Home > राज्य > उत्तर प्रदेश > दलितों को पुजारी बनाने का विरोध, ब्राम्हण बोले- यूपी चुनाव में खामियाजा भुगतेगी बीजेपी
दलितों को पुजारी बनाने का विरोध, ब्राम्हण बोले- यूपी चुनाव में खामियाजा भुगतेगी बीजेपी
मध्यप्रदेश के मंडला में ब्राम्हण समाज ने एक विशाल रैली निकालकर विरोध प्रदर्शन किया गया. समाज सरकार के उस फैसले से आहत है, जिसमें दलितों को पुजारी बनाने और सरकारी खर्च पर उन्हें प्रशिक्षण देने की नीति बनाई है.
इस रैली के जरिए ब्राम्हण समाज ने राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपकर उनसे मध्यप्रदेश सरकार के इस निर्णय को बदलने में हस्तक्षेप करने की मांग की.
जिले के मंडला में ब्राम्हण समाज की विशाल रैली प्रदेश में शिवराज सरकार के खिलाफ खुली वैचारिक जंग का ऐलान है. पुरातन काल से पुजारी के दायित्वों का निर्वहन कर रहे ब्राम्हण शिवराज सरकार के एक फैसले से काफी आहत हैं.
प्रदेश सरकार ने हाल ही में दलितों को पुजारी बनाने और सरकारी खर्च पर उन्हें प्रशिक्षण देने की नीति बनाई है. ब्राम्हण समाज ने सरकार से इस निर्णय को तत्काल रद्द करने की मांग की है.
ब्राम्हण समाज का कहना है कि, वे सनातन धर्म की व्यवस्था के अनुरूप पीढ़ियों से पुजारी रहे हैं. पुजारी का दायित्व ब्राम्हण के लिए सम्मान के साथ-साथ जीविकोपार्जन का साधन भी है. ब्राम्हण समाज को हैरत इस बात की है कि प्रदेश के मुखिया शिवराज खुद एक ब्राम्हण से दीक्षा लेने के बावजूद ब्राम्हण विरोधी फैसला कैसे ले सकते हैं.
मंडला के पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष अन्ना महाराज ने इसे एक विकृत राजनीति का हिस्सा बताया है. उनका कहना है कि गुलामी के दौर में भी कभी किसी ने समाज और धर्म के विरुद्ध कोई फैसला नहीं किया. प्रदेश सरकार ने अपने इस फैसले से दो समाज को बांटने का काम किया है, जिसका खामियाजा ब्राह्मण बाहुल्य उत्तरप्रदेश के चुनाव में भाजपा को उठाना पड़ सकता है.
इस रैली के जरिए ब्राम्हण समाज ने राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपकर उनसे मध्यप्रदेश सरकार के इस निर्णय को बदलने में हस्तक्षेप करने की मांग की.
जिले के मंडला में ब्राम्हण समाज की विशाल रैली प्रदेश में शिवराज सरकार के खिलाफ खुली वैचारिक जंग का ऐलान है. पुरातन काल से पुजारी के दायित्वों का निर्वहन कर रहे ब्राम्हण शिवराज सरकार के एक फैसले से काफी आहत हैं.
प्रदेश सरकार ने हाल ही में दलितों को पुजारी बनाने और सरकारी खर्च पर उन्हें प्रशिक्षण देने की नीति बनाई है. ब्राम्हण समाज ने सरकार से इस निर्णय को तत्काल रद्द करने की मांग की है.
ब्राम्हण समाज का कहना है कि, वे सनातन धर्म की व्यवस्था के अनुरूप पीढ़ियों से पुजारी रहे हैं. पुजारी का दायित्व ब्राम्हण के लिए सम्मान के साथ-साथ जीविकोपार्जन का साधन भी है. ब्राम्हण समाज को हैरत इस बात की है कि प्रदेश के मुखिया शिवराज खुद एक ब्राम्हण से दीक्षा लेने के बावजूद ब्राम्हण विरोधी फैसला कैसे ले सकते हैं.
मंडला के पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष अन्ना महाराज ने इसे एक विकृत राजनीति का हिस्सा बताया है. उनका कहना है कि गुलामी के दौर में भी कभी किसी ने समाज और धर्म के विरुद्ध कोई फैसला नहीं किया. प्रदेश सरकार ने अपने इस फैसले से दो समाज को बांटने का काम किया है, जिसका खामियाजा ब्राह्मण बाहुल्य उत्तरप्रदेश के चुनाव में भाजपा को उठाना पड़ सकता है.
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