मालदा कांड का मास्टरमाइंड गिरफ्तार, बागडोगरा एयरपोर्ट से भागने की फिराक में था एडवोकेट मोफक्कारुल इस्लाम

पश्चिम बंगाल के मालदा (कालियाचक) में न्यायिक अधिकारियों को बंधक बनाने और हिंसा भड़काने के मामले में पुलिस को बड़ी सफलता हाथ लगी है. इस पूरे कांड के मास्टरमाइंड माने जा रहे एडवोकेट मोफक्कारुल इस्लाम को बंगाल पुलिस ने शुक्रवार सुबह गिरफ्तार कर लिया है. जानकारी के मुताबिक, मोफक्कारुल इस्लाम राज्य छोड़कर भागने की फिराक में था. पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी कि वह बागडोगरा एयरपोर्ट से उड़ान भरने वाला है. इससे पहले कि वह फरार हो पाता, बंगाल पुलिस की टीम ने जाल बिछाकर उसे एयरपोर्ट परिसर से ही धर दबोचा.
जांच एजेंसियों का दावा है कि कालियाचक में जिस तरह से भीड़ ने सात न्यायिक अधिकारियों को बंधक बनाया और सरकारी काम में बाधा डाली, उसके पीछे मोफक्कारुल इस्लाम का ही दिमाग था. उस पर भीड़ को भड़काने और कानून व्यवस्था को चुनौती देने की साजिश रचने का गंभीर आरोप है. यह गिरफ्तारी बेहद अहम मानी जा रही है, क्योंकि आज ही नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (NIA) की टीम मालदा पहुंचकर मामले की कमान संभालने वाली है. पुलिस अब आरोपी से पूछताछ कर रही है ताकि इस कांड से जुड़े अन्य सहयोगियों और साजिश की गहरी परतों को खोला जा सके.
10 दिन की हिरासत में 17 आरोपी
मालदा पुलिस ने इस मामले में कार्रवाई करते हुए अब तक इंडियन सेकुलर फ्रंट (ISF) के उम्मीदवार मौलाना शाहजहां अली सहित 17 लोगों को गिरफ्तार किया है. पुलिस के पास इन आरोपियों के खिलाफ पुख्ता सबूत होने का दावा किया जा रहा है. गिरफ्तार किए गए सभी 17 आरोपियों को गुरुवार को जिला अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें 10 दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया गया है. पुलिस का मानना है कि इन लोगों से पूछताछ के बाद इस साजिश की और भी परतें खुलेंगी.
'साजिश के तहत फंसाया गया', आरोपी का दावा
गिरफ्तारी के बाद आईएसएफ उम्मीदवार शाहजहां अली ने खुद को बेगुनाह बताया है. कोर्ट ले जाते समय उन्होंने पत्रकारों से कहा कि उन्हें उनकी राजनीतिक पहचान के कारण बलि का बकरा बनाया जा रहा है. अली का दावा है कि घटना के वक्त वह वहां मौजूद भी नहीं थे, बल्कि एक धार्मिक कार्यक्रम से लौट रहे थे. हालांकि, पुलिस का कहना है कि उनके पास इस घटना में इन लोगों की संलिप्तता के तकनीकी और चश्मदीद सबूत मौजूद हैं.
आखिर मालदा में उस रात हुआ क्या था?
मामला बीते बुधवार का है, जब मालदा के कालियाचक में SIR का काम चल रहा था. इस दौरान कुछ लोगों के नाम लिस्ट से हटाए जाने पर भीड़ उग्र हो गई. प्रदर्शनकारियों ने तीन महिला अधिकारियों सहित कुल सात न्यायिक अधिकारियों को करीब 9 घंटे तक एक ब्लॉक ऑफिस में बंधक बनाए रखा. हैरानी की बात यह है कि इन अधिकारियों को न खाना मिला और न पानी.
सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर जांच करेगी NIA
सुप्रीम कोर्ट ने भी इस घटना पर कड़ी नाराजगी जाहिर करते हुए इसे न्याय प्रशासन में बाधा डालने की एक ढीठ कोशिश करार दिया. सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद चुनाव आयोग ने मामले की जांच NIA को सौंप दी है. फिलहाल, चुनाव आयोग ने स्पष्ट कर दिया है कि बिना अनुमति के कहीं भी भीड़ इकट्ठा होने या जुलूस निकालने पर सख्त पाबंदी है. राज्य के मुख्य सचिव और डीजीपी को भी कोर्ट ने नोटिस जारी कर जवाब मांगा है.




