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वडोदरा : आस्था, संस्कार और साधना का संगम—BAPS के सत्संग में दिखी भावी पीढ़ी की आध्यात्मिक शक्ति

वडोदरा : आस्था, संस्कार और साधना का संगम—BAPS के सत्संग में दिखी भावी पीढ़ी की आध्यात्मिक शक्ति
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रिपोर्ट : विजय तिवारी

वडोदरा में बोचासनवासी अक्षर पुरुषोत्तम स्वामिनारायण संस्था (BAPS) के आध्यात्मिक प्रमुख परम पूज्य महंत स्वामी महाराज की 92वीं जन्मजयंती तथा उनकी दीक्षा के 69 वर्ष पूर्ण होने के पावन अवसर पर आयोजित विशाल सत्संग कार्यक्रम ने आध्यात्मिक चेतना, अनुशासन और संस्कारों की सशक्त झलक प्रस्तुत की। यह आयोजन केवल एक धार्मिक कार्यक्रम नहीं रहा, बल्कि समाज को दिशा देने वाला प्रेरणास्रोत भी बना।



कार्यक्रम स्थल पर सुबह से ही श्रद्धालुओं का आगमन शुरू हो गया था। पारंपरिक वेशभूषा में सजे बालक-बालिकाएं, मंत्रोच्चार की गूंज और अनुशासनबद्ध व्यवस्थाएं आयोजन की गंभीरता और गरिमा को दर्शा रही थीं। वातावरण में भक्ति और शांति का ऐसा समन्वय था, जिसने उपस्थित प्रत्येक व्यक्ति को आत्मचिंतन के लिए प्रेरित किया।

इस गरिमामयी अवसर पर गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र भाई पटेल तथा मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव की उपस्थिति ने आयोजन को विशेष महत्व प्रदान किया। दोनों मुख्यमंत्रियों ने BAPS संस्था द्वारा समाज में नैतिकता, अनुशासन और सेवा भाव के प्रसार की भूमिका को सराहा।

सत्संग के दौरान पूज्य महंत स्वामी महाराज एवं पूज्य डॉक्टर स्वामी ने आशीर्वचन प्रदान करते हुए कहा कि सच्चा सत्संग वही है, जो व्यक्ति के आचरण, विचार और व्यवहार में सकारात्मक परिवर्तन लाए। उन्होंने बाल संस्कारों को सशक्त समाज की नींव बताते हुए माता-पिता और शिक्षकों की भूमिका को रेखांकित किया।

कार्यक्रम में प्रस्तुत नृत्य-नाटिकाएं, वैदिक मंत्रगान और आध्यात्मिक प्रस्तुतियां केवल कला प्रदर्शन नहीं थीं, बल्कि जीवन मूल्यों का सजीव संदेश थीं। आरती के समय पूरा वातावरण सामूहिक साधना में परिवर्तित हो गया, जहां श्रद्धालु एकसूत्र में बंधे दिखाई दिए।

इस आयोजन की सबसे उल्लेखनीय उपलब्धि रही—पूज्य महंत स्वामी महाराज की प्रेरणा से 3 से 13 वर्ष की आयु के 15,666 बालक-बालिकाओं द्वारा ‘सत्संगदीक्षा’ ग्रंथ का केवल एक वर्ष में संस्कृत भाषा में पूर्ण मुखपाठ। यह दृश्य अपने आप में ऐतिहासिक था—जहां नन्हे स्वर एक साथ

315 श्लोकों का समवेत गान कर रहे थे। यह उपलब्धि न केवल स्मरणशक्ति का उदाहरण बनी, बल्कि यह भी दर्शाया कि सही मार्गदर्शन से बाल्यावस्था में संस्कार कितनी गहराई तक स्थापित किए जा सकते हैं।

315 श्लोकों वाला ‘सत्संगदीक्षा’ ग्रंथ, जिसकी रचना स्वयं महंत स्वामी महाराज ने की है, आध्यात्मिक, नैतिक, सामाजिक और व्यावहारिक जीवन मूल्यों का समग्र मार्गदर्शन प्रदान करता है। किसी एक संस्कृत ग्रंथ का उसके रचयिता की प्रत्यक्ष उपस्थिति में इतने बड़े स्तर पर सामूहिक पाठ किया जाना एक विरल वैश्विक उपलब्धि मानी गई है, जिसे गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में भी दर्ज किया गया है।

इस अवसर पर केंद्रीय गृह एवं सहकार मंत्री अमितभाई शाह द्वारा भेजे गए शुभकामना संदेश का वाचन किया गया, जिसमें उन्होंने बाल संस्कार, सांस्कृतिक चेतना और राष्ट्र निर्माण में BAPS संस्था के योगदान की सराहना की।

कार्यक्रम के समापन पर यह स्पष्ट संदेश उभरकर सामने आया कि जब आध्यात्मिकता, शिक्षा और अनुशासन एक साथ चलते हैं, तब समाज केवल वर्तमान में ही नहीं, भविष्य में भी सशक्त बनता है। वडोदरा में आयोजित यह सत्संग उसी दिशा में एक सशक्त कदम के रूप में देखा जा रहा है।

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