भाजपा अपने चाल, चरित्र व चेहरे से हमेशा ही जातिवादी रही
लखनऊ. बसपा की राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने हरियाणा के भाजपा शासित राज्य में बसपा के संस्थापक और बहुजन नायक कांशीराम की प्रतिमा को तोड़ने की घटना की तीव्र निन्दा की है. उन्होंने इस घटना के लिये हरियाणा सरकार से दोषी लोगों के खिलाफ सख़्त कानूनी कार्रवाई की माँग करते हुये कहा कि एक तरफ तो बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर के निधन के बाद उनके मानवतावादी मूवमेन्ट को गति प्रदान करने वाले कांशीराम की प्रतिमा को तोड़ने का घिनौना काम किया जाता है तो वहीं दूसरी तरफ यहाँ भाजपा के अध्यक्ष अमित शाह एक ओ.बी.सी. समाज के व्यक्ति के घर कुछ दलितों के साथ खाना खाने का वैसा ही नाटक करते हैं जैसा कांग्रेस पार्टी के युवराज ख़ासकर बी.एस.पी. के शासन के दौरान उत्तर प्रदेश में किया करते थे.
उन्होंने कहा कि इसके साथ ही दलितों के संवैधानिक व कानूनी अधिकारों को छीनने व बाबा साहेब की स्मृति से जुड़े कुछ स्थानों पर बड़ी बेदिली व काफी अधूरे मन से स्मारक व संग्रहालय आदि बनाने, तथा उनके साथ स्नान करने एवं भोजन आदि करने की भी किस्म-किस्म की नाटकबाज़ी की जा रही है. यह सब केवल सस्ती लोकप्रियता हासिल करने व उनका यथासम्भव चुनावी लाभ प्राप्त करने के स्वार्थ की ख़ातिर ही हो रहा है. वर्ना इनकी अगर नीयत साफ होती तो सबसे पहले ये लोग दलितों के प्रति अपनी हीन व जातिवादी भावना को त्यागने का काम करते, इनकी रोज़ी-रोटी से जुड़ी समस्याओं को हल करते व इनके ख़ाली पड़े हजारों आरक्षित सरकारी पदों पर भर्ती सुनिश्चित करके, रोजगार देते तथा इनके प्रति असम्मान व शोषण करने वाले लोगों को सख़्त सजा देते. परन्तु ‘‘रोहित वेमुला’’ के साथ भाजपा सरकार के वरिष्ठ मंत्रियों तक का बर्ताव भी कितना ज़्यादा अपमान करने वाला क्रूर व ज़ालिम रहा है, यह पूरे देश ने देखा है, जिस कारण उस दलित छात्र को अन्ततः आत्महत्या करने को मजबूर होना पड़ा.
दलितों के साथ-साथ किसानों व अन्य पिछड़ों के मामले में भी भाजपा व इनकी सरकारों का रवैया वैसा ही क्रूर व शोषणकारी है. भाजपा अध्यक्ष अमित शाह को दलितों के साथ परन्तु इन्हें दूर बैठाकर भोजन करने के बाद इलाहाबाद में पिछड़े वर्ग से जुड़े कुर्मी समाज के ’सरदार पटेल किसान महारैली’, में भाग लेने का नाटक किया.
आज यहाँ जारी एक बयान में मायावती ने कहा कि भाजपा आज से नहीं बल्कि जनसंघ के समय से ही अपने चाल, चरित्र व चेहरे से हमेशा ही जातिवादी प्रवृत्ति की रही है और इनकी दलित-विरोधी मानसिकता के कारण ही यहाँ दलित व पिछड़े समाज के लोगों को अपूर्णीय क्षति झेलनी पड़ी है. आज भी इसी की मानसिकता के कारण दलितों को आत्म-सम्मान व स्वाभिमान से जीने का हक़ खासकर भाजपा शासित राज्यों में नहीं दिया जा रहा है. उनको मिलने वाले ’’आरक्षण’’ के संवैधानिक हक से भी वंचित रखा जा रहा है. इतना ही नहीं बल्कि अब तो, आरक्षण की व्यवस्था को समाप्त करने की ही साजि़श की जा रही है. भाजपा ने कांग्रेस के साथ मिलकर, आरक्षण की क़ानूनी व्यवस्था को पहले ही काफी निष्क्रिय व निष्प्रभावी बना दिया है, जिस कारण सरकारी नौकरियों में अब इनकी संख्या लगातार कम होती जा रही है.
उन्होंने कहा कि इसके साथ ही दलितों के संवैधानिक व कानूनी अधिकारों को छीनने व बाबा साहेब की स्मृति से जुड़े कुछ स्थानों पर बड़ी बेदिली व काफी अधूरे मन से स्मारक व संग्रहालय आदि बनाने, तथा उनके साथ स्नान करने एवं भोजन आदि करने की भी किस्म-किस्म की नाटकबाज़ी की जा रही है. यह सब केवल सस्ती लोकप्रियता हासिल करने व उनका यथासम्भव चुनावी लाभ प्राप्त करने के स्वार्थ की ख़ातिर ही हो रहा है. वर्ना इनकी अगर नीयत साफ होती तो सबसे पहले ये लोग दलितों के प्रति अपनी हीन व जातिवादी भावना को त्यागने का काम करते, इनकी रोज़ी-रोटी से जुड़ी समस्याओं को हल करते व इनके ख़ाली पड़े हजारों आरक्षित सरकारी पदों पर भर्ती सुनिश्चित करके, रोजगार देते तथा इनके प्रति असम्मान व शोषण करने वाले लोगों को सख़्त सजा देते. परन्तु ‘‘रोहित वेमुला’’ के साथ भाजपा सरकार के वरिष्ठ मंत्रियों तक का बर्ताव भी कितना ज़्यादा अपमान करने वाला क्रूर व ज़ालिम रहा है, यह पूरे देश ने देखा है, जिस कारण उस दलित छात्र को अन्ततः आत्महत्या करने को मजबूर होना पड़ा.
दलितों के साथ-साथ किसानों व अन्य पिछड़ों के मामले में भी भाजपा व इनकी सरकारों का रवैया वैसा ही क्रूर व शोषणकारी है. भाजपा अध्यक्ष अमित शाह को दलितों के साथ परन्तु इन्हें दूर बैठाकर भोजन करने के बाद इलाहाबाद में पिछड़े वर्ग से जुड़े कुर्मी समाज के ’सरदार पटेल किसान महारैली’, में भाग लेने का नाटक किया.
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