उपचुनाव में भी गठबंधन के सहारे हैं अखिलेश यादव!

उपचुनाव में भी गठबंधन के सहारे हैं अखिलेश यादव!

उत्तर प्रदेश में 13 विधानसभा सीटों पर नवम्बर में होने वाले उपचुनाव के लिए सभी पार्टियां तैयारी में जुट गई हैं. इसी क्रम में अब समाजवादी पार्टी भी एक्शन मोड में आ गई है. माना जा रहा है कि गोरखपुर और फूलपुर लोकसभा उपचुनाव की तरह ही इस बार भी अखिलेश यादव छोटी पार्टियों के साथ गठबंधन कर मैदान में उतरने की कोशिश में हैं. सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के ओम प्रकाश राजभर से अखिलेश यादव की मुलाकात को इसी से जोड़कर देखा जा रहा है. बता दें बहराइच की बलहा और अंबेडकर नगर की जलालपुर सीट पर राजभर वोट बैंक ठीक-ठाक है और दोनों ही पार्टियों के साथ आने से इन्हें लाभ मिलने की उम्मीद है.

दरअसल योगी सरकार में मंत्री रह चुके सुभासपा के अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर ने शुक्रवार को लखनऊ में समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव से मुलाकात की. सपा मुख्यालय पर दोनों नेताओं के बीच करीब एक घंटे बातचीत हुई, जिसके बाद गठबंधन को लेकर अटकलों का बाजार गर्म है. कयास लगाए जा रहे हैं कि दोनों नेताओं के बीच मुलाकात सूबे में होने वाले आगामी उपचुनाव में गठबंधन को लेकर हुई है.

भाजपा और प्रदेश सरकार के खिलाफ लगातार बयान देने वाले ओमप्रकाश राजभर को लोकसभा चुनाव के बाद योगी आदित्यनाथ मंत्रिमंडल से बर्खास्त कर दिया गया था. योगी सरकार में अनिल राजभर को प्रमोट कर योगी मंत्रिमंडल में कैबिनेट मंत्री बना दिया गया है. इसे कहीं न कहीं ओम प्रकाश राजभर की कमी भरने और राजभर वोटबैंक पर सेंध लगाने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है. उधर ओमप्रकाश राजभर ने समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष से आगे की रणनीति पर चर्चा की ताकि अपने राजभर वोट में सेंध लगने से रोका जा सके.

ओम प्रकाश राजभर की ये है रणनीति

दरअसल, लोकसभा चुनाव के दौरान बीजेपी से गठबंधन तोड़ने वाले ओमप्रकाश राजभर सूबे की 13 सीटों पर होने वाले उपचुनाव में 2 सीटों पर निशाना साधे हुए हैं. राजभर कह चुके हैं कि वो अम्बेडकरनगर की जलालपुर और बहराइच की बलहा सीट से प्रत्याशी मैदान में उतारेंगे. अब इस मुलाकात को उसी कोशिश से जोड़कर देखा जा रहा है. बीजेपी गठबंधन के सहारे राजभर ने 2017 के यूपी विधानसभा चुनाव में 4 सीटें जीती थीं. अब सपा से गठबंधन उनके लिए उपचुनाव में बेहतर प्रदर्शन की ख्वाहिश पूरी कर सकता है.

संगठन में बड़े बदलाव में जुटे अखिलेश यादव

वहीं बात अगर अखिलेश यादव की करें. तो दो दशकों में समाजवादी पार्टी इतनी कमजोर कभी नहीं दिखी. यूपी विधानसभा में पार्टी की सीटें तो कम हुई हैं, कई नेताओं के पाला बदलने से राज्यसभा में भी उसकी स्थिति बेहद कमजोर हो चुकी है. पार्टी के दिग्गज धर्मेंद्र यादव, डिंपल यादव, अक्षय यादव चुनाव हार चुके हैं. ऐसे में अखिलेश यादव पर लगातार पार्टी को संगठन से लेकर चुनाव में खड़ा करने का भारी दबाव है. शुक्रवार को ही अखिलेश ने संगठन में बड़े बदलाव की ओर इशारा करते हुए पार्टी की सभी कार्यकारिणी भंग कर दी. वहीं शुक्रवार को ही ओम प्रकाश राजभर से अखिलेश की मुलाकात उनकी चुनावी रणनीति की ओर इशारा कर रही है.

लोकसभा उपचुनाव में सपा ने छोटे दलों से गठबंधन की रणनीति

दरअसल, गोरखपुर और फूलपुर लोकसभा उपचुनाव में अखिलेश ने इसी रणनीति के तहत छोटे दलों से गठबंधन किया. उन्होंने निषाद पार्टी और पीस पार्टी से गठबंधन कर सपा के सिंबल पर प्रत्याशी उतारे. उस उपचुनाव में बसपा ने भी ऐन वक्त सपा प्रत्याशी को समर्थन दे दिया और जीत गठबंधन प्रत्याशी की हुई. इसके बाद सपा-बसपा गठबंधन ने कैराना उपचुनाव में भी जीत का परचम लहराया. लेकिन 2019 के लोकसभा चुनाव में ये गठबंधन धराशायी हो गया और अब बसपा ने भी सपा से किनारा कर लिया है. माना जा रहा है कि उपचुनाव में अब अखिलेश फिर से गठबंधन को लेकर मंथन कर रहे हैं. उन्हें नए साथी की तलाश है. खास बात ये है कि पहली बार बसपा ने भी उपचुनाव लड़ने का ऐलान कर दिया है, ऐसे में अखिलेश के सामने बीजेपी के साथ दूसरा मोर्चा भी खुल गया है.

चुनाव तैयारी को लेकर बीजेपी पहले से सक्रिय

वहीं बीजेपी की बात करें तो पार्टी पूरी तरह एक्शन मोड में है. 11 सीटों पर जहां एक-एक मंत्री को लगाया गया है, वहीं हारी हुई सीट जलालपुर और रामपुर सीट जीतने के लिए दो मंत्रियों की तैनाती की गई है. फिलहाल, बीजेपी जिताऊ उम्मीदवारों के नाम फाइनल करने में जुटी है. इसको लेकर संगठन और सरकार की कोर ग्रुप की बैठक भी हो चुकी है.

बीजेपी ने खाली हुईं सभी विधानसभा सीटों- कैंट (लखनऊ), जैदपुर (बाराबंकी), मानिकपुर (चित्रकूट), गंगोह (सहारनपुर), इगलास (अलीगढ़), रामपुर, टूंडला (फिरोजाबाद), गोविंदनगर (कानपुर), बलहा (बहराइच), प्रतापगढ़, जलालपुर (अंबेडकरनगर), हमीरपुर, रामपुर को जीतने के लिए व्यूह रचना शुरू कर दी है. इस बार के लोकसभा चुनाव में जीतने वाले योगी सरकार में मंत्री रहे सत्यदेव पचौरी, रीता बहुगुणा जोशी और एसपी सिंह बघेल की सीटें भी खाली हुई हैं.

डिप्टी सीएम को दिया आजम का रामपुर जीतने की जिम्मेदारी

2017 के विधानसभा चुनाव में रामपुर से सपा प्रत्याशी आजम खान और जलालपुर विधानसभा सीट पर बसपा प्रत्याशी रीतेश पांडेय प्रचंड मोदी लहर के बावजूद जीते थे. ऐसे में अब उपचुनाव में इन दोनों सीटों पर भी कब्जा करने के लिए बीजेपी ने खास प्लान बनाया है. हारी हुई रामपुर सीट जीतने के लिए बीजेपी ने उप मुख्यमंत्री दिनेश शर्मा को जिम्मेदारी सौंपी है, वहीं जलालपुर (अंबेडकरनगर) सीट जीतने के लिए दो मंत्रियों को जिम्मा सौंपा है.

जलालपुर सीट के लिए बीजेपी ने की तगड़ी फील्डिंग

जलालपुर सीट जिताने की जिम्मेदारी मंत्री ब्रजेश पाठक और संतोष सिंह की होगी. डिप्टी सीएम केशव मौर्य को गोविंदनगर, मंत्री श्रीकांत शर्मा को टुंडला, आशुतोष टंडन को लखनऊ कैंट, दारा सिंह चौहान को जैदपुर, रमापति शास्त्री को बलहा, और प्रतापगढ़ की जिम्मेदारी परिवहन मंत्री स्वतंत्र देव सिंह को दी गई है. इसी तरह महेंद्र सिंह को मानिकपुर, भूपेंद्र सिंह को गंगोह, धुन्नी सिंह को हमीरपुर जिताने के लिए बीजेपी ने लगाया है.

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