मुंबई महानगरपालिका के 227 वार्डों की अंतिम मतदाता सूची अब तक जारी नहीं चुनाव में महज 8 दिन शेष, लोकतांत्रिक प्रक्रिया की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल

रिपोर्ट : विजय तिवारी
मुंबई।
मुंबई महानगरपालिका चुनाव से ठीक पहले एक गंभीर प्रशासनिक चूक सामने आई है। अब तक मुंबई महानगरपालिका के सभी 227 वार्डों की अंतिम मतदाता सूची सार्वजनिक नहीं की गई है, जबकि चुनाव में केवल 8 दिन शेष रह गए हैं। इस स्थिति ने न केवल प्रशासनिक तैयारियों पर सवाल खड़े कर दिए हैं, बल्कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया की निष्पक्षता और पारदर्शिता को लेकर भी गंभीर चिंताएं उत्पन्न कर दी हैं।
इस मुद्दे को लेकर RTI एक्टिविस्ट एवं सामाजिक कार्यकर्ता अनिल गलगली ने महाराष्ट्र राज्य चुनाव आयुक्त और मुंबई महानगरपालिका आयुक्त का ध्यान आकर्षित करते हुए तात्कालिक हस्तक्षेप और कार्रवाई की मांग की है।
अनिल गलगली ने कहा कि अंतिम मतदाता सूची का समय पर प्रकाशन न होना केवल एक तकनीकी या प्रशासनिक देरी नहीं है, बल्कि यह मतदाताओं के संवैधानिक और लोकतांत्रिक अधिकारों का सीधा उल्लंघन है। उन्होंने स्पष्ट किया कि मतदाता सूची किसी भी स्वतंत्र, निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव प्रक्रिया की रीढ़ होती है।
उन्होंने कहा कि अंतिम सूची के अभाव में—
मतदाता अपने नाम की सही तरीके से जांच नहीं कर पा रहे हैं,
गलत प्रविष्टियों को सुधारने का अवसर नहीं मिल रहा है,
फर्जी, दोहरी अथवा अपात्र प्रविष्टियों की आशंका बढ़ रही है,
और सबसे गंभीर बात यह कि चुनाव प्रणाली पर जनता का विश्वास कमजोर हो रहा है।
इस देरी को लेकर अनिल गलगली ने कई तीखे सवाल भी उठाए। उन्होंने पूछा कि कानूनी समय-सीमा का पालन क्यों नहीं किया गया, और इस लापरवाही की जिम्मेदारी आखिर किसकी है—चुनाव आयोग की या प्रशासन की? उन्होंने कहा कि चुनाव जैसे संवेदनशील लोकतांत्रिक प्रक्रिया में इस प्रकार की अनिश्चितता बेहद चिंताजनक है।
अनिल गलगली की प्रमुख मांगें
अनिल गलगली ने इस मामले में स्पष्ट और ठोस मांगें रखी हैं—
मुंबई के सभी 227 वार्डों की अंतिम मतदाता सूची तत्काल आधिकारिक वेबसाइट पर प्रकाशित की जाए।
मतदाता सूची जारी करने में हुई देरी को लेकर लिखित और सार्वजनिक स्पष्टीकरण दिया जाए।
इस लापरवाही के लिए जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध प्रशासनिक कार्रवाई की जाए।
भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न बने, इसके लिए ठोस, समयबद्ध और पारदर्शी सुधारात्मक कदम घोषित किए जाएं।
अनिल गलगली ने दोहराया कि मतदाता सूची का समय पर सार्वजनिक होना किसी विकल्प का विषय नहीं, बल्कि संवैधानिक जिम्मेदारी है। इसमें हुई देरी लोकतंत्र की जड़ों को कमजोर करती है। उन्होंने चुनाव आयोग और मनपा प्रशासन से अपेक्षा की कि वे इस गंभीर मुद्दे पर तत्काल, पारदर्शी और जवाबदेह कार्रवाई करें, ताकि चुनाव प्रक्रिया पर आम नागरिकों का भरोसा बना रहे।




