सूरज उगने से पहले देश पदक का 'साक्षी' बन चुका था

नई दिल्लीः एक अदद पदक के लिए जूझते भारत के लिए जैसे ही कुश्ती में 24 साल की साक्षी मलिक ने रियो ओलंपिक में ब्रांज मेडल जीता, रोहतक में सेक्टर तीन स्थित घऱ जश्न से गुलजार हो उठा। टीवी पर आखिरी क्षणों में बेटी को मुकाबला जीतता देख मां सुदेश मलिक खुशी से निहाल हो उठीं। खुशी के आंसुओं से दोनों आंखें भर उठीं। फिर हाथ जोड़कर भगवान से फरियाद कर उठीं- अगले जन्म मोहे साक्षी बिटिया ही दीजौ। साक्षी ने जैसे ही देश की खाली झोली में पहला पदक डालकर सूनापन खत्म किया तो पास-पड़ोस के लोग हों या दिल्ली-एनसीआर में रहने वाले रिश्तेदार व चिर-परिचित। सभी सूरज उगने से पहले ही साक्षी के परिवार को बधाई देने के लिए उनके घऱ की तरफ चल पड़े। सुबह होते-होते घर के आसपास बधाई देने वालों का ताता लग गया।
मुकाबले से पहले मां, बुआ, भाभी...भाई थे तनाव में
जब रियो ओलंपिक में 58 किग्रा फ्री स्टाइल कुश्ती में साक्षी का मुकाबला किर्गिस्तान की पहलवान से होना था, तब ॉघर पर मां सुदेश मलिक तो दिल्ली में रहने वाली बुआ राज, मोखरा से भाभी सुषमा, भाई सचिन और मौसी कविता टेलीविजन खोलकर बैठ गईं। मगर दिल धक-धक कर रहा था.....एक ही सवाल जेहन में कौंध रहा था.....न जाने साक्षी का प्रदर्शन कैसा रहेगा। चाचा राजेश मलिक ने तो फिजिक्स की कोचिंग से छुट्टी ले रखी थी। मगर आखिरी क्षणों मे 8-5 से साक्षी ने किर्गिस्तान की पहलवान को चित किया तो परिवार के लोग आज मैं ऊपर....आसमां नीचे के माहौल में डूब गए।
पर दर पल चेहरे के बदलते रहे भाव
मुकाबला शुरू हुआ तो निगाहें टेलीविजन पर गड़ गईं। मगर यह क्या....साक्षी के दांव बेकार जा रहे हैं। पहला राउंड तक परिवार निराश हो चुका है। राउंड खत्म होने तक साक्षी 5-0 से पीछे हुए तो परिवार वाले सिर पकड़ कर बैठ गए। अब मुकाबले का आखिरी मिनट है। मां सुदेश मलिक बार-बार हाथ जोड़कर भगवान से दुहाई दे रहीं हैं। और शुरू हो गया करिश्मा। आखिरी क्षणों में साक्षी ने बाजी पलटकर देश को पहले पदक का साक्षी बनाया।
साक्षी आसमां की बुलंदी छुएगी...मालुम न था
पिता सुखबीर मलिक कहते हैं कि छह साल पहले साक्षी केवल जर्सी व ड्रेस के लिए कुश्ती खेलती थी। तम हमें नहीं पता था कि मेरी लाडो कुश्ती में आसमा की बुलंदी छुएगी। सुखबीर कहते हैं कि बहुत कम उम्र में सब जूनियर एशियन चैंपियनशिप में गोल्ड जीता, 2014 के कॉमनवेल्थ गेम में सिल्वर, एशियन चैंपियनशिप में ब्रांज और 2013 के सीडब्ल्यूसी में भी कांस्य पदक हासिल किया। इसके अलावा नेशनल 2010, 2013 और 2014 में हुए नेशनल गेम्स में साक्षी ने गोल्ड जीते।




