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दस्तावेज़ी जांच के बाद देवरिया में मजार पर कार्रवाई, प्रशासन ने बताया—कानून के तहत उठाया गया कदम

दस्तावेज़ी जांच के बाद देवरिया में मजार पर कार्रवाई, प्रशासन ने बताया—कानून के तहत उठाया गया कदम
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रिपोर्ट : विजय तिवारी

उत्तर प्रदेश।

देवरिया जनपद में स्थित अब्दुल गनी शाह बाबा की मजार को लेकर की गई प्रशासनिक कार्रवाई के पीछे राजस्व अभिलेख, न्यायिक आदेश और विधिक प्रक्रिया से जुड़े तथ्य सामने आए हैं। उपलब्ध आधिकारिक दस्तावेज़ों और संबंधित पक्षों के बयानों के आधार पर यह स्पष्ट हुआ है कि कार्रवाई पूरी तरह कानून के दायरे में की गई।

कार्रवाई का आधार

राजस्व विभाग के रिकॉर्ड के अनुसार संबंधित भूमि सरकारी बंजर भूमि के रूप में दर्ज थी। खसरा-खतौनी, नक्शा और सीमांकन रिपोर्ट की जांच में पाया गया कि मजार और उससे जुड़ी संरचनाएँ अनधिकृत अतिक्रमण की श्रेणी में आती हैं। मौके पर वैध स्वामित्व या निर्माण अनुमति से जुड़े दस्तावेज़ प्रस्तुत नहीं किए जा सके।

मुकदमा और न्यायिक प्रक्रिया

मामला एसडीएम न्यायालय में विचाराधीन रहा। जांच के दौरान प्रशासन की देखरेख में कई बार पैमाइश और सत्यापन कराया गया, जिसमें भूमि का सरकारी होना प्रमाणित हुआ। सुनवाई के बाद न्यायालय ने राजस्व अभिलेखों में दर्ज फर्जी प्रविष्टि को निरस्त करते हुए भूमि को पुनः सरकारी खाते में बहाल करने तथा मजार व कब्रिस्तान से जुड़ी संरचनाओं को हटाने का निर्देश दिया।

प्रशासनिक कार्रवाई

न्यायालय के आदेश के अनुपालन में रविवार को प्रशासन ने तीन बुलडोज़र और पर्याप्त पुलिस बल की तैनाती के साथ कार्रवाई की। पूरी प्रक्रिया शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराई गई। प्रशासन ने स्पष्ट किया कि यह कदम किसी धार्मिक भावना के विरुद्ध नहीं, बल्कि केवल सरकारी भूमि की सुरक्षा और कानून के पालन के उद्देश्य से उठाया गया।

जनप्रतिनिधि का पक्ष

देवरिया सदर से विधायक शलभ मणि त्रिपाठी ने पहले मजार और उसके आसपास की भूमि पर कथित अतिक्रमण को लेकर प्रशासन और मुख्यमंत्री स्तर पर शिकायत की थी। उनका कहना रहा कि सरकारी भूमि पर यदि अवैध कब्जा पाया जाता है, तो कानून सभी के लिए समान रूप से लागू होना चाहिए।

मजार समिति का रुख

मजार से जुड़ी समिति के अध्यक्ष राशिद खान ने लिखित रूप से यह स्वीकार किया कि संरचना अवैध अतिक्रमण की श्रेणी में आती है और इसे हटाने की प्रक्रिया में वे प्रशासन को सहयोग देंगे। समिति की ओर से शांति बनाए रखने की अपील भी की गई।

पूर्व में जारी नोटिस

प्रकरण में इससे पहले एसडीएम द्वारा मजार के प्रबंधक को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था और न्यायालय में उपस्थित होकर पक्ष रखने के निर्देश दिए गए थे। निर्धारित तिथियों पर उपस्थिति न होने की स्थिति में एकतरफा कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई थी।

कानून-व्यवस्था की स्थिति

कार्रवाई के दौरान क्षेत्र में कानून-व्यवस्था सामान्य बनी रही। किसी प्रकार की अप्रिय घटना सामने नहीं आई। प्रशासन ने नागरिकों से अफवाहों से बचने और किसी भी आपत्ति या दावे के लिए कानूनी मंच अपनाने की अपील की है।

उपलब्ध तथ्यों, राजस्व रिकॉर्ड, न्यायिक आदेश और जिम्मेदार पक्षों के बयानों के आधार पर यह स्पष्ट है कि देवरिया में की गई यह कार्रवाई पूरी तरह विधिसम्मत, दस्तावेज़-आधारित और प्रशासनिक प्रक्रिया के अनुरूप रही।

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