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राजनैतिक व्यंग्य-समागम

राजनैतिक व्यंग्य-समागम
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1. अधर्म का हिंदुत्व : विष्णु नागर

बांग्लादेश या पाकिस्तान में किसी हिंदू की हत्या वहां के सांप्रदायिक तत्व कर देते हैं, तो यहां के हिंदूवादियों का 'हिंदुत्व ' उर्फ ' सनातनत्व ' बड़े जोर-शोर से जाग जाता है। लगता है कि इन्हें अगर छूट मिल जाए, तो ये तलवार लेकर उनकी सीमा में दौड़ जाएं और बदला लेकर ही वापस आएं! फिर बार्डर पर इनके भाई-बहन ढोल-नगाड़े के साथ इनके माथे पर तिलक लगाकर इनका स्वागत करें। लेकिन ये जानते हैं कि एक बार वहां गए, तो फिर वहीं रह जाएंगे! वहां इनका 'शौर्य' - जिसका ये दिवस खूब जोर-शोर से यहां मनाते हैं - काम नहीं आएगा। इसलिए यहीं से शब्द-बाण छोड़कर ये काम चला लेते हैं। भारत सरकार भी यही करती है, क्योंकि भारत अभी ट्रंप का अमेरिका नहीं बना है!

थोड़ी देर के लिए मान लेते हैं कि चलो, ये किसी की तो चिंता करते हैं! बांग्लादेश और पाकिस्तान के हिंदुओं की फ़िक्र तो इन्हें है, मगर इंदौर के भागीरथपुरा में साफ पानी में गू-मूत का पानी मिलाकर लोगों को मरने के लिए छोड़ दिया जाता है, तो इनका 'हिंदुत्व' नहीं जागता, जबकि मरने वाले संयोग से सभी हिंदू थे! चार साल पहले ही पीने के पानी में गंदगी मिलने की रिपोर्ट आ चुकी थी, मगर किसी को चिंता नहीं थी! अब भी किसी को इन मौतों में हिंदू एंगल नहीं दिखा, क्योंकि इस पूरे कांड में कहीं मुसलमान नजर नहीं आए! कांग्रेस एंगल भी नहीं दिखा, क्योंकि कांग्रेस भी दृश्य में नहीं थी! जवाहर लाल नेहरू एंगल तक नहीं दिखा, जबकि इस एंगल से मोदी जी साढ़े ग्यारह साल से राज चला रहे हैं। इन मौतों के बाद न हिंदू जागा और न उसे कोई जगाने आया! आता भी कैसे, क्योंकि देश में जिनकी सरकार है, प्रदेश में भी उन्हीं की सरकार है और नगर निगम भी उन्हीं के कब्जे में है! यहां 'हिंदू' 'जाग कर' अपना टाइम क्यों खराब करता!

इनका 'हिंदुत्व' तब भी नहीं जागता, जब बलात्कारी और हत्या आरोपी आजीवन कैद की सज़ा पाए कुलदीप सिंह सेंगर को दिल्ली उच्च न्यायालय जमानत दे देता है और जब बलात्कार की शिकार लड़की और उसकी मां अपनी जान को खतरा बताते हुए इसके विरोध में इंडिया गेट पर धरना देने बैठ जाती है। पुलिस उन्हें तथा उसके समर्थन में आई महिला कार्यकर्ता को बुरी तरह घसीट कर बस में बैठाती है। तब इनका हिंदुत्व थोड़ा-सा जागा तो, मगर बलात्कारी के समर्थन में जागा। महिला पहलवानों से बदसलूकी करनेवाला ब्रजभूषण शरण सिंह का हिंदुत्व सेंगर के हक में जागा। किसी महिला और कुछ पुरुषों का भी सेंगर के समर्थन में जागा। जिस हिंदू को जगाने का आह्वान हर दिन, हर सुबह किया जाता है, वह बलात्कृता के हित में खर्राटे लेता रहा!

हत्या और बलात्कार के केस में आजीवन सजा पा चुका राम रहीम जब चाहता है या जब सरकार उसका इस्तेमाल करना चाहती है, वह पेरोल या फरलो पर बाहर आ जाता है। अभी 15 वीं बार उसे 40 दिन की पेरोल मिली। आठ साल में एक साल से भी अधिक समय तक वह जेल से बाहर रहा।

जब सरकार और भाजपा उसके साथ है, तो जेल में भी वह मस्ती ही मारता होगा! इसने जिसे मारा और जिनसे बलात्कार किया, वे सभी हिंदू थे, मगर इनका हिंदुत्व विचलित नहीं हुआ! मुंह से बोल तक नहीं फूटे! कोई प्रदर्शन, कोई जुलूस इन्होंने नहीं निकाला! एक मिनट के लिए भी इनका खून नहीं खौला! गर्मी में भी बर्फ बन जमा रहा! यहां भी कोई मुस्लिम, कोई नेहरू एंगल नहीं था। यह कहने की गुंजाइश नहीं थी कि नेहरू जी की गलती से राम रहीम ने हत्या और बलात्कार किया और नेहरू जी की वजह से ही इसे बार-बार जेल से बाहर आने का मौका मिल जाता है!

उत्तराखंड के अंकिता भंडारी हत्याकांड के मामले में एक वीवीआईपी का नाम सामने आया, जो हिंदूवादी पार्टी का है। उस इलाके की औरतें उस कथित वीवीआईपी के विरुद्ध हिम्मत से खड़ी हुईं, मगर गर्व से फूला हिंदुत्व आराम फरमाता रहा। कुंभकर्ण तो कहते हैं कि छह महीने सोता था और छह महीने जागता था। हिंदुत्व का कुंभकर्ण जब तक हिंदू-मुस्लिम न हो, सोता रहता है।करवट तक नहीं बदलता!

इस देश का यह 'हिंदू' तब भी सोया रहता है, जब एम्स से लेकर तमाम सरकारी अस्पतालों में मरीज या मरीजों के रिश्तेदार दिल्ली की कड़ाके की ठंड में रात में बाहर सोने को मजबूर होते हैं। किसी का हिंदुत्व इनकी मदद के लिए नहीं जागता, जबकि इनमें से अधिकांश हिंदू ही होंगे!

इनका हिंदुत्व कभी किसी को सच्चा न्याय दिलाने के लिए नहीं जागता, न्यायसंगत मजदूरी दिलाने के लिए नहीं जागता। इनका हिंदुत्व ट्रंप को जिताने के लिए जाग कर पूजा-पाठ, यज्ञ-हवन करने लग जाता है, मगर जब यही ट्रंप इनके हिंदू हृदय सम्राट की खिल्ली उड़ाता है, तो नहीं जागता, क्योंकि सम्राट जी हिंदुत्व को इसके लिए तकलीफ़ नहीं देना चाहते। इससे ट्रंप को खुश करने के उनके प्रयत्नों में रुकावट आ सकती है! हथकड़ी-बेड़ियों में जकड़कर जब ट्रंप भारतीयों को हमारे यहां छोड़ जाता है, तब भी यह हिंदुत्व नहीं जागता। हां, किसी बंगाली मुसलमान को घुसपैठिया घोषित करना हो तो यह उत्थिष्ठत-जागृत हो जाता है। मस्जिद और मदरसे और कब्रें गिराना हो, तो पुलिस के साथ खड़ा मिलता है। ईसाइयों की क्रिसमस की खुशियों को बर्बाद करने के लिए यह जाग जाता है। कोई उत्तर-पूर्व का हो, तो उसे विदेशी घोषित करके उसे गाली देने और उसकी जान लेने के लिए खड़ा हो जाता है। कोई मुस्लिम व्यापारी चार लोगों से रास्ता पूछे तो उसकी जान लेने के लिए जाग जाता है। ग्यारह साल की मुस्लिम लड़की से बलात्कार करने वाले का समर्थन करने के लिए जाग जाता है। जिस हिंदुत्व पर इन्हें इतना गर्व है, वह नागपुर और दिल्ली का अत्यंत आज्ञाकारी सेवक है। उसकी ध्वजा धर्म की है, मगर अधर्म के हक में खड़े रहते-रहते, न उसकी टांगें कभी दुखी, न कमर!

(कई पुरस्कारों से सम्मानित विष्णु नागर साहित्यकार और स्वतंत्र पत्रकार हैं। जनवादी लेखक संघ के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष हैं।)

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2. अब तो विश्व गुरु मान लो, भाई! : राजेंद्र शर्मा

दुनिया वालों, अब तो तुम्हें झख मारकर मानना पड़ेगा कि मोदी जी का भारत ही विश्व गुरु है! और किसी के विश्व गुरु होने का तो पहले भी कोई चांस नहीं था। कोई वास्तविक कंपटीशन तो कभी था ही नहीं। और अब, जो नयी-नयी शिक्षाएं भारत दुनिया के सामने हर रोज पेश कर रहा है, उसके बाद मोदी जी के भारत के सामने कोई और विश्व गुरु बन जाए, इसका तो सवाल ही नहीं उठता है।

हां! फिर भी अगर दुनिया बाकायदा मोदी जी को विश्व गुरु का आसन नहीं देती है, तो अपना ही नुकसान करेगी। मोदी जी का तो क्या जाता है, ये दुनिया वाले ही निगुरे रह जाएंगे। और निगुरे रह गए, तो अज्ञानी तो अपने आप रह ही जाएंगे। हमारे संतों ने तो पहले ही चेता दिया था -- बिन गुरु ज्ञान कहां से पावें!

अब प्लीज यह बचकानी मांग कोई न करे कि ये नयी-नयी शिक्षाएं क्या हैं, जिन्होंने विश्व गुरु के आसन पर मोदी जी के भारत का दावा एकदम मोहर लगाकर पक्का कर दिया है। नयी शिक्षाएं बताने से हमें हर्गिज इंकार नहीं है। कोई पूछेगा तो हम जरूर बताएंगे और छाती ठोककर बताएंगे। चीज ही बताने वाली है। बचकानी मांग सिर्फ इसलिए कहा कि नयी शिक्षाएं क्या हैं, कोई अगर उनका बखान करना भी चाहे, तो कर नहीं सकता है।

शिक्षाएं हैं ही इतनी सारी कि उनका पूरा बखान असंभव है। हरि अनंत है, सो उसकी कथा भी अनंत होगी ही। खैर! दुनिया वालों के लिए पेश करते हैं, नमूने की दो-तीन नयी शिक्षाएं कि सारी दुनिया देखे और सीखे। और मोदी जी के भारत की उदारता देखिए, कोई फीस नहीं लगायी है, न देखने पर और न सीखने पर!

पहले, सब का साथ सब का विकास की सीख। जम्मू-कश्मीर नाम के प्रदेश में, जब सारे विभाजन पट गए और लोहे के रस्सों से प्रदेश को सीधे मोदी जी की राजगद्दी के साथ बांध दिया गया, तब जो विकास की सुनामी आयी, उसमें जम्मू के वैष्णो देवी ट्रस्ट के हिस्से में एक यूनिवर्सिटी आ गयी और यूनिवर्सिटी के हिस्से में पचास सीटों का एक मेडिकल कालेज आ गया। मेडिकल कॉलेज और अस्पताल चल भी पड़ा। मेडिकल कालेज का पहला साल ठीक-ठाक गुजर भी गया। पर जब दूसरे साल के एडमिशन का समय आया और नीट की अखिल भारतीय परीक्षा में मैरिट के आधार पर दाखिले के योग्य पाए गए छात्रों की सूची आयी, तो वैसे भी हमेशा खतरे में रहने वाला सनातन एकदम खतरे में पड़ गया। पचास में से कुल 7 उम्मीदवार हिंदू, जबकि 42 मुसलमान और एक सिख।

सत्य सनातन का अपमान, अब क्यों सहेगा भारत महान! मोदी जी की पार्टी समेत, उनके विचार परिवार के तमाम संगठन आंदोलित हो उठे। विचार परिवार आंदोलित हुआ, तो मीडिया आंदोलित हुआ। मीडिया भी आंदोलित हुआ, तो सरकार विचलित हुई। डबल इंजन वाली सिचुएशन नहीं थी, सो पहले एलजी विचलित हुआ। एलजी विचलित हुआ, तो उसका कंपन दिल्ली के तख्त तक पहुंचा। पर एक समस्या थी। विचार परिवार की बोली में दिल्ली की सरकार कैसे कहे कि जिस कॉलेज के नाम में वैष्णो देवी लगा है, उसमें मुसलमान ज्यादा भर्ती नहीं हो सकते। यह तो एडमीशन जिहाद हो जाएगा। तब विश्व गुरु ने अपना कटोरा दांव लगाया। दिल्ली ने इशारा किया और मेडीकल कालेज ही वर्तमान से भूतपूर्व हो गया। जब बांस ही नहीं रहा, तो बांसुरी कैसे बजती। न सरकार ने एडमीशन की प्रक्रिया में हस्तक्षेप किया, न मुसलमानों के खिलाफ कोई एक्शन हुआ और सनातनियों का जीत का जश्न भी मन गया। माता वैष्णो देवी के नाम की पवित्रता की रक्षा भी हो गयी और सर्वधर्म समभाव को कोई शिकायत करने का भी मौका नहीं मिला। और यह सब हुआ सिर्फ एक मेडिकल कालेज की छोटी-सी कुर्बानी से! है और कोई दुनिया को ऐसी अद्भुत सीख देने वाला!

उसके बाद, ज्ञान-विज्ञान को हमेशा आगे रखने की सीख। मध्य प्रदेश में जबलपुर में नानाजी देशमुख के नाम से एक वैटनरी साइंस यूनिवर्सिटी खुली। नानाजी संघ विचार परिवार के, तो यूनिवर्सिटी का ज्ञान-विज्ञान भी विचार परिवार का। उस पर गोरक्षा से प्राचीन संस्कृति तथा परंपरा तक की रक्षा का जोश। सनातनी वैज्ञानिकों ने शोध की एकदम नयी दिशा में क्रांतिकारी कदम बढ़ा दिए। गाय के गोबर और गोमूत्र से कैंसर की दवा बनाने का शोध। शोध के मैदान में विचार परिवार का पहलवान, तो विचार परिवार की सरकार मेहरबान। गोबर और गोमूत्र से कैंसर की दवा के शोध के लिए साढ़े तीन करोड़ रुपए का फंड मिल गया। शोध के क्रम में जहां पौने दो करोड़ रुपए गोबर और गोमूत्र पर खर्च किए गए, वहीं करीब पच्चीस लाख गाड़ी की खरीद पर और बाकी डेढ़ करोड़ गोवा के दौरों पर। शोधकर्ताओं ने गोवा के 23-24 दौरे किए। आखिर, गोवा के नाम में भी तो गो आता ही है। इस कनेक्शन पर गहन शोध जरूरी था, सो हुआ। क्या हुआ कि कैंसर की दवा नहीं बन पायी, पर गोबर, गोमूत्र के साथ गोवा का कनैक्शन तो पूरी तरह से साबित हो गया। है दुनिया में कोई और, जो ऐसे-ऐसे मोर्चों पर विज्ञान को आगे रखने की प्रेरणा दे सकता हो?

और हर स्ट्रोक को मास्टर स्ट्रोक बनाने की सीख! नमस्ते ट्रंप का ईवेंट किया, मास्टर स्ट्रोक। ट्रंप-2.0 के लिए चुनाव प्रचार नहीं किया, वह भी मास्टर स्ट्रोक। ट्रंप ने बार-बार, बार-बार, व्यापार की गाजर दिखा कर ऑपरेशन सिंगूर रुकवाने का दावा किया और मोदी जी ने एक शब्द नहीं कहा, मास्टर स्ट्रोक। बाद में विदेश मंत्रालय के मंझले अधिकारियों से खंडन कराया, वह भी मास्टर स्ट्रोक। यह प्रचार कराया कि मोदी जी ट्रंप का फोन उठा ही नहीं रहे, मास्टर स्ट्रोक। अब ट्रेड डील अपनी अकड़ से बिगड़वाने के इल्जाम के जवाब में, ट्रंप को आठ बार फोन करने का ब्यौरा दे रहे हैं, वह भी मास्टर स्ट्रोक। गज़ा पर इस्राइल की तरफ ज्यादा, मास्टर स्ट्रोक। वेनेजुएला पर चुप, वह भी मास्टर स्ट्रोक। कहां मिलेगा कोई और ऐसा, मास्टर आफ मास्टर स्ट्रोक!

अंत में सिर्फ एक चिंता! इससे पहले कि ट्रंप का ध्यान विश्व शांति नोबेल से हटकर, विश्व गुरु के आसन की ओर खिंच आए, मोदी जी को जल्दी से भारत के लिए विश्व गुरु का आसन नक्की करा लेना चाहिए। वर्ना कहीं ऐसा न हो कि ट्रंप विश्व गुरु की दावेदारी की लाइन में भी लग जाए और शांति के नोबेल की तरह, भारत को विश्व गुरु की लाइन से भी बाहर होना पड़ जाए। आखिर, पाकिस्तान के साथ लड़ाई यकायक रोकने के लिए, शांति का नोबेल तो हमारा भी बनता ही था।

(लेखक वरिष्ठ पत्रकार और 'लोकलहर' के संपादक हैं।)

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