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ईद पर जुनैद के घर में मातम, दुख की घड़ी में गांव के हिंदू परिवार भी साथ
BY Suryakant Pathak26 Jun 2017 7:44 AM GMT

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Suryakant Pathak26 Jun 2017 7:44 AM GMT
देश भर में ईद मनाई जा रही है लेकिन जुनैद के घर मातम फैला हुआ है. दिल्ली-मथुरा ईएमयू में हुई खंदावली गांव के जुनैद की हत्या को कुछ लोग सांप्रदायिक रंग देने की कोशिश में जुटे हुए हैं. लेकिन कुछ ऐसे लोग भी हैं जो चाहते हैं कि भाईचारे का तानाबाना न टूटे. इसके लिए वह कोशिश भी कर रहे हैं.
जुनैद के घर मुस्लिम सांत्वना देने जा रहे हैं तो हिंदू पीछे नहीं हैं. सबसे बड़ी बात यह है जहां कथित रूप से मुस्लिमों के खान-पान, पहनावे पर टिप्पणी करके जुनैद को ट्रेन में पीटा गया वहीं असावटी स्टेशन पर उसका बह रहा खून रोकने के लिए मीना नामक एक हिंदू महिला आगे आई थी.
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक इसी ट्रेन में यात्रा कर रही इस महिला ने अपने दुपट्टे से खून रोकने की कोशिश की. बल्लभगढ़ ऊंचागांव जामा मस्जिद के मौलाना जमालुद्दीन ने कहते हैं कि महिलाओं का दिल को कोमल होता है. यदि उस डिब्बे में ज्यादा महिलाएं होतीं तो वह जुनैद को बचा लेतीं.
यही नहीं ज्वाइंट ट्रेन यूनियन काउंसिल ने इस मामले को लेकर फरीदाबाद के बादशाह खान चौक पर एकत्रित होकर सद्भावना न्याय कैंडल मार्च निकाला. जिसमें श्रमिक नेता बेचू गिरी, आरएन सिंह, आरडी यादव, डीएन मिश्रा, निरंतर पराशर, लाल बाबू शर्मा, जवाहर सिंह, सुभाष लांबा आदि मौजूद रहे.
कुल मिलाकर इस मामले में जुनैद के परिवार को न्याय दिलाने के लिए जितने मुस्लिम परेशान हैं उससे कम हिंदू भी नहीं हैं. ऐसा इसलिए हो रहा है ताकि सामाजिक ताना-बाना न टूटे.
खंदावली निवासी मुबीन खान कहते हैं कि 'उनके गांव में करीब 40 घर हिंदुओं के हैं. वह लोग इस दुख की घड़ी में जुनैद के परिवार के साथ खड़े हैं. वो इंसान नहीं थे जिन्होंने बच्चे को हैवान बनकर पीटा. उसकी टोपी उछाली और चाकू से वार किया'.
घटना के एक दिन बाद ही सर्व कर्मचारी संघ के एक दल ने खंदावली गांव का दौरा किया. मृतक जुनैद के परिवार से मिलकर संवेदना व्यक्त की. न्याय के लिए लड़ाई में साथ देने का एलान किया. शिष्टमंडल में कर्मचारी नेता सुभाष लांबा, नरेश कुमार शास्त्री, अशोक कुमार, रामआसरे यादव, रमेश चंद तेवतिया, नवल सिंह नर्वत, हर प्रसाद आदि मौजूद रहे.
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