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“ट्रांसफर के नाम पर खुला भ्रष्टाचार का जाल! होटल में 2 लाख लेते पकड़ा गया प्रोजेक्ट मैनेजर, विजिलेंस का बड़ा एक्शन”

“ट्रांसफर के नाम पर खुला भ्रष्टाचार का जाल! होटल में 2 लाख लेते पकड़ा गया प्रोजेक्ट मैनेजर, विजिलेंस का बड़ा एक्शन”
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रिपोर्ट : विजय तिवारी

उत्तर प्रदेश के महोबा जिले में भ्रष्टाचार के खिलाफ एक बड़ी कार्रवाई सामने आई है। मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) कार्यालय में तैनात परिवार कल्याण विभाग के प्रोजेक्ट मैनेजर जीतेश सोनी को विजिलेंस टीम ने 2 लाख रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया। इस कार्रवाई के बाद पूरे स्वास्थ्य महकमे में हड़कंप मच गया है।

मामला एक कर्मचारी मोहम्मद मेराज से जुड़ा है, जो पहले सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) कबरई में कार्यरत थे। प्रशासनिक आदेशों के बाद उन्हें पनवाड़ी CHC से अटैच कर दिया गया था। बीते करीब दो साल से वे मूल तैनाती कबरई में वापसी के प्रयास कर रहे थे।

आरोप है कि इसी बीच CMO कार्यालय में तैनात प्रोजेक्ट मैनेजर जीतेश सोनी ने उनका अटैचमेंट खत्म कराकर कबरई में दोबारा पोस्टिंग कराने के नाम पर मोटी रकम की मांग शुरू की। पहले करीब 3.5 लाख रुपये मांगे गए, लेकिन बातचीत के बाद सौदा 2 लाख रुपये में तय हुआ।

परेशान होकर शिकायतकर्ता ने विजिलेंस विभाग से संपर्क किया। शिकायत की पुष्टि के बाद झांसी से करीब 12 सदस्यीय विजिलेंस टीम महोबा पहुंची और पूरे मामले की रणनीति बनाई।

योजना के तहत आरोपी को शहर के चरखारी बाईपास स्थित राघव होटल के सर्विस एरिया में पैसे लेने के लिए बुलवाया गया। विजिलेंस टीम पहले से ही सादी वर्दी में वहां मौजूद थी।

जैसे ही शिकायतकर्ता ने आरोपी को 2 लाख रुपये थमाए, टीम ने तुरंत कार्रवाई करते हुए उसे मौके पर ही दबोच लिया। बताया जा रहा है कि नोटों की गिनती और लेन-देन की पुष्टि होते ही टीम ने घेराबंदी कर गिरफ्तारी की।

गिरफ्तारी के दौरान आरोपी घबराया हुआ नजर आया और कथित तौर पर गिड़गिड़ाने लगा। मौके पर मौजूद लोगों के अनुसार, वह खुद को बचाने की कोशिश करता रहा, लेकिन विजिलेंस टीम ने उसे हिरासत में लेकर वाहन में बैठाया और आगे की कार्रवाई के लिए ले गई।

आरोपी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत केस दर्ज किया गया

विजिलेंस टीम आरोपी से पूछताछ कर रही है

इस पूरे मामले में अन्य संभावित संलिप्त लोगों की भी जांच की जा रही है

विभागीय स्तर पर भी कार्रवाई की तैयारी बताई जा रही है।

इस घटना ने एक बार फिर ट्रांसफर-पोस्टिंग के नाम पर चल रहे कथित भ्रष्टाचार को उजागर कर दिया है। सवाल उठ रहे हैं कि क्या यह केवल एक व्यक्ति की करतूत है या इसके पीछे कोई बड़ा नेटवर्क भी सक्रिय है।

विजिलेंस की इस कार्रवाई को भ्रष्टाचार के खिलाफ कड़ा संदेश माना जा रहा है। इससे सरकारी विभागों में पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर दबाव बढ़ेगा, लेकिन यह भी उतना ही जरूरी है कि ऐसे मामलों में लगातार निगरानी और सख्त कार्रवाई जारी रहे।

क्या ऐसी कार्रवाइयों से सिस्टम सुधरेगा या फिर ट्रांसफर-पोस्टिंग का यह खेल यूं ही चलता रहेगा?

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