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अहमदाबाद–गांधीनगर | भारत-जर्मनी संबंधों में सांस्कृतिक और कूटनीतिक मजबूती

अहमदाबाद–गांधीनगर | भारत-जर्मनी संबंधों में सांस्कृतिक और कूटनीतिक मजबूती
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रिपोर्ट : विजय तिवारी

पतंगों के आसमान में कूटनीति की उड़ान

गुजरात दौरे के दौरान जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज़

और भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की संयुक्त सहभागिता ने भारत-जर्मनी संबंधों को सांस्कृतिक और कूटनीतिक दोनों स्तरों पर नया आयाम दिया। अहमदाबाद से गांधीनगर तक हुए कार्यक्रमों में परंपरा, संवाद और साझेदारी का संतुलित स्वरूप स्पष्ट रूप से सामने आया।

अहमदाबाद के साबरमती रिवरफ्रंट पर आयोजित अंतर्राष्ट्रीय पतंग महोत्सव 2026 (International Kite Festival 2026) के दौरान दोनों नेताओं ने पतंग उड़ाकर भारतीय लोकसंस्कृति में सहभागिता की। रंग-बिरंगी पतंगों से सजा आकाश, पारंपरिक संगीत और जनसहभागिता ने उत्सव को विशेष गरिमा दी। यह दृश्य भारत की सांस्कृतिक विरासत, खुलेपन और वैश्विक मित्रता के संदेश का प्रतीक बना। अनौपचारिक वातावरण में की गई यह सहभागिता सांस्कृतिक कूटनीति की प्रभावी झलक के रूप में सामने आई।

इसके बाद गांधीनगर स्थित महात्मा मंदिर में द्विपक्षीय बैठक आयोजित हुई, जहां भारत-जर्मनी रणनीतिक साझेदारी के प्रमुख पहलुओं पर विचार-विमर्श हुआ। चर्चा में यह तथ्य रेखांकित किया गया कि दोनों देशों के रणनीतिक सहयोग को 25 वर्ष पूर्ण हो चुके हैं और इस अवधि में आर्थिक, तकनीकी, शैक्षिक तथा वैश्विक मुद्दों पर संबंधों ने मजबूत आधार हासिल किया है। भविष्य की प्राथमिकताओं, आपसी समन्वय और सहयोग को और गहरा करने पर सहमति बनी।

बैठक के दौरान वैश्विक चुनौतियों के संदर्भ में साझा दृष्टिकोण, लोकतांत्रिक मूल्यों और आपसी विश्वास को आगे बढ़ाने पर बल दिया गया। यह संवाद केवल औपचारिक कूटनीति तक सीमित नहीं रहा, बल्कि दीर्घकालिक साझेदारी को नई दिशा देने वाला कदम भी साबित हुआ।

अंतरराष्ट्रीय पतंग महोत्सव में देश-विदेश से आए प्रतिभागियों की मौजूदगी, पारंपरिक गुजराती पतंगों के साथ आधुनिक और पर्यावरण-अनुकूल डिज़ाइनों का प्रदर्शन, लोकनृत्य, हस्तशिल्प और स्थानीय व्यंजनों ने गुजरात की सांस्कृतिक समृद्धि को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया। बड़ी संख्या में आगंतुकों की भागीदारी से पर्यटन और स्थानीय गतिविधियों को भी प्रोत्साहन मिला।

अहमदाबाद में सांस्कृतिक सहभागिता और गांधीनगर में द्विपक्षीय संवाद ने यह स्पष्ट किया कि भारत-जर्मनी संबंध रणनीतिक और आर्थिक दायरों से आगे बढ़कर सांस्कृतिक जुड़ाव और जनसंपर्क के माध्यम से भी सशक्त हो रहे हैं। यह दौरा दोनों देशों की मैत्री को संतुलित, व्यावहारिक और सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ाने वाला महत्वपूर्ण अध्याय बनकर सामने आया।

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