चचा ने फिर भतीजे की तरफ बढ़ाया हाथ, बोले- एक हो जाएं तो बना लेंगे सरकार

इटावा. समाजवादी पार्टी से अलग होकर प्रगतिशील समाजवादी पार्टी का गठन करने वाले शिवपाल यादव ने एक बार फिर यादव कुनबे में एकता का राग अलापा है. इटावा में मीडिया से बातचीत करते हुए शिवपाल यादव ने कहा कि नेताजी (मुलायम सिंह यादव) के जन्मदिन पर परिवार में एकता हो जाए तो अच्छा है. उन्होंने कहा कि उनकी कोशिश है कि परिवार में एकता हो.
शिवपाल यादव ने कहा कि सपा और प्रसपा एक हो जाए तो सरकार बना लेंगे. उन्होंने कहा कि भतीजा (अखिलेश यादव) समझ लेगा तो 2022 में सरकार बना लेंगे. शिवपाल ने कहा कि वे मुख्यमंत्री नहीं बनना चाहते. उनकी प्राथमिकता समाजवादी पार्टी है. क्योंकि मैंने बहुत लंबे समय तक नेताजी के साथ काम किया है. हमारी विचारधारा भी समाजवादी है.
सपा से गठबंधन हमारी प्राथमिकता- @shivpalsinghyad
— Gaurav Singh Sengar (@sengarlive) November 19, 2019
अब @yadavakhilesh के पाले में गेंद..... pic.twitter.com/ciUwjvnwMZ
22 नवंबर को है मुलायम का जन्मदिन
गौरतलब है कि 22 नवंबर को सपा संरक्षक मुलायम सिंह का जन्मदिन है. शिवपाल यादव ने ऐलान किया कि वे इस दिन सैफई में एक बड़ा आयोजन कराएंगे. शिवपाल के इस बयान के बाद सूबे के सियासी गलियारे में यादव परिवार के एक होने की सुगबुगाहट फिर तेज हो गई है. कहा जा रहा है कि 22 नवंबर को मुलायम के जन्मदिन के मौके पर चाचा और भतीजा एक साथ दिख सकते हैं.
पहले भी दे चुके हैं साथ आने के संकेत
गौरतलब है कि लोकसभा चुनाव परिणाम के बाद बसपा से गठबंधन टूटने के बाद अखिलेश और शिवपाल दोनों ने साथ आने के संकेत दिए थे. लेकिन बाद में शिवपाल यादव ने कहा था कि वे सपा में पार्टी का विलय नहीं कर सकते. पार्टी सपा के साथ गठबंधन जरूर कर सकती है. एक बार फिर से शिवपाल ने एकसाथ आने के संकेत दिए हैं. देखना दिलचस्प होगा कि क्या अखिलेश चाचा शिवपाल को साथ लेते हैं या नहीं.
लोकसभा चुनाव में अलग-अलग लड़े
पार्टी में एकाधिकार को लेकर 2016 में शुरू हुई महाभारत के बाद शिवपाल यादव ने 2017 के विधानसभा चुनाव के बाद अलग पार्टी बना ली. हालांकि वे इस दौरान नेताजी के साथ और समर्थन की बात भी करते रहे. लेकिन लोकसभा चुनाव के दौरान शिवपाल यादव ने समाजवादी पार्टी के खिलाफ प्रत्याशी उतार दिए. लोकसभा चुनाव में अखिलेश यादव और मुलायम सिंह यादव को छोड़कर यादव परिवार का कोई भी प्रत्याशी नहीं जीता. इसके बाद हुई समीक्षा में यह बात सामने आई कि शिवपाल की वजह से कई सीटों पर पार्टी को हार का सामना करना पड़ा.