रविदास रव: मोची का मंत्र
BY Suryakant Pathak9 April 2026 6:18 AM GMT

X
Suryakant Pathak9 April 2026 6:18 AM GMT
राम-रट में बीती जवानी
सद्गुरु रैदास की अमृत-वाणी
मन चंगा तो कठौती में गंगा का पानी।
सड़क किनारे एक वृक्ष तले
बैठे दो पंछी मौन
ताक रहे नीचे
एक मोची की साधना को।
जूते की गंध फैली है
भीतर और बाहर
काँपते चाम के स्पर्श में
जीवन की थरथराहट है।
पास ही गूँजता आता
माया-रूपी मोटर का शोर
पर उसके भीतर
अडिग है एक ठौर।
सफर अभी शेष है चप्पल का
चार कोस पर ठहराव
जानी-पहचानी राहों में
ज्ञानी-ध्यानी का अभाव।
राम-रट में डूबा मन
जग से रहता दूर
हाथ सिले जूते
भीतर जागे नूर।
जो उड़ता है, फल चखता है
जो ठहरता है, कल लखता है
मोची के पास खड़ा आदमी
जूता तो सिलवा लेता है
पर धैर्य कहाँ से लाता है?
उसका धीरज उस वृक्ष-सा
जिसकी जड़ें गहरी हैं
उसका शील उस पंछी-सा
जिसकी आँखें ठहरी हैं।
मोची गुनगुनाता रहता
संत रैदास की वाणी
मन चंगा तो कठौती में
गंगा का ही पानी।
©गोलेन्द्र पटेल
चन्दौली, उत्तर प्रदेश।
Next Story




