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मिर्जापुर : वायरल ऑडियो से सपा में हलचल, महिला नेत्री से कथित अभद्र भाषा पर गंभीर सवाल

मिर्जापुर : वायरल ऑडियो से सपा में हलचल, महिला नेत्री से कथित अभद्र भाषा पर गंभीर सवाल
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रिपोर्ट : विजय तिवारी

मिर्जापुर जिले की सियासत में उस वक्त उबाल आ गया, जब समाजवादी पार्टी से जुड़े एक कथित ऑडियो क्लिप के सोशल मीडिया पर वायरल होने से राजनीतिक और संगठनात्मक हलकों में चर्चा तेज हो गई। वायरल ऑडियो में पार्टी के जिला अध्यक्ष देवी प्रसाद चौधरी और छानबे (सुरक्षित) विधानसभा सीट से सपा प्रत्याशी रह चुकीं कीर्ति कोल के बीच फोन पर हुई बातचीत बताई जा रही है।

क्या है मामला

उपलब्ध जानकारी के अनुसार, यह बातचीत किसी राजनीतिक विषय और चुनावी गतिविधियों को लेकर हुई थी। ऑडियो में आरोप है कि बातचीत के दौरान जिला अध्यक्ष की भाषा आपत्तिजनक और असंयमित हो गई, जबकि महिला नेत्री लगातार संयम बरतते हुए उन्हें मर्यादा में बात करने की सलाह देती सुनाई देती हैं।

बताया जा रहा है कि जब बातचीत का लहजा तीखा हुआ, तब भी महिला नेत्री ने विरोध की जगह वरिष्ठता और उम्र का हवाला देते हुए भाषा सुधारने की नसीहत दी।

बातचीत के आरोपित बिंदु

कथित ऑडियो में जिलाध्यक्ष द्वारा यह कहे जाने का उल्लेख है कि उन्होंने महिला नेत्री को चुनावी टिकट दिलाने में भूमिका निभाई और चुनाव के दौरान धनराशि की व्यवस्था की। इसके जवाब में महिला नेत्री द्वारा स्पष्ट किया गया कि उनके हाथ में कोई धन नहीं दिया गया और इस तरह की बातचीत व आरोप अनुचित हैं।

पूरी बातचीत में महिला नेत्री बार-बार यह दोहराती हैं कि सार्वजनिक जीवन में रहते हुए इस तरह की भाषा और व्यवहार स्वीकार्य नहीं है और इससे पार्टी की छवि प्रभावित होती है।

ऑडियो की स्थिति

यह ऑडियो फिलहाल सोशल मीडिया पर अलग-अलग माध्यमों से साझा किया जा रहा है। इसकी प्रामाणिकता को लेकर कोई आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है। दोनों संबंधित नेताओं से संपर्क का प्रयास किए जाने की चर्चा है, लेकिन उस समय उनसे सीधी प्रतिक्रिया नहीं मिल सकी।

संगठन के भीतर प्रभाव

ऑडियो सामने आने के बाद समाजवादी पार्टी के अंदरूनी माहौल में असहजता देखी जा रही है। पार्टी कार्यकर्ताओं और स्थानीय नेताओं के बीच इस मुद्दे को लेकर चर्चा तेज है। कई लोग इसे महिला सम्मान और राजनीतिक शिष्टाचार से जोड़कर देख रहे हैं।

आधिकारिक रुख

अब तक पार्टी नेतृत्व की ओर से इस मामले में कोई औपचारिक बयान या कार्रवाई सार्वजनिक नहीं की गई है। माना जा रहा है कि तथ्यों की जांच और स्थिति स्पष्ट होने के बाद ही संगठनात्मक स्तर पर कोई निर्णय लिया जाएगा।

फिलहाल यह पूरा प्रकरण वायरल ऑडियो, आरोप–प्रत्यारोप और प्रतिक्रिया के अभाव के बीच अटका हुआ है। यह मामला न केवल सपा के आंतरिक अनुशासन, बल्कि राजनीति में संवाद की भाषा और महिला सम्मान जैसे संवेदनशील विषयों को भी केंद्र में ले आया है। आने वाले दिनों में पार्टी नेतृत्व की भूमिका और रुख इस विवाद की दिशा तय करेगा।

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