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क्वांटम और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस: भविष्य की दो सबसे बड़ी ताकतें

क्वांटम और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस: भविष्य की दो सबसे बड़ी ताकतें
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लेखक: प्रकाश पांडेय – Author of AI Adventures Series

तकनीक की दुनिया में इस समय दो शब्द सबसे ज्यादा चर्चा में हैं - आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और क्वांटम कंप्यूटिंग।

AI पहले ही हमारे काम करने के तरीके को बदल चुका है। चैटबॉट से लेकर ऑटोमेशन, डेटा एनालिटिक्स से लेकर कंटेंट क्रिएशन तक - हर जगह इसका प्रभाव दिखाई दे रहा है।

लेकिन एक और तकनीक चुपचाप विकसित हो रही है, जो आने वाले वर्षों में AI की शक्ति को कई गुना बढ़ा सकती है। यह है - क्वांटम कंप्यूटिंग।

क्वांटम क्या है?

सरल शब्दों में, क्वांटम का अर्थ है कि प्रकृति बहुत छोटे-छोटे “पैकेट्स” में काम करती है। ऊर्जा और पदार्थ लगातार नहीं, बल्कि छोटे-छोटे हिस्सों में मौजूद होते हैं।

इसी सिद्धांत पर आधारित है Quantum mechanics — जो ब्रह्मांड के सबसे सूक्ष्म स्तर पर होने वाली घटनाओं को समझाती है।

जहां पारंपरिक कंप्यूटर “बिट” पर काम करते हैं (0 या 1), वहीं क्वांटम कंप्यूटर “क्यूबिट” पर काम करते हैं, जो 0 और 1 दोनों अवस्थाओं में एक साथ रह सकता है। इस गुण को सुपरपोजिशन कहा जाता है।

यही विशेषता क्वांटम कंप्यूटिंग को अलग बनाती है।

AI और क्वांटम का संगम

आज AI को प्रशिक्षित करने में भारी मात्रा में कंप्यूटिंग पावर और ऊर्जा लगती है। बड़े मॉडल्स को ट्रेन करने में हफ्तों और महीनों का समय लगता है।

क्वांटम कंप्यूटिंग भविष्य में इन जटिल गणनाओं को तेज और अधिक प्रभावी बना सकती है।

दुनिया की प्रमुख तकनीकी कंपनियां जैसे IBM, Google और Microsoft पहले से ही क्वांटम रिसर्च में निवेश कर रही हैं, ताकि AI और क्वांटम के संयोजन को व्यावहारिक बनाया जा सके।

विशेष रूप से निम्न क्षेत्रों में इसका बड़ा प्रभाव देखने को मिल सकता है:

दवा खोज और मॉलिक्यूलर सिमुलेशन

वित्तीय पोर्टफोलियो अनुकूलन

सप्लाई चेन मैनेजमेंट

जलवायु मॉडलिंग

साइबर सुरक्षा और एन्क्रिप्शन

जहां AI “बुद्धिमत्ता” देता है, वहीं क्वांटम “कम्प्यूटेशनल शक्ति” प्रदान कर सकता है।

वर्तमान स्थिति

हालांकि क्वांटम कंप्यूटर अभी शुरुआती चरण में हैं। हार्डवेयर सीमित है, स्थिरता एक चुनौती है, और बड़े पैमाने पर व्यावसायिक उपयोग अभी दूर है।

क्यूबिट्स अत्यंत संवेदनशील होते हैं और उन्हें नियंत्रित करने के लिए विशेष वातावरण (अत्यंत कम तापमान) की आवश्यकता होती है। त्रुटि-सुधार (Error Correction) अभी भी शोध का बड़ा विषय है।

लेकिन इतिहास बताता है कि जब भी कोई मूलभूत तकनीकी बदलाव होता है, शुरुआत धीमी होती है — और फिर अचानक गति पकड़ लेता है।

भविष्य की दिशा

भविष्य AI बनाम क्वांटम का नहीं होगा।

भविष्य AI और क्वांटम के संयोजन का होगा।

वे संगठन जो आज से इस संगम को समझना शुरू करेंगे, वही आने वाले दशक में तकनीकी नेतृत्व करेंगे।

प्रश्न यह नहीं है कि “क्या क्वांटम आएगा?”

प्रश्न यह है कि “क्या हम उसके लिए तैयार हैं?”

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