KBC विजेता महिला तहसीलदार अमिता सिंह तोमर सस्पेंड, बाढ़ राहत निधि में 2.5 करोड़ का घोटाला

रिपोर्ट : विजय तिवारी
श्योपुर/ग्वालियर (मध्यप्रदेश), 2026 :
‘कौन बनेगा करोड़पति’ (KBC) में ₹50 लाख जीतकर राष्ट्रीय सुर्खियों में आईं महिला तहसीलदार अमिता सिंह तोमर अब एक गंभीर बाढ़ राहत राशि घोटाले (Scam) के आरोपों का सामना कर रही हैं। उन्हें 2021 के श्योपुर जिले के बाढ़ राहत निधि वितरण मामले में ₹2.5 करोड़ (लगभग ₹2.57 करोड़) की गड़बड़ी का मुख्य आरोपी बताया गया है।
गिरफ्तारी और न्यायिक प्रक्रिया
अमिता सिंह तोमर को 26 मार्च 2026 को उनके ग्वालियर स्थित घर से गिरफ्तार किया गया था, पुलिस ने उन्हें कोर्ट में पेश किया और शिवपुरी जेल में भेज दिया गया है।
उन्होंने उच्च न्यायालय और सुप्रीम कोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका दायर की थी, लेकिन दोनों कोर्टों ने यह अनुमति खारिज कर दी, जिससे उनकी गिरफ्तारी संभावित हो गयी।
जमानत पर सुनवाई अभी आगे बढ़ाई गयी है और फिलहाल वे जेल में ही हैं।
क्या है आरोप का पूरा मामला
मामला 2021 में श्योपुर जिले की बड़ौदा तहसील में बाढ़ राहत राशि के वितरण से जुड़ा है।
जांच में पता चला कि राहत निधि का पैसा फर्जी खातों में ट्रांसफर किया गया था — जिससे वास्तविक बाढ़ पीड़ितों को लाभ नहीं मिला।
जांच अधिकारीयों के अनुसार, कुल 110 से ज्यादा नामियों का विवरण FIR में दर्ज किया गया है, जिनमें तहसीलदार के अलावा लगभग 22 से 25 पटवारियों को भी आरोपी बनाया गया है।
अधिकारियों का कहना है कि निधि में गड़बड़ी में पैसे 127 झूठे/काल्पनिक खाता धारकों को भेजे गए थे — जिनमें कुछ नाम जिले से बाहर के भी बताए गए हैं।
जांच अधिकारी बताते हैं कि तहसीलदार के रूप में रहते हुए उन्होंने Drawing and Disbursing Officer (DDO) के रूप में इन गैरकानूनी भुगतानों को अनुमोदन दिया और संभवतः इससे अवैध लाभ भी लिया गया है।
निलंबन और प्रशासनिक कदम
गिरफ्तारी के बाद प्रशासन ने अमिता सिंह तोमर को उनके पद से सस्पेंड (निलंबित) कर दिया है। इस आदेश को चंबल संभागायुक्त ने श्योपुर कलेक्टर की रिपोर्ट के आधार पर मंगलवार को जारी किया।
उनके निलंबन के आदेश से पहले ही उन्हें विजयपुर तहसीलदार पद से हटा दिया गया था ताकि जांच प्रक्रिया में किसी भी तरह का प्रभाव न पड़े।
अमिता सिंह तोमर का प्रोफाइल और पृष्ठभूमि
अमिता सिंह तोमर ने पहले 2011 में ‘कौन बनेगा करोड़पति’ (केबीसी) शो में ₹50 लाख जीते थे, जिससे वे राष्ट्रीय पहचान बनाने में सफल रहीं।
उनके सरकारी करियर में 23 वर्षों से अधिक अनुभव है, और उन्होंने कई स्थानों पर पदस्थापना सहित कुल 25 से अधिक ट्रांसफर किये हैं।
यह मामला इसलिए भी सुर्खियों में आया क्योंकि यह एक प्रेरणादायक KBC विजेता की कहानी से एक भारी भ्रष्टाचार आरोप वाले मुकदमे की ओर पलित हुआ है।
सोशल व मीडिया प्रतिक्रिया
सोशल मीडिया और समाचार मंचों पर इस पर विशाल प्रतिक्रिया और गंभीर सवाल उठे हैं, जहाँ जनता और विश्लेषक दोनों सरकारी राहत निधि वितरण में पारदर्शिता और जवाबदेही पर बहस कर रहे हैं।
कई प्लेटफ़ॉर्म पर यह मामला प्रणालीगत दुरुपयोग, प्रशासनिक जवाबदेही और भ्रष्टाचार नियंत्रण की दिशा में एक बड़े परीक्षण के रूप में देखा जा रहा है।
जांच और आगे का रास्ता
यह मामला अभी जांच के प्रांरभिक चरण में है और पुलिस तथा संबंधित विभाग पूरी तरह से सामूहिक आरोपियों और दस्तावेजी प्रमाणों की पड़ताल कर रहे हैं।
यह भी माना जा रहा है कि भविष्य में जांच और कोर्ट सुनवाई से स्वस्थ प्रशासनिक सुधार के लिए नीतिगत बदलाव और सख्त निगरानी की दिशा में कदम उठाये जा सकते हैं।




