Janta Ki Awaz
लेख

राजनैतिक व्यंग्य-समागम

राजनैतिक व्यंग्य-समागम
X

1. अच्छा लड़का धरमेन्दर : विष्णु नागर

धरमेन्दर एक अच्छा लड़का है। इतना अच्छा लड़का है कि उसे भी लगता है कि वह बहुत ही अच्छा लड़का है।उसकी दुआ है कि हर मां-बाप को उस जैसी संतान हो।वह हर लड़के को देखकर मन ही मन तुलना करता है कि यह मेरे जैसा अच्छा लड़का है या नहीं है और हर बार वह यह जानकर खुश हो जाता है कि उसके जैसा अच्छा लड़का कोई हो ही नहीं सकता। वह सोचता तो यह भी है कि उसके जैसा लड़का ही क्या, लड़की भी शायद ही कोई इस दुनिया में हो, मगर इस बारे में वह निश्चय नहीं कर पाता, क्योंकि लड़कियां उसे बहुत अच्छी लगती हैं। हो सकता है, उनमें उस जैसी कोई पूरी तरह नहीं तो 80 प्रतिशत हो, मगर उस जैसी सौ-फीसदी अच्छी तो कोई हो ही नहीं सकती! वह सुरक्षित है।

वह हर दिन अपनी मम्मी से पूछता है कि मम्मी मैं एक अच्छा लड़का हूं न! मां कहती हैं, हां मेरे लाल, तेरे जैसा अच्छा लड़का, दुनिया में कोई नहीं। मैं भी नहीं, तेरे पापा भी नहीं, कोई और भी नहीं। भगवान भी नहीं। वह पिता से पूछता है, तो वो भी कहते हैं, हां, मेरे बेटे जैसा कोई नहीं। इससे वह और अधिक खुश हो जाता है। किसी दिन उसके पापा कह देते हैं कि रोज क्या पूछता रहता है बेवकूफ। अपनी रोज तारीफ करवाना अच्छी बात नहीं है।तो वह थोड़ी देर के लिए हताश हो जाता है। वह सोचता है, पापा मुझसे जलते हैं। बस मां है, जो मुझसे जलती नही!

उसकी मम्मी, उसके पापा को अलग ले जाकर कहती है कि बेचारे का दिल क्यों तोड़ते हो, कह दो, अच्छा लड़का है। खुश हो जाएगा बच्चा। तो वह कह देते हैं। एक दिन उन्होंने कहा कि हमसे तो रोज पूछते हो, मगर तुम ये तो कभी नहीं कहते कि पापा, आप बहुत अच्छे हो, मम्मी, तुम बहुत अच्छी हो। वह सोच में पड़ गया। मजबूरी में कह तो दिया कि आप दोनों बहुत अच्छे हो, मगर वह जानता था कि वही सबसे अच्छा है। मां -बाप में वह बात कहां, जो उसमें है!

धरमेन्दर के घर में रोज किसी नरेन्दर की तारीफ़ होती रहती थी। रोज शाम को कोई आ जाता और नरेन्दर की तारीफ शुरू हो जाती। उस दौरान कोई ग़लती से भी धरमेन्दर की तारीफ नहीं करता था‌। धरमेन्दर को इसका बहुत बुरा लगता। उससे अच्छा भी इस दुनिया में कोई हो सकता है? पता चला, यह वही नरेन्दर है, जो रोज अखबार में आता है, टीवी में भेस बदल -बदल कर छाता है। सड़क पर जिसका फोटो टंगा मिलता है।

एक दिन धर्मेन्दर ने अपने पापा से पूछा, पापा, क्या ये नरेन्दर, मुझसे भी अच्छा है? पापा ने मुस्कुराते हुए कहा, जाओ, बेटा खेलो। इसके आगे कुछ नहीं कहा। धरमेन्दर ने सोचा, जरूर नरेन्दर मुझसे अच्छा है। अब नरेन्दर, धरमेन्दर का आदर्श बन गया। उसका लक्ष्य अब नरेन्दर बनना था।

धरमेन्दर को अब जहां भी नरेन्दर की तस्वीर दिख जाती, उसके वह हाथ जोड़ना नहीं भूलता। एक बार साइकिल से जा रहा था, तो उसे नरेन्दर की तस्वीर दिख गई। उसे ध्यान नहीं रहा और दोनों हाथ छोड़कर हाथ जोड़ने के चक्कर में अपने हाथ-पैर तुड़ा बैठा। इससे उसकी नरेन्दर के प्रति श्रद्धा और बढ़ गई। वह नरेन्दर का नाम जहां सुनता, वहां श्रद्धा से उसका सिर झुक जाता। उसकी आवाज़ सुनता, तो सब काम छोड़कर उसकी वाणी का आनंद लेने लगता। स्कूल में भी नरेन्दर-नरेन्दर का जाप करता। वह नरेन्दर की तरह बोलता। नरेन्दर की तरह बादलों को, पेड़ों को, हवा को टाटा किया करता। उसके सब साथी उससे ऊबने लगे थे। उसे चिढ़ाने लगे थे। धरमेन्दर को पागल समझने लगे थे। साथी, जितना उसे पागल समझते, उतना ही उसका नरेन्दर बनने का संकल्प मजबूत होता जाता था।

वह बिना टिकट एक दिन दिल्ली पहुंच गया। लोक कल्याण मार्ग पर उसे बार बार चक्कर लगाता देख पुलिस ने उसे पकड़ लिया। फिलहाल वह जेल में हैं। वहां उससे पूछताछ जारी है। वहां भी वह नरेन्दर -नरेन्दर का अहर्निश जाप किया करता है। उसे उम्मीद है कि एक दिन नरेन्दर खुद आएंगे। जेल से उसे छुड़ाकर ले जाएंगे और अपनी भक्ति का आदर्श बताते हुए उसे युवाओं के सामने पेश करेंगे। उस दिन तालियों की गड़गड़ाहट से दुनिया का आकाश गूंज जाएगा। नरेन्दर को भी एक दिन सब भूल जाएंगे। सब धरमेन्दर -धरमेन्दर करेंगे।

(कई पुरस्कारों से सम्मानित विष्णु नागर साहित्यकार और स्वतंत्र पत्रकार हैं। जनवादी लेखक संघ के उपाध्यक्ष हैं।)

****

2. 2026 : हिंदू राष्ट्र आ रहा है... आ ही गया, कोई शक! : राजेंद्र शर्मा

साल का आखिरी दिन था। रात आठ बजे थे। देश के सारे टेलीविजनों पर अचानक एक अति, परम, घनघोर विशेष प्रसारण शुरू हो गया। राष्ट्र के नाम संदेश। किस का संदेश? और किस का, सर्वोच्च नेता का संदेश!

मेरे प्यारे परिवारी जनों,

नव वर्ष की पूर्व-संध्या में मैं आप सब को अपनी हार्दिक शुभकामनाएं देता हूं और आपके तथा राष्ट्र के मंगल की कामना करता हूं। आप कहेंगे, बस इतना? इसी के लिए राष्ट्र के नाम संबोधन, वह भी रात आठ बजे वाला? अपने परिवारी जनों का यही अति-आकांक्षी होना मुझे सबसे ज्यादा पसंद है! जो है, हमेशा उससे ज्यादा की आकांक्षा करना। और तो और मुफ्त की रेवड़ियां भी मिल रही हों, तो भी मेरे देशवासियों को एक्स्ट्रा चाहिए।

सुना है कि बिहार में खातों में दस हजार पहुंचने के बाद, जीविका दीदियां अब नीतीश बाबू से दो लाख की उम्मीद ही नहीं, बाकायदा मांग कर रही हैं। मध्य प्रदेश में तो तीन हजार का वादा पूरा नहीं हुआ तो लाडली बहनाएं, लड़ाकी बहनाएं ही बन गयीं ; बेचारे अमित शाह को काले झंडे दिखाने पर उतर आयीं। मेरे देश के नौजवान तो इतने आकांक्षी हैं, इतने आकांक्षी हैं कि उनके बल पर हम राष्ट्र को तेज रफ्तार नहीं, तूफानी उड़ान देने जा रहे हैं। मस्जिदों के आगे नाचने-गाने का, गिरजों में तोड़फोड़ मचाने का, कभी गोरक्षा, तो कभी बांग्लादेशी भगाओ के नाम पर लिंचिंग का रोजगार मिला हुआ है और इसमें बोदी-बोदी करना भी जोड़ दें तो, लगभग फुल टाइम रोजगार मिला हुआ है। फिर भी मेरे नौजवान आए दिन नौकरी नहीं, तो भर्ती परीक्षा के रिजल्ट की मांग को लेकर सड़कों पर उतर आते हैं और कभी लखनऊ तो कभी पटना, कभी भोपाल तो, कभी दिल्ली में लाठियां खाकर ही वापस जाते हैं। पर लाठियां खाने के बाद मेरे भाई और भी जोर से बोदी-बोदी चिल्लाते हैं!

मेरे प्यारे बहनों, भाईयों,

आपका यह बेटा, आज आपको सचमुच की शुभकामना देने आया है। आपका यह भाई आपका नया वर्ष सचमुच शुभ बनाने आया है। आपका यह प्रधान सेवक आपको एक बहुत बड़ा गिफ्ट देने आया है। सचमुच बड़ी खुशखबरी। एक खुशखबरी, जिसका हम और आप सब, एक हजार साल से ज्यादा से इंतजार कर रहे थे। बेशक, राम मंदिर की खुशखबरी का भी आपने एक हजार साल इंतजार किया था। वह पल वाकई युग परिवर्तन का पल था, जब हजारों वर्ष के वनवास के बाद, प्रभु श्रीराम की अयोध्या वापसी हुई थी। आप सब के आशीर्वाद से आपके इस सेवक को इधर-उधर भटकते रामलला को उंगली पकड़ाकर, अयोध्या में उनके नये आवास में पहुंचाने का सौभाग्य प्राप्त हुआ था। पर वह खुशखबरी तो आपका यह सेवक आपको दो साल पहले ही दे चुका था। उसके बाद हुए चुनाव में तो आप खुशी से ऐसे मगन हुए, ऐसे मगन हुए कि, चुनाव में अपने इस सेवक के निशान पर बटन दबाना तक भूल गए। रामलला आए के साथ, रामभक्त वनवास पर धाए की तुक मिलते-मिलते रह गयी। खैर, वे सब बातें तो पुरानी पड़ चुकीं। और तो और मंदिर पर धर्म ध्वजा फहराने की खुशखबरी भी पुरानी पड़ चुकी। मैं आपके लिए एकदम नयी खुशखबरी लाया हूं। नया साल, नयी खुशखबरी। 2026, नया गिफ्ट!

बहनों, भाईयों,

31 दिसंबर की रात को आप सोएंगे धर्मनिरपेक्ष भारत में, और 1 जनवरी की सुबह आप जागेंगे, हिंदू राष्ट्र में। न धर्मनिरपेक्ष, न समाजवादी, जनतांत्रिक, संघात्मक वगैरह कुछ भी नहीं, बस खालिस हिंदू राष्ट्र। मुझे पता है कि आप में बहुत से तो नये साल को लाने के बाद ही सोने जाएंगे। आप इस बार नये साल के साथ एक नये भारत का स्वागत करेंगे -- हिंदू भारत। माने भारत हिंदू तो पहले से ही था, हमेशा से। इसीलिए, तो सनातन को सनातन कहते हैं। पर बीच में हिंदू भारत कहीं खो- सा गया था। वैसे ही जैसे रामलला खो-से गए थे। और आप का जो बोदी राम को लाया है, वही बोदी हिंदू राष्ट्र को लाएगा। दो साल पहले राम जी की वापसी। अब हिंदू राष्ट्र की वापसी। आप देख लीजिएगा यह बोदी एक-एक कर हर उस चीज को वापस लाएगा, जो एक हजार सालों में या उससे भी ज्यादा में कहीं खो-सी गयी थी। चतुर्वर्ण व्यवस्था भी। ब्राह्मण की सर्वोच्चता और शूद्र की नीचाई भी। औरतों को अनुशासन में रखने की पुख्ता व्यवस्था भी। जरूरत पड़ी तो, सती प्रथा भी। बस आप अपना आशीर्वाद बनाए रखिएगा। और हां! चुनाव में वोट भी देते रहिएगा। ऐसा नहीं हो कि इस बार की तरह, फिर से इतने ज्यादा खुश हो जाएं, कि अपने प्रधान सेवक को वोट देना ही भूल जाएं। आप तो समझते ही हैं, वोट नहीं मिलेगा, तो आपके सेवक को आपकी सेवा करते रहने का मौका कैसे मिलेगा? क्या कहा दूसरे तरीकों से! पर भारत को पहले वहां तक पहुंचने तो दीजिए।

बहनों, भाईयों,

यह मत भूलना कि राम लला की वापसी हो या हिंदू राष्ट्र की, कोई भी वापसी आसान नहीं थी। आपके आशीर्वाद से कामयाबी मिली जरूर है, पर इसके लिए आपके इस सेवक को बहुत संघर्ष करना पड़ा है। अठारह-अठारह घंटे काम करना पड़ा है। देश-दुनिया में लगातार भटकना पड़ा है। हर वक्त चुनावी मुद्रा में रहना पड़ा है। और बहुत बार तो विरोधियों तो विरोधियों, अपनों के विरोध का भी गरल पीना पड़ा है। पर बाबा विश्वनाथ की कृपा से, अपका यह सेवक भी नीलकंठ बनकर सारा विष पी गया है और हिंदू राष्ट्र खींचकर लाने वालों को अमृत का कलश मिल गया है। तभी तो विरोधी तो विरोधी, संविधान, अदालतें, मीडिया कोई कुछ नहीं कर पाया, और हिंदू राष्ट्र बनता चला गया। और अब वह घड़ी आ गयी है जब मां भारती का यह बेटा, गर्व के साथ यह घोषणा कर सकता है कि 2025 के साथ, पुराने भारत का अंत हो रहा है और 2026 की भोर की किरणों के साथ, यह विश्व एक नये राष्ट्र का उदय देखेगा -- हिंदू राष्ट्र का।

बहनों, भाईयों,

आपके इस सेवक की भी हार्दिक इच्छा थी कि 2025 के आखिरी दिन और 2026 के पहले दिन की मध्य रात्रि में, संसद का विशेष सत्र होता और उसमें हिंदू राष्ट्र के जन्म की घोषणा की जाती। मौके के लिए उपयुक्त भाषण भी तैयार ही था। पर नेहरू जी ने नजर लगा दी। पता नहीं कैसे यह अफवाह फैल गयी कि हू-ब-हू 15 अगस्त 1947 के नेहरू की नकल करने की तैयारी है। पुराने साल के साथ नेहरू का भारत जा रहा था और बोदी का भारत आ रहा था, फिर भी नेहरू की नकल का इल्जाम! साहित्यिक चोरी का इल्जाम यह बोदी कभी बर्दाश्त नहीं करेगा। मैंने भी कहा सब कैंसल। बस रात 8 बजे का प्रसारण होगा और होगा हिंदू राष्ट्र का एलान। बोदी की गारंटी है, 2026 आएगा, हिंदू राष्ट्र लाएगा। जय भारत, जय हिंदू राष्ट्र!

(2026 आया, पर हिंदू राष्ट्र साथ में नहीं आया। सरकार ने हिंदू राष्ट्र की घोषणा का साफ खंडन कर दिया। कहा कि जब खुद भागवत ने कह दिया है कि हिंदू राष्ट्र की घोषणा नहीं भी हो, तो फर्क नहीं पड़ेगा, फिर फोदी हिंदू राष्ट्र की घोषणा क्यों करेंगे? रात 8 बजे वाला प्रसारण ही नहीं हुआ। नफो चैनल, प्रसारण समेत डिजिटल अंधेरे में गायब हो गया।)

(लेखक वरिष्ठ पत्रकार और 'लोकलहर' के संपादक हैं।)

Next Story
Share it