बिहार की राजनीति में बड़ा मोड़ : राज्यसभा की राह पर नीतीश कुमार, सत्ता समीकरण बदलने की अटकलें तेज

रिपोर्ट : विजय तिवारी
पटना/नई दिल्ली।
बिहार की राजनीति इस समय बड़े बदलाव के दौर से गुजर रही है। करीब दो दशकों तक राज्य की सत्ता के केंद्र में रहे नीतीश कुमार अब राष्ट्रीय राजनीति की ओर कदम बढ़ाने की तैयारी में हैं। सूत्रों के अनुसार मुख्यमंत्री गुरुवार को राज्यसभा चुनाव के लिए नामांकन दाखिल कर सकते हैं, जिससे बिहार की राजनीति में नए समीकरण बनने की चर्चाएं तेज हो गई हैं।
नामांकन के दौरान प्रमुख नेताओं की मौजूदगी
सूत्रों के मुताबिक राज्यसभा नामांकन के दौरान एनडीए के कई प्रमुख नेता उपस्थित रहेंगे। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन, राष्ट्रीय लोकमोर्चा के अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा और अन्य सहयोगी दलों के उम्मीदवार भी उसी दिन नामांकन दाखिल करेंगे। इस मौके पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के पटना पहुंचने की जानकारी सामने आई है।
बताया जा रहा है कि नामांकन बिहार विधानसभा परिसर में दोपहर के आसपास होगा। गृह मंत्री अमित शाह का दौरा इसी कार्यक्रम से जुड़ा माना जा रहा है और उनके द्वारा भाजपा व एनडीए नेताओं के साथ राजनीतिक बैठक की संभावना भी जताई जा रही है।
दो दशक तक सत्ता के केंद्र में रहे नीतीश
24 नवंबर 2005 को नीतीश कुमार ने पहली बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली और बिहार की सत्ता संभाली। उस समय राज्य प्रशासनिक चुनौतियों, कमजोर बुनियादी ढांचे और कानून‑व्यवस्था की समस्याओं से जूझ रहा था।
नीतीश कुमार के नेतृत्व में सड़क निर्माण, शिक्षा के विस्तार, महिला सशक्तिकरण और प्रशासनिक सुधारों से जुड़ी कई योजनाओं को आगे बढ़ाया गया। इन पहलों को बिहार के विकास मॉडल के रूप में राष्ट्रीय स्तर पर भी सराहा गया।
करीब दो दशकों में बिहार की राजनीति में कई बार गठबंधन बदले, लेकिन सत्ता की धुरी के रूप में नीतीश कुमार की भूमिका लगातार बनी रही। राजनीतिक उतार‑चढ़ाव के बावजूद वे राज्य की राजनीति के केंद्रीय चेहरा बने रहे।
2014 में भी आया राजनीतिक मोड़
साल 2014 में लोकसभा चुनाव के बाद नीतीश कुमार ने चुनावी प्रदर्शन की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दिया और Jitan Ram Manjhi को मुख्यमंत्री बनाया। हालांकि कुछ ही समय बाद वे फिर से मुख्यमंत्री पद पर लौट आए।
राज्यसभा का फैसला क्यों अहम
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि राज्यसभा नामांकन केवल संसद में जाने की प्रक्रिया नहीं है, बल्कि इसे बिहार की राजनीति में योजनाबद्ध राजनीतिक परिवर्तन के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
नीतीश कुमार ने भी कहा है कि संसदीय जीवन शुरू करने से ही उनकी इच्छा रही कि वे बिहार विधानमंडल के दोनों सदनों के साथ-साथ संसद के दोनों सदनों के सदस्य बनें। इसी क्रम में वे राज्यसभा चुनाव लड़ रहे हैं।
जनता के नाम ट्वीट में क्या कहा -
इस बीच नीतीश कुमार ने अपने निर्णय को लेकर जनता के प्रति आभार व्यक्त करते हुए X पर ट्वीट किया :
“पिछले दो दशक से भी अधिक समय से आपने अपना विश्वास एवं समर्थन मेरे साथ लगातार बनाए रखा है, तथा उसी के बल पर हमने बिहार की और आप सब लोगों की पूरी निष्ठा से सेवा की है। आपके विश्वास और समर्थन की ही ताकत थी कि बिहार आज विकास और सम्मान का नया आयाम प्रस्तुत कर रहा है। इसके लिए पूर्व में भी मैंने आपके प्रति कई बार आभार व्यक्त किया है।
संसदीय जीवन शुरू करने के समय से ही मेरे मन में एक इच्छा थी कि मैं बिहार विधान मंडल के दोनों सदनों के साथ संसद के भी दोनों सदनों का सदस्य बनूँ। इसी क्रम में इस बार हो रहे चुनाव में राज्यसभा का सदस्य बनना चाह रहा हूँ।
मैं आपको पूरी ईमानदारी से विश्वास दिलाना चाहता हूँ कि आपके साथ मेरा यह संबंध भविष्य में भी बना रहेगा एवं आपके साथ मिलकर एक विकसित बिहार बनाने का संकल्प पूर्ववत कायम रहेगा। जो नई सरकार बनेगी उसको मेरा पूरा सहयोग एवं मार्गदर्शन रहेगा।”
नए मुख्यमंत्री को लेकर अटकलें
नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने की चर्चाओं के बीच बिहार में अगले मुख्यमंत्री को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं। भाजपा और एनडीए के कई नेताओं के नाम संभावित दावेदारों के रूप में चर्चा में हैं, जिसमें डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी, केंद्रीय मंत्री नित्यानंद राय और अन्य वरिष्ठ नेता शामिल हैं।
हालांकि एनडीए के कई नेताओं ने नेतृत्व परिवर्तन पर खुलकर कोई टिप्पणी नहीं की है। कुछ नेताओं का कहना है कि मुख्यमंत्री पद को लेकर कोई औपचारिक निर्णय अभी नहीं हुआ है और सरकार पहले की तरह काम कर रही है।
जेडीयू के भीतर हलचल
नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने की खबरों के बीच जेडीयू के अंदर भी हलचल देखने को मिल रही है। पटना में मुख्यमंत्री आवास के बाहर कुछ कार्यकर्ताओं ने विरोध जताया और नीतीश कुमार के मुख्यमंत्री बने रहने की मांग की। पार्टी के कई नेताओं ने कहा कि बिहार की जनता ने उन्हें मुख्यमंत्री के रूप में जनादेश दिया है और उनका नेतृत्व राज्य के लिए आवश्यक है।
विपक्ष और राजनीतिक बयान
विपक्षी दलों ने इस घटनाक्रम को लेकर सरकार पर सवाल उठाना शुरू किया है। राष्ट्रीय जनता दल के नेताओं ने आरोप लगाया कि भाजपा बिहार की सत्ता पर पूर्ण नियंत्रण चाहती है और इसी रणनीति के तहत नीतीश कुमार को दिल्ली भेजा जा रहा है। वहीं एनडीए नेताओं ने इसे राजनीतिक बयानबाजी करार दिया है।
एक युग के अंत की चर्चा
करीब दो दशकों तक बिहार की राजनीति के केंद्रीय चेहरा रहे नीतीश कुमार के राज्यसभा की ओर बढ़ते कदम को राजनीतिक विश्लेषक युगांतकारी बदलाव के रूप में देख रहे हैं। माना जा रहा है कि यदि यह प्रक्रिया आगे बढ़ती है, तो बिहार की सत्ता संरचना में बड़ा बदलाव संभव है और राज्य की राजनीति का नया अध्याय शुरू हो सकता है।
सूत्रों के मुताबिक राज्यसभा के संभावित नामांकन ने बिहार की राजनीति में हलचल बढ़ा दी है। अब सबकी निगाहें नामांकन प्रक्रिया और उसके बाद होने वाले राजनीतिक घटनाक्रम पर टिकी हैं, जो तय करेंगे कि आने वाले समय में बिहार की राजनीति किस दिशा में आगे बढ़ती है।




