2027 तक देश को मिलेगी पहली बुलेट ट्रेन, मुंबई–अहमदाबाद हाई-स्पीड कॉरिडोर पर ऐतिहासिक परियोजना तेज़ रफ्तार में

रिपोर्ट : विजय तिवारी
भारत के रेल इतिहास में एक नया और ऐतिहासिक अध्याय जुड़ने जा रहा है। देश की पहली हाई-स्पीड बुलेट ट्रेन परियोजना अब निर्णायक चरण में पहुँच चुकी है। केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने हालिया अपडेट में स्पष्ट किया है कि मुंबई–अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर (MAHSR) पर बुलेट ट्रेन सेवा को 15 अगस्त 2027 तक चरणबद्ध तरीके से शुरू करने का लक्ष्य तय किया गया है। सरकार की मंशा है कि आज़ादी के अमृत काल में भारत को आधुनिक, तेज़ और सुरक्षित हाई-स्पीड रेल नेटवर्क से जोड़ा जाए।
508 किलोमीटर लंबा कॉरिडोर, तीन राज्यों में फैली परियोजना
यह महत्वाकांक्षी परियोजना महाराष्ट्र, गुजरात और दादरा एवं नगर हवेली से होकर गुजरेगी। कुल 508 किलोमीटर लंबे इस हाई-स्पीड कॉरिडोर को देश के पश्चिमी औद्योगिक बेल्ट की रीढ़ माना जा रहा है, जो व्यापार, उद्योग और आवागमन की तस्वीर बदल देगा।
चरणबद्ध संचालन की स्पष्ट रूपरेखा
रेल मंत्रालय के अनुसार, बुलेट ट्रेन सेवा को एक साथ पूरे रूट पर शुरू करने के बजाय चरणबद्ध रणनीति अपनाई जाएगी।
पहले चरण में सूरत–बिलिमोरा/वापी सेक्शन पर संचालन शुरू किया जाएगा
इसके बाद सेवा को वापी–अहमदाबाद तक बढ़ाया जाएगा
फिर ठाणे से अहमदाबाद और
अंततः पूरे मुंबई–अहमदाबाद कॉरिडोर पर नियमित परिचालन शुरू होगा
कुछ रिपोर्ट्स के अनुसार, शुरुआती सेक्शन पर ट्रायल रन 2026 तक संभव है, हालांकि यात्रियों के लिए आधिकारिक व्यावसायिक संचालन 2027 से ही होगा।
12 अत्याधुनिक स्टेशन, मल्टी-मॉडल कनेक्टिविटी
इस हाई-स्पीड कॉरिडोर पर कुल 12 आधुनिक स्टेशन बनाए जा रहे हैं, जिन्हें मौजूदा रेलवे, मेट्रो और शहरी परिवहन नेटवर्क से जोड़ा जाएगा। प्रस्तावित स्टेशन हैं—
मुंबई (बांद्रा-कुर्ला कॉम्प्लेक्स – BKC)
ठाणे
विरार
बोइसर
वापी
बिलिमोरा
सूरत
भरूच
वडोदरा (बड़ौदा)
आनंद
अहमदाबाद
साबरमती
इनमें से मुंबई का BKC स्टेशन भूमिगत (अंडरग्राउंड) होगा, जिसके लिए अत्याधुनिक टनल बोरिंग मशीनों का इस्तेमाल किया जा रहा है।
320 किमी प्रति घंटे की रफ्तार, समय में रिकॉर्ड कटौती
बुलेट ट्रेन की अधिकतम गति 320 किमी प्रति घंटा होगी। इसके शुरू होने से—
सभी 12 स्टेशनों पर रुकने वाली ट्रेन से मुंबई–अहमदाबाद यात्रा लगभग 2 घंटे 17 मिनट
सीमित स्टॉप वाली एक्सप्रेस सेवा से यही दूरी 1 घंटे 58 मिनट
में पूरी की जा सकेगी, जबकि अभी यह सफर पारंपरिक ट्रेनों से 7–8 घंटे में होता है।
जापान की शिंकानसेन तकनीक, उच्चतम सुरक्षा मानक
यह परियोजना जापान की विश्व-प्रसिद्ध शिंकानसेन तकनीक पर आधारित है, जो अपनी सुरक्षा, सटीकता और समयपालन के लिए जानी जाती है। आधुनिक सिग्नलिंग सिस्टम, भूकंप-रोधी ढांचा और उन्नत ट्रेन कंट्रोल सिस्टम इस प्रोजेक्ट की खासियत हैं।
1.08 लाख करोड़ की लागत, अंतरराष्ट्रीय फंडिंग मॉडल
इस हाई-स्पीड रेल परियोजना की कुल अनुमानित लागत करीब 1.08 लाख करोड़ रुपये है।
जापान इंटरनेशनल कोऑपरेशन एजेंसी (JICA) लगभग 81% फंडिंग सॉफ्ट लोन के रूप में कर रही है
शेष राशि रेल मंत्रालय और महाराष्ट्र व गुजरात सरकारों की इक्विटी से जुटाई जा रही है
30 जून 2025 तक परियोजना पर 78,000 करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए जा चुके हैं।
चुनौतियां, लेकिन रफ्तार में आई तेजी
2017 में परियोजना की आधारशिला रखे जाने के बाद भूमि अधिग्रहण और पर्यावरणीय स्वीकृतियों के कारण देरी हुई, खासकर महाराष्ट्र में। हालांकि हाल के वर्षों में प्रक्रिया में तेजी आई है।
नेशनल हाई स्पीड रेल कॉरपोरेशन लिमिटेड (NHSRCL) के अनुसार—
गुजरात में सैकड़ों किलोमीटर वायडक्ट का निर्माण पूरा हो चुका है
मुंबई में अंडरग्राउंड सुरंगों का कार्य तेज़ी से चल रहा है
आर्थिक विकास और रोजगार को बड़ा बढ़ावा
रेल मंत्रालय का मानना है कि यह परियोजना केवल तेज़ यात्रा तक सीमित नहीं है, बल्कि—
औद्योगिक विकास
सप्लाई-चेन को मजबूती
पर्यटन को प्रोत्साहन
और हज़ारों प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रोजगार
सृजित करेगी। सूरत और वडोदरा जैसे औद्योगिक शहरों को इससे सबसे अधिक लाभ मिलने की उम्मीद है।
भारत के इंफ्रास्ट्रक्चर विज़न की पहचान
विशेषज्ञों के अनुसार, मुंबई–अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना भारत को उन देशों की कतार में खड़ा करेगी, जहां हाई-स्पीड रेल आधुनिक परिवहन का अहम हिस्सा है। यह ‘नए भारत’ के इंफ्रास्ट्रक्चर विज़न का मजबूत प्रतीक मानी जा रही है।
मुंबई–अहमदाबाद हाई-स्पीड बुलेट ट्रेन परियोजना न सिर्फ यात्रा के अनुभव को पूरी तरह बदलने वाली है, बल्कि यह भारत की आर्थिक क्षमता, तकनीकी आत्मनिर्भरता और वैश्विक पहचान को भी नई ऊंचाई देने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम साबित होगी।




