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रामधुन गाने वाले फ़ारूक़ अब्दुल्ला पर हमला निंदनीय : दीपक मिश्र

रामधुन गाने वाले फ़ारूक़ अब्दुल्ला पर हमला निंदनीय : दीपक मिश्र
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समाजवादी चिंतक तथा बौद्धिक सभा के अध्यक्ष दीपक मिश्र ने जम्मू–कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री और नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष फ़ारूक़ अब्दुल्ला पर हुए हमले की कड़ी निंदा करते हुए कहा है कि यह घटना केवल एक व्यक्ति पर नहीं, बल्कि भारत की उदार, समरस और सहिष्णु परंपरा पर हमला है।

मिश्र ने कहा कि रामधुन गाने वाले, माता वैष्णो देवी और माता क्षीर भवानी के जागरण में भक्ति गीत गाने वाले फ़ारूक़ अब्दुल्ला पर प्राणघातक हमला अत्यंत अमानवीय और निंदनीय है। भारत की संस्कृति सदैव विविधता, सहिष्णुता और पारस्परिक सम्मान की रही है। फ़ारूक़ अब्दुल्ला उसी महान परंपरा के प्रतिनिधि हैं, जो धर्म और समुदाय की सीमाओं से ऊपर उठकर देश की साझा सांस्कृतिक धारा को जीवित रखते हैं।

उन्होंने कहा कि भारतीय इतिहास में ऐसे अनेक उदाहरण मिलते हैं, जहाँ भिन्न आस्थाओं के लोगों ने एक-दूसरे के देवताओं और आदर्शों का आदर किया है। योगेश्वर श्रीकृष्ण पर प्रेम से लिखने वाले रसखान तथा भगवान राम के आदर्शों का गुणगान करने वाले अब्दुर्रहीम खानखाना उसी महान भारतीय परंपरा के प्रतीक हैं। फ़ारूक़ अब्दुल्ला भी उसी विरासत को आगे बढ़ाने वाले व्यक्तित्व हैं।

मिश्र ने कहा कि जब कट्टरता अपने उद्देश्य में असफल हो जाती है, तो वह पहले कुतर्क और अफवाहों का सहारा लेती है, और जब उसमें भी सफलता नहीं मिलती तो हिंसा का रास्ता अपनाती है। फ़ारूक़ अब्दुल्ला पर हुआ हमला इसी कट्टर मानसिकता की हताशा और दुर्भावना का परिणाम है।

उन्होंने कहा कि उदारता बनाम कट्टरता तथा समरसता बनाम साम्प्रदायिकता का यह संघर्ष भारत में नया नहीं है। यह संघर्ष सदियों से चलता आया है और आज एक निर्णायक मोड़ पर खड़ा है। ऐसे समय में देश की बहुलतावादी आत्मा की रक्षा करना हम सभी की जिम्मेदारी है।

दीपक मिश्र ने आज प्रातः दूरभाष पर श्री फ़ारूक़ अब्दुल्ला से बातचीत कर उनका कुशल-क्षेम जाना और अपना समर्थन व्यक्त किया। इस पर फ़ारूक़ अब्दुल्ला ने कहा कि ऐसी घटनाओं से उनके साहस और संकल्प पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा और वे पूर्णतः स्वस्थ हैं।

मिश्र ने कहा कि भारत से संकीर्ण और विभाजनकारी साम्प्रदायिक मानसिकता को समाप्त करने के लिए देशव्यापी वैचारिक और सामाजिक अभियान की आवश्यकता है। उन्होंने सभी सजग नागरिकों और युवाओं से आह्वान किया कि वे देश की एकता, सद्भाव और साझा सांस्कृतिक विरासत की रक्षा के लिए आगे आएँ।

— बौद्धिक सभा

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