माघ मास : सनातन धर्म में मोक्ष और महापुण्य का दिव्य काल

रिपोर्ट : विजय तिवारी
प्रयागराज, उत्तर प्रदेश।
सनातन धर्म के हिंदी पंचांग में माघ मास को अत्यंत पवित्र और पुण्यदायी माना गया है। यह पंचांग का 11वां महीना होता है, जिसे शास्त्रों में मोक्ष प्रदान करने वाला मास कहा गया है। धार्मिक मान्यताओं, पुराणों और स्मृतियों में माघ मास के स्नान, दान, जप और तप का विशेष महात्म्य वर्णित है।
इस वर्ष 04 जनवरी से माघ मास का शुभारंभ हो रहा है और 01 फरवरी को इसका समापन होगा। वहीं आस्था और परंपरा का महापर्व माघ मेला 03 जनवरी से 15 फरवरी 2026 तक आयोजित किया जाएगा।
माघ मास का आध्यात्मिक महत्व
शास्त्रों के अनुसार, माघ मास में किया गया हर पुण्य कर्म—विशेषकर स्नान-दान—अक्षय फल प्रदान करता है। माना जाता है कि इस काल में देवताओं का पृथ्वी पर आगमन होता है, इसलिए इस समय की गई साधना और स्नान का फल कई गुना बढ़ जाता है।
धार्मिक ग्रंथों में माघ स्नान को हजारों यज्ञों के समान पुण्यदायी बताया गया है।
प्रयागराज में माघ मेला और कल्पवास की परंपरा
माघ मास में त्रिवेणी संगम पर लगने वाला माघ मेला सनातन संस्कृति की जीवंत परंपरा है। देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु यहां कल्पवास करते हैं।
कल्पवासी एक माह तक संयमित जीवन, नियमपूर्वक स्नान, जप-तप, सत्संग और दान के माध्यम से आत्मिक शुद्धि का मार्ग अपनाते हैं। यह परंपरा केवल धार्मिक नहीं, बल्कि आत्मानुशासन और वैराग्य की साधना भी है।
त्रिवेणी संगम में स्नान का महात्म्य
धार्मिक मान्यता है कि माघ मास में गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती के संगम में स्नान करने से जन्म-जन्मांतर के पापों का नाश होता है।
पुराणों में वर्णन है कि माघ मास का संगम स्नान न केवल शारीरिक, बल्कि आत्मिक शुद्धि भी करता है। यही कारण है कि इसे मोक्ष का द्वार माना गया है।
माघ स्नान और मोक्ष की अवधारणा
शास्त्रों के अनुसार, जो व्यक्ति पूरे विधि-विधान से माघ मास में स्नान, दान और जप करता है, वह सांसारिक बंधनों से मुक्त होकर परम गति को प्राप्त करता है।
माघ मास में किया गया दान—अन्न, वस्त्र, तिल, घृत या धन—अक्षय पुण्य देता है और मृत्यु के उपरांत मोक्ष की प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त करता है।
भगवान विष्णु की विशेष कृपा
माघ मास को भगवान विष्णु का प्रिय मास माना गया है। इस काल में किया गया स्नान और दान विशेष रूप से विष्णु कृपा दिलाने वाला होता है। मान्यता है कि माघ स्नान करने वाला व्यक्ति जीवन के समस्त कष्टों से मुक्त होकर आध्यात्मिक उन्नति प्राप्त करता है।
आस्था, परंपरा और संस्कृति का संगम
माघ मास और माघ मेला केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सनातन संस्कृति की जीवंत अभिव्यक्ति हैं। यह काल मन, वचन और कर्म की शुद्धि का अवसर देता है—
जहां श्रद्धा, संयम और सेवा के माध्यम से मनुष्य आत्मिक शांति और मोक्ष की ओर अग्रसर होता है।
माघ मास सनातन धर्म का वह पावन समय है, जब आस्था, साधना और संस्कृति एक साथ प्रवाहित होती हैं—और मानव को ईश्वर के और निकट ले जाती हैं।




