामला अब केवल एक संस्थान तक सीमित नहीं रहा, बल्कि समाज और कानून-व्यवस्था से जुड़ा अत्यंत गंभीर विषय बन चुका है। ऐसे में एसटीएफ जैसी स्वतंत्र एजेंसी द्वारा जांच कराना एक सही और आवश्यक कदम है, जिससे निष्पक्ष एवं पारदर्शी जांच संभव हो सकेगी।
डॉ. शिवम कृष्णन ने आरोप लगाया कि जैसे ही केजीएमयू के कुलपति के तथाकथित जिहादी फ्रॉड ओएसडी अब्बास से जुड़ा मामला सामने आया, उसी के बाद उनके करीबी डॉ. के.के. सिंह द्वारा केजीएमयू में हड़ताल का आह्वान किया गया। उनके अनुसार, यह कदम गंभीर आरोपों से ध्यान भटकाने का प्रयास है।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि रमीज को बचाने में लगे विभागीय अधिकारियों को संरक्षण देने के लिए केजीएमयू प्रशासन लगातार नई-नई रणनीतियां बना रहा है, लेकिन जितना अधिक मामले को दबाने की कोशिश की जा रही है, उतना ही यह और व्यापक होता जा रहा है।
डॉ. शिवम कृष्णन ने कहा कि केजीएमयू शिक्षक संघ और प्रशासन उस तस्वीर पर कोई स्पष्ट जवाब नहीं दे पा रहे हैं, जिसमें बड़ी संख्या में मुस्लिम समुदाय के लोग वीसी कार्यालय को घेरते हुए दिखाई देते हैं। उनका आरोप है कि इसी मुद्दे से ध्यान हटाने के लिए बार-बार नए विवाद खड़े किए जा रहे हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि केजीएमयू वीसी का ओएसडी अब्बास सत्ता का एक केंद्र बन चुका है, जहां से कथित तौर पर जिहादी सोच को बढ़ावा मिल रहा है, लेकिन इस विषय पर वीसी कार्यालय और शिक्षक संघ चुप्पी साधे हुए हैं।
मुख्यमंत्री द्वारा मामले की जांच एसटीएफ को सौंपे जाने पर संतोष व्यक्त करते हुए डॉ. शिवम कृष्णन ने कहा कि अब उम्मीद है कि सच्चाई सामने आएगी और जो भी दोषी पाए जाएंगे, उनके विरुद्ध सख्त कार्रवाई होगी। उन्होंने कहा कि समाज और संस्थानों में भरोसा तभी कायम रह सकता है, जब जांच बिना किसी दबाव और भेदभाव के की जाए।
— डॉ. शिवम कृष्णन
अध्यक्ष, एनएमओ महानगर, लखनऊ




