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कहानी सियाचिन के शूरवीरों की, माइनस पचास डिग्री तापमान में खड़े होकर देश की रक्षा करते हैं

कहानी सियाचिन के शूरवीरों की, माइनस पचास डिग्री तापमान में खड़े होकर देश की रक्षा करते हैं
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नई दिल्ली: देश आजादी का जश्न मना रहा है. आज हम आपको उन जांबाजों की कहानी बताने जा रहे हैं जो माइनस पचास डिग्री तापमान में खड़े होकर हमारी रक्षा करते हैं. बर्फीले पहाड़ों के बीच हवा को चीड़ता हुए हेलिकॉप्टर. दूर दूर तक सिर्फ पहाड़ ही पहाड़. हरियाली का कहीं कोई नामो निशान नहीं. जहां सांस लेने में भी परेशानी होती है.

कहानी सियाचिन के शूरवीरों की

धरती से करीब बीस हजार फुट ऊपर ये वही सियाचिन है जहां देश के जांबाज अपनी जान की परवाह किए बगैर दिन रात पहरा देते हैं. आजादी के जश्न के मौके पर हम आपको इसी सियाचिन के शूरवीरों की कहानी बताने जा रहे हैं.

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हैलिकॉप्टर से नीचे से ऊपर पहुंचता है खाने पीने का सामान

चीन और पाकिस्तान से सटा सियाचिन ग्लेशियर का तापमान माइनस पचास डिग्री तक चला जाता है. बर्फबारी हो या बर्फ का तूफान. हर वक्त इस जगह पर हमारे सैनिक पहरा देते हैं. रोज पहरा देने वाले सैनिकों के लिए खाने पीने का सामान नीचे से ऊपर हेलिकॉप्टर पहुंचता है.

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हेलिकॉप्टर दी सैनिकों की एक मात्र लाइफ लाइन

सियाचिन के पोस्ट पर पहरा देने वाले जवानों के लिए हेलिकॉप्टर एक मात्र लाइफ लाइन है. खराब मौसम में दिक्कत तो होती है लेकिन खाने से लेकर अगर किसी जवान की तबीयत खराब हो गई तो भी इसी हेलिकॉप्टर का ही सहारा होता है. बीस हजार फीट की ऊंचाई पर एकमात्र हेलिपैड दुनिया में इसी सियाचिन में है.

सियाचिन के शूरवीरों को दी जाती है विशेष तरह की ट्रेनिंग

एक तरफ चीन है तो दूसरी तरफ पाकिस्तान के कब्जे वाला कश्मीर और बीच में पड़ता है हमारा सियाचिन. इसी सियाचिन से हमारे सैनिक दुश्मनों पर नजर रखते हैं. बर्फीले तूफान की वजह से इसी सियाचिन में ड्यूटी के दौरान फरवरी महीने में कई जवान शहीद हो गये थे. सियाचिन में ड्यूटी के लिए जाने वाले सैनिकों को विशेष तरह की ट्रेनिंग दी जाती है.

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देश इन्हीं जवानों के जज्बे की बदौलत आजादी का जश्न मना रहा है. 18 अगस्त को रक्षा बंधन है और उस दिन केंद्रीय कपड़ा मंत्री स्मृति ईरानी सियाचिन जाकर जांबाज जवानों को रक्षा सूत्र बांधकर राखी मनाएंगी.

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