जब बेटी ने दिया पिता के जनाज़े को कन्धा
गुरदासपुर : गांव के दूर-दूर से लोग वहां इकट्ठा हुए थे. सभी की नजरें नम थीं और तलाश रही थी उस वीर जवान की अंतिम यात्रा को जिसने पठानकोट में आतंकियों से लड़ते हुए अपनी जान की फिक्र नहीं की. इसी के बीच लोगों ने ऐसा नजारा देखा जिसने वहां मौजूद हर शख्स को इतना भावुक कर दिया कि वे अपने आंसू नहीं रोक पाए.
लेकिन, बहादुर बेटी तिरंगे में लिपटा हुआ अपने पिता का पार्थिव शरीर लेकर आगे बढ़ती रही. न उसके पैर कांप रहे थे और न ही उसकी आंखों में कोई अफसोस था. वह एक शहीद को लेकर जा रही थी और उसके पीछे सिर्फ उनकी वीरता के किस्से लकीर की तरह खिंचे जा रहे थे. फतेह ने जिंदा रहते देश के दुश्मनों से लोहा लिया तो उनके बाद उनकी बेटी ने नापाक इरादों को झंकझोर दिया.
पठानकोट आतंकी हमले में शहीद कैप्टन फतेह सिंह का सोमवार दोपहर उनके गांव झंडा गुज्जरां में सैन्य सम्मान के साथ अंतिम संस्कार कर दिया गया. इस दौरान उनकी बेटी मधु राधा काटल के कंधों पर शहीद की अंतिम यात्रा देख वहां खड़े फौलादी सीने वाले सैनिक भी कुछ देर के लिए भावुक हो गए. शहीद को उनके बेटे गुरदीप राणा ने मुखाग्नि दी. वह भी सेना में जवान है.
इससे पहले शहीद को पूरा राजकीय सम्मान दिया गया. एयरफोर्स और राज्य पुलिस के जवानों ने सलामी दी. संगीनों से निकली हर गोली पर लिखा था ‘शहीद को सलाम’. इन गोलियों से भी ऊंची वहां मौजूद लोगों की आवाज थी जिन्होंने जिंदाबाद के नारे लगाकर शहीदी को अमर कर दिया. इसके साथ ही पाकिस्तान के खिलाफ जमकर नारेबाजी की गई.
लेकिन, बहादुर बेटी तिरंगे में लिपटा हुआ अपने पिता का पार्थिव शरीर लेकर आगे बढ़ती रही. न उसके पैर कांप रहे थे और न ही उसकी आंखों में कोई अफसोस था. वह एक शहीद को लेकर जा रही थी और उसके पीछे सिर्फ उनकी वीरता के किस्से लकीर की तरह खिंचे जा रहे थे. फतेह ने जिंदा रहते देश के दुश्मनों से लोहा लिया तो उनके बाद उनकी बेटी ने नापाक इरादों को झंकझोर दिया.
पठानकोट आतंकी हमले में शहीद कैप्टन फतेह सिंह का सोमवार दोपहर उनके गांव झंडा गुज्जरां में सैन्य सम्मान के साथ अंतिम संस्कार कर दिया गया. इस दौरान उनकी बेटी मधु राधा काटल के कंधों पर शहीद की अंतिम यात्रा देख वहां खड़े फौलादी सीने वाले सैनिक भी कुछ देर के लिए भावुक हो गए. शहीद को उनके बेटे गुरदीप राणा ने मुखाग्नि दी. वह भी सेना में जवान है.
इससे पहले शहीद को पूरा राजकीय सम्मान दिया गया. एयरफोर्स और राज्य पुलिस के जवानों ने सलामी दी. संगीनों से निकली हर गोली पर लिखा था ‘शहीद को सलाम’. इन गोलियों से भी ऊंची वहां मौजूद लोगों की आवाज थी जिन्होंने जिंदाबाद के नारे लगाकर शहीदी को अमर कर दिया. इसके साथ ही पाकिस्तान के खिलाफ जमकर नारेबाजी की गई.
Next Story




