मंत्री-विधायक दावत उड़ाते रहे,शहीद की शवयात्रा में कोई नहीं पहुंचा
जौनपुर : शहीद की शहादत के अपमान का यह शर्मनाक वाकया यूपी के जौनपुर जिले में हुआ। जब कश्मीर के पम्पोर में शहीद हुए जवान संजय सिंह का सोमवार सुबह शव घर पहुंचा तो सपा सरकार में जिले के कैबिनेट मंत्री पारसनाथ यादव व ललई यादव न झांकने पहुंचे और न ही सपा या अन्य दलों से जुड़े जिले के विधायक। यहां तक कि ब्लाक प्रमुख व अन्य छुटभैया नेताओं को भी फुर्सत नहीं रही। दरअसल सभी लोग शहर में होटल में आयोजित दावत में जाने की तैयारी में व्यवस्त रहे।
शवयात्रा में नहीं पहुंचे मगर होटल में मंत्री की दावत उड़ाने जनप्रतिनिधि पहुंचे शहीद संजय सिंह की केराकत स्थित घर से सुबह शवयात्रा निकली। क्योंकि भोर में ही जम्मू-कश्मीर से शव घर आ गया था। सुबह से लेकर पूरे दिन तक कोई भी जनप्रतिनिधि शहीद के घर पहुंचने की फुर्सत नहीं निकाल पाया। मगर जैसे ही शाम को शहर के उत्सव मोटल में कैबिनेट मंत्री पारसनाथ यादव की रोजा इफ्तार पार्टी का समय आया सभी नेता लकदक कुर्ता पहनकर सेंट मारकर दावत उड़ाने चल पड़े। स्थानीय जनता में इसकी तीखी आलोचना होती रही कि जिले के बड़े से लेकर छोटे नेता इफ्तार पार्टी में व्यंजन छकने में जी-जान से जुटे रहे। मगर शहीद की शहादत को सलाम करना उचित नहीं समझे। शहादत की इस बेकदरी पर जहां शहीद के परिवार वाले और जिले के लोगों में रोष है, वहीं सोशल मीडिया पर जनप्रतिनिधियों की थू-थू हो रही है। यहां इंडिया संवाद का विरोध रोजा इफ्तार में किसी के शामिल होने से नहीं है, सिर्फ इस बात पर है कि अगर रोजा इफ्तार के लिए नेताओं के पास समय रहा तो उससे पहले शहीद के घर दो मिनट का शोक जताने के लिए जाने की जहमत किसी ने क्यों नहीं उठा्ई। जबकि यह आम शिष्टाचार है।
भाजपा के देशभक्त सांसद भी रहे लापता
राष्ट्रवाद का राग अलापने वाली भाजपा से जुड़कर खुद को देशभक्त कहते नहीं थकते हैं नेता। मगर इस पार्टी से भी कोई पदाधिकारी शहीद संजय के केराकत स्थित आवास पर शोक जताने नहीं पहुंचा। जबकि शहीद का घर मछलीशहर संसदीय सीट में आता है। जहां से भाजपा के ही सांसद रामचरित्र निषाद हैं। न तो सांसद पहुंचे न ही अपने किसी प्रतिनिधि को ही भेजा।
डीएम-एसपी को भी फुर्सत नहीं
सांसद, मंत्री, विधायक आदि जनप्रतिनिधियों ने शहीद को उपेक्षित किया ही जिला प्रशासन ने भी कोई कोर-कसर नहीं छोड़ी। जिलास्तरीय अफसरों में डीएम या एसपी ने भी मौके पर जाना जरूरी नहीं समझा। सिर्फ स्थानीय तहसील केराकत के एसडीएम और एसपी सिटी को भेजकर काम चला लिया गया।
कांग्रेस, भाजपा, बसपा, सपा के छुटभैया नेता भी नहीं पहुंचे
सबसे अफसोस व चौकाने की बात है कि भाजपा, कांग्रेस, सपा, बसपा आदि प्रमुख दलों के छोटे नेता भी शहीद की चिता पर फूल-माला चढ़ाने नहीं पहुंचे। जिस पर शहीद के परिवार के लोग खासे गुस्से में रहे।
मंत्री पारस बोले, बहुत बिजी रहा, जाऊंगा शोक जताने
जब जिले के विधायक व कैबिनेट मंत्री पारसनाथ यादव से शहीद की शहादत को सम्मान न देने पर सवाल पूछा गया तो उन्होंने राजनीतिक बयानबाजी की। कहा कि 25 जून को मुख्यमंत्री की ओर से लखनऊ में आयोजित इफ्तार पार्टी में शामिल होने गए थे। वहीं फिर मंत्रिमंडल विस्तार के कारण वहीं रहना पड़ा। मगर जब उनसे पूछा गया कि जब वे जिले में लौटे तो फिर इफ्तार के बीच मौका निकालकर शहीद के घर क्यों नहीं पहुंचे तो वे सवाल को टाल गए। बोले कि उन्हें शहीद के परिवार से पूरी हमदर्दी है। वे मंगलवार को घर जाकर परिवार का हालचाल लेंगे। राज्य सरकार से अधिक से अधिक आर्थिक सहायता दिलाने की अपील करेंगे।
शवयात्रा में नहीं पहुंचे मगर होटल में मंत्री की दावत उड़ाने जनप्रतिनिधि पहुंचे शहीद संजय सिंह की केराकत स्थित घर से सुबह शवयात्रा निकली। क्योंकि भोर में ही जम्मू-कश्मीर से शव घर आ गया था। सुबह से लेकर पूरे दिन तक कोई भी जनप्रतिनिधि शहीद के घर पहुंचने की फुर्सत नहीं निकाल पाया। मगर जैसे ही शाम को शहर के उत्सव मोटल में कैबिनेट मंत्री पारसनाथ यादव की रोजा इफ्तार पार्टी का समय आया सभी नेता लकदक कुर्ता पहनकर सेंट मारकर दावत उड़ाने चल पड़े। स्थानीय जनता में इसकी तीखी आलोचना होती रही कि जिले के बड़े से लेकर छोटे नेता इफ्तार पार्टी में व्यंजन छकने में जी-जान से जुटे रहे। मगर शहीद की शहादत को सलाम करना उचित नहीं समझे। शहादत की इस बेकदरी पर जहां शहीद के परिवार वाले और जिले के लोगों में रोष है, वहीं सोशल मीडिया पर जनप्रतिनिधियों की थू-थू हो रही है। यहां इंडिया संवाद का विरोध रोजा इफ्तार में किसी के शामिल होने से नहीं है, सिर्फ इस बात पर है कि अगर रोजा इफ्तार के लिए नेताओं के पास समय रहा तो उससे पहले शहीद के घर दो मिनट का शोक जताने के लिए जाने की जहमत किसी ने क्यों नहीं उठा्ई। जबकि यह आम शिष्टाचार है।
भाजपा के देशभक्त सांसद भी रहे लापता
राष्ट्रवाद का राग अलापने वाली भाजपा से जुड़कर खुद को देशभक्त कहते नहीं थकते हैं नेता। मगर इस पार्टी से भी कोई पदाधिकारी शहीद संजय के केराकत स्थित आवास पर शोक जताने नहीं पहुंचा। जबकि शहीद का घर मछलीशहर संसदीय सीट में आता है। जहां से भाजपा के ही सांसद रामचरित्र निषाद हैं। न तो सांसद पहुंचे न ही अपने किसी प्रतिनिधि को ही भेजा।
डीएम-एसपी को भी फुर्सत नहीं
सांसद, मंत्री, विधायक आदि जनप्रतिनिधियों ने शहीद को उपेक्षित किया ही जिला प्रशासन ने भी कोई कोर-कसर नहीं छोड़ी। जिलास्तरीय अफसरों में डीएम या एसपी ने भी मौके पर जाना जरूरी नहीं समझा। सिर्फ स्थानीय तहसील केराकत के एसडीएम और एसपी सिटी को भेजकर काम चला लिया गया।
कांग्रेस, भाजपा, बसपा, सपा के छुटभैया नेता भी नहीं पहुंचे
सबसे अफसोस व चौकाने की बात है कि भाजपा, कांग्रेस, सपा, बसपा आदि प्रमुख दलों के छोटे नेता भी शहीद की चिता पर फूल-माला चढ़ाने नहीं पहुंचे। जिस पर शहीद के परिवार के लोग खासे गुस्से में रहे।
मंत्री पारस बोले, बहुत बिजी रहा, जाऊंगा शोक जताने
जब जिले के विधायक व कैबिनेट मंत्री पारसनाथ यादव से शहीद की शहादत को सम्मान न देने पर सवाल पूछा गया तो उन्होंने राजनीतिक बयानबाजी की। कहा कि 25 जून को मुख्यमंत्री की ओर से लखनऊ में आयोजित इफ्तार पार्टी में शामिल होने गए थे। वहीं फिर मंत्रिमंडल विस्तार के कारण वहीं रहना पड़ा। मगर जब उनसे पूछा गया कि जब वे जिले में लौटे तो फिर इफ्तार के बीच मौका निकालकर शहीद के घर क्यों नहीं पहुंचे तो वे सवाल को टाल गए। बोले कि उन्हें शहीद के परिवार से पूरी हमदर्दी है। वे मंगलवार को घर जाकर परिवार का हालचाल लेंगे। राज्य सरकार से अधिक से अधिक आर्थिक सहायता दिलाने की अपील करेंगे।
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