फरवरी 2026 से UPI सिस्टम में बड़े बदलाव, लेनदेन होगा पहले से ज्यादा तेज और सुरक्षित

रिपोर्ट : विजय तिवारी
नई दिल्ली।
देश में डिजिटल भुगतान को और सशक्त बनाने के लिए यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) के नियमों में बड़ा बदलाव किया जा रहा है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI), भारत सरकार और नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) ने मिलकर फरवरी 2026 से यूपीआई के नए दिशा-निर्देश लागू करने का निर्णय लिया है। इन बदलावों का उद्देश्य भुगतान प्रक्रिया को तेज करना, तकनीकी रुकावटों को कम करना और यूजर्स की सुरक्षा को मजबूत बनाना है।
भारत में यूपीआई अब केवल एक भुगतान माध्यम नहीं, बल्कि आम जीवन का अहम हिस्सा बन चुका है। छोटे दुकानदारों से लेकर बड़े कारोबार, ऑनलाइन शॉपिंग, बिल भुगतान और पैसे ट्रांसफर तक, करोड़ों लोग रोजाना यूपीआई का उपयोग कर रहे हैं। ऐसे में नए नियमों का असर सीधे आम उपभोक्ताओं पर पड़ेगा।
अब UPI ट्रांजेक्शन में नहीं होगी देरी
नए नियमों के अनुसार, यूपीआई लेनदेन से जुड़ा तकनीकी रिस्पॉन्स अब अधिकतम 10 सेकंड में पूरा करना अनिवार्य होगा। पहले यह प्रक्रिया 30 सेकंड तक चलती थी, जिससे कई बार ट्रांजेक्शन अटक जाते थे या लंबे समय तक “पेंडिंग” दिखते थे।
इस बदलाव से भुगतान तेजी से पूरे होंगे, फेल ट्रांजेक्शन की संख्या घटेगी और भीड़ वाले समय में भी सिस्टम अधिक प्रभावी ढंग से काम करेगा।
API सिस्टम को किया जाएगा और मजबूत
UPI लेनदेन में API यानी एप्लिकेशन प्रोग्रामिंग इंटरफेस की अहम भूमिका होती है। यही सिस्टम यूपीआई ऐप और बैंकों के बीच डेटा का आदान-प्रदान करता है। नए नियमों के तहत API की स्पीड और क्षमता बढ़ाई जाएगी, जिससे भुगतान प्रक्रिया ज्यादा स्मूथ और भरोसेमंद हो सकेगी।
सुरक्षा को लेकर सख्त प्रावधान
फरवरी 2026 से लागू होने वाले नियमों में सुरक्षा को प्राथमिकता दी गई है, विशेष रूप से बड़े अमाउंट के ट्रांजेक्शन के लिए। भुगतान से पहले स्पष्ट पुष्टि (कन्फर्मेशन), ऑटो-पे और सब्सक्रिप्शन आधारित भुगतान के लिए अतिरिक्त सुरक्षा उपाय लागू किए जाएंगे।
यूजर्स को अपनी सब्सक्रिप्शन सेवाओं को देखने, नियंत्रित करने और जरूरत पड़ने पर बंद करने की सुविधा भी पहले से बेहतर मिलेगी।
लंबे समय से निष्क्रिय UPI ID पर लग सकती है रोक
जो UPI ID लंबे समय से उपयोग में नहीं हैं, उन्हें अस्थायी रूप से निष्क्रिय किया जा सकता है। ऐसी आईडी को दोबारा चालू करने के लिए यूजर को पुनः सत्यापन कराना होगा। इसका उद्देश्य निष्क्रिय खातों के दुरुपयोग और संभावित धोखाधड़ी को रोकना है।
फेल ट्रांजेक्शन पर मिलेगी स्पष्ट जानकारी
अगर कोई यूपीआई भुगतान असफल होता है या बीच में अटक जाता है, तो बैंक और ऐप्स को तय समय सीमा के भीतर समस्या का समाधान करना होगा। यूजर को यह जानकारी दी जाएगी कि पैसा कटा है या नहीं, कहां अटका है और कब तक वापस मिलेगा। इससे उपभोक्ताओं की परेशानी और भ्रम दोनों कम होंगे।
UPI का बढ़ता दायरा और भरोसा
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, चालू वित्त वर्ष में दिसंबर तक यूपीआई के जरिए लगभग 230 लाख करोड़ रुपये से अधिक का लेनदेन हुआ है, जो पिछले वर्षों की तुलना में बड़ा इजाफा दर्शाता है।
UPI अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी पहचान बना चुका है और कई देशों में इसका उपयोग हो रहा है। वैश्विक रिपोर्ट्स के अनुसार, रियल-टाइम डिजिटल भुगतान के क्षेत्र में UPI दुनिया की अग्रणी प्रणालियों में शामिल हो चुका है।
फरवरी 2026 से लागू होने वाले नए UPI नियमों से लेनदेन की रफ्तार बढ़ेगी, सुरक्षा मजबूत होगी और डिजिटल भुगतान पहले से ज्यादा भरोसेमंद बनेगा। इससे आम यूजर्स, व्यापारियों और पूरे डिजिटल इकोसिस्टम को सीधा लाभ मिलेगा।




