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स्वदेशी और स्वभाषा से ही आत्मनिर्भर बनेगा भारत: जोधपुर से अमित शाह का राष्ट्रनिर्माण का संदेश

स्वदेशी और स्वभाषा से ही आत्मनिर्भर बनेगा भारत: जोधपुर से अमित शाह का राष्ट्रनिर्माण का संदेश
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रिपोर्ट : विजय तिवारी

जोधपुर में आयोजित महेश्वरी ग्लोबल कन्वेंशन के मंच से केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने आत्मनिर्भर भारत की अवधारणा को आर्थिक, सामाजिक, सांस्कृतिक और प्रशासनिक सभी आयामों से जोड़ते हुए विस्तृत संबोधन दिया। उन्होंने जहां स्वदेशी और स्वभाषा को राष्ट्रनिर्माण की रीढ़ बताया, वहीं कानून-व्यवस्था, न्याय प्रणाली और राजनीतिक जवाबदेही पर भी खुलकर बात की।

स्वदेशी : केवल नीति नहीं, राष्ट्रीय संकल्प

अमित शाह ने कहा कि स्वदेशी सिर्फ आर्थिक नीति नहीं, बल्कि भारत की आत्मा और आत्मसम्मान से जुड़ा विचार है। जब देश का नागरिक स्वदेशी उत्पादों को प्राथमिकता देता है, तो उसका सीधा लाभ स्थानीय उद्योग, कुटीर एवं लघु उद्योग, स्टार्ट-अप और स्वरोज़गार को मिलता है। इससे रोज़गार सृजन बढ़ता है और भारत की अर्थव्यवस्था बाहरी निर्भरता से मुक्त होकर मज़बूत होती है।

उन्होंने कहा कि 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को पाने के लिए स्वदेशी को व्यवहार का हिस्सा बनाना अनिवार्य है।

आत्मनिर्भर भारत की जड़ें समाज में

गृह मंत्री ने स्पष्ट किया कि आत्मनिर्भर भारत केवल सरकारी योजनाओं से संभव नहीं है। उपभोक्ता, व्यापारी और उद्योग—तीनों यदि स्वदेशी सोच को अपनाएं, तभी दीर्घकालिक राष्ट्रीय आत्मनिर्भरता साकार होगी। उन्होंने इसे सामूहिक जिम्मेदारी और राष्ट्रीय संकल्प बताया।

मातृभाषा और स्वभाषा पर ज़ोर

अमित शाह ने भाषा के मुद्दे पर कहा कि बच्चों से घर में मातृभाषा में संवाद होना चाहिए, ताकि वे अपनी संस्कृति, परंपराओं और इतिहास से जुड़े रहें।

उन्होंने यह भी कहा कि भारतीय भाषाएं ज्ञान, विज्ञान, तकनीक और प्रशासन—हर क्षेत्र में सक्षम हैं और मातृभाषा में सोचने-समझने से आत्मविश्वास व रचनात्मकता बढ़ती है।

संस्कृति, इतिहास और वैश्वीकरण का संतुलन

उन्होंने कहा कि भारत की संस्कृति और इतिहास हज़ारों वर्षों की निरंतर परंपरा का परिणाम है। वैश्वीकरण के युग में आधुनिक तकनीक और नवाचार अपनाना ज़रूरी है, लेकिन अपनी सांस्कृतिक पहचान और मूल्यों से समझौता नहीं किया जा सकता। आधुनिकता और परंपरा—दोनों का संतुलन ही भारत की ताकत है।

युवाओं और सामाजिक संगठनों की भूमिका

गृह मंत्री ने युवाओं को राष्ट्रनिर्माण की धुरी बताते हुए कहा कि स्टार्ट-अप, नवाचार, कौशल विकास और स्वदेशी सोच में युवाओं की सक्रिय भागीदारी भारत को नई ऊंचाइयों तक ले जाएगी।

साथ ही, सामाजिक और व्यावसायिक संगठनों से उन्होंने स्वदेशी अभियानों को ज़मीनी स्तर तक पहुंचाने की अपील की।

कानून-व्यवस्था और न्याय व्यवस्था पर बड़ा बयान

अपने संबोधन के दौरान अमित शाह ने कानून-व्यवस्था को विकास की बुनियादी शर्त बताया। उन्होंने कहा कि कोई भी राज्य तभी प्रगति कर सकता है, जब वहां कानून का राज हो।

उन्होंने राजस्थान पुलिस अकादमी में आयोजित नव-नियुक्त आरक्षकों के कार्यक्रम का उल्लेख करते हुए कहा कि पुलिस भर्ती प्रक्रिया को पारदर्शी और तकनीक-आधारित बनाया गया है, जिससे भ्रष्टाचार और सिफारिश की संस्कृति समाप्त हुई है।

अपराध के आंकड़ों का उल्लेख

गृह मंत्री ने कहा कि वर्तमान शासनकाल में राजस्थान में कई श्रेणियों के अपराधों में उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई है।

उन्होंने बताया कि कुल अपराधों, गंभीर अपराधों, महिलाओं के खिलाफ अपराध और हिंसक घटनाओं में प्रतिशत के आधार पर गिरावट आई है, जो बेहतर कानून-व्यवस्था का संकेत है।

कांग्रेस पर सीधा हमला

अमित शाह ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि पूर्ववर्ती सरकारों के दौर में “पर्ची-पर्चीफाइड सिस्टम” हावी था, जिससे युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ हुआ।

उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा सरकार ने इस संस्कृति को समाप्त कर योग्यता और पारदर्शिता को प्राथमिकता दी है, जिससे युवाओं को बिना सिफारिश के आगे बढ़ने का अवसर मिला।

नए आपराधिक कानूनों का ज़िक्र

गृह मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में देश में अंग्रेज़ों के दौर के पुराने कानूनों को हटाकर भारतीय न्याय संहिता लागू की गई है।

इन नए कानूनों में तकनीक को विशेष महत्व दिया गया है और पुलिस, अभियोजन, जेल व न्यायालय—पूरी आपराधिक न्याय प्रणाली को आपस में जोड़ा गया है, ताकि पीड़ित को समय पर न्याय मिले और नागरिकों की सुरक्षा मज़बूत हो।

कार्यक्रम के अंत में अमित शाह ने कहा कि जब स्वदेशी सोच, मातृभाषा का सम्मान, सांस्कृतिक चेतना और सशक्त कानून-व्यवस्था एक साथ आगे बढ़ते हैं, तभी राष्ट्र दीर्घकालिक रूप से मज़बूत बनता है।

जोधपुर से दिया गया यह संदेश आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को सामाजिक, आर्थिक और प्रशासनिक—तीनों स्तरों पर नई दिशा देता है।

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