बुलन्दशहर मामले में SIT की रिपोर्ट- गोकशी न रोकने के लिए बुलंदशहर का पुलिस प्रशासन जिम्मेदार-रिपोर्ट

बुलन्दशहर मामले में SIT की रिपोर्ट- गोकशी न रोकने के लिए बुलंदशहर का पुलिस प्रशासन जिम्मेदार-रिपोर्ट

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर जांच के लिए बुलंदशहर गए एडीजी इंटेलीजेंस एसबी शिरडकर ने अपनी रिपोर्ट में जिले के पुलिस प्रशासन को कठघरे में खड़ा किया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि पुलिस गोकशी रोक पाने में नाकाम रही। इसमें इंस्पेक्टर स्याना सुबोध कुमार सिंह और ग्रामीण सुमित की हत्या एक ही रिवाल्वर से होने की आशंका जताई गई है। पड़ताल में आया है कि सुबोध की निजी लाइसेंसी रिवाल्वर भीड़ ने छीन ली और उसी से उन्हें गोली मारी गई।

सूत्रों के अनुसार एडीजी इंटेलीजेंस ने अपनी जांच रिपोर्ट डीजीपी को सौंप दी है। उन्हें मामले की प्रारंभिक जांच के लिए महज 48 घंटे का वक्त दिया गया था। जिले के स्याना थाना क्षेत्र में गोकशी की घटना के विरोध में भड़की हिंसा एवं इस संबंध में दर्ज किए गए सभी मुकदमों की विवेचना आईजी रेंज मेरठ रामकुमार की अध्यक्षता में गठित एसआईटी कर रही है। सूत्रों का दावा है कि एडीजी इंटेलीजेंस ने अपनी रिपोर्ट में इस रहस्य से भी पर्दा उठाने की कोशिश की है कि पथराव करने वाली भीड़ का हिस्सा माने गए सुमित और इंस्पेक्टर स्याना सुबोध कुमार सिंह को कैसे गोली मारी गई? पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर इस तथ्य का खुलासा पहले ही हो गया था कि दोनों को 0.32 बोर की गोली मारी गई है।

सूत्रों के अनुसार जांच रिपोर्ट में दोनों की मौत सुबोध की निजी रिवाल्वर से ही होने की आशंका जताई गई है। यह रिवाल्वर भीड़ लूट ले गई। सूत्रों के अनुसार रिपोर्ट में बताया गया है कि बुलंदशहर जिले में पहले कुल 14 बूचड़खाने चलते थे। अब केवल तीन बूचड़खाने ही चल रहे हैं, जो लाइसेंसी हैं। हालांकि जिले की पुलिस गोकशी पर पूरी तरह अंकुश नहीं लगा पा रही है। इसकी एक वजह यह भी है कि ग्रामीण इलाकों में झुंड में आवारा गोवंश के छुट्टा घूमते हैं और उनके लिए कोई उचित व्यवस्था नहीं है। छुट्टा घूमते इन मवेशियों की सुरक्षा पुलिस के लिए एक बड़ी चुनौती व सिरदर्द बन गई है। इसके लिए पशुधन विभाग को भी जिम्मेदार ठहराया गया है। जांच रिपोर्ट में एक बात के लिए पुलिस प्रशासन की सराहना भी है। इसमें कहा गया है कि एक समुदाय विशेष के आयोजन (तब्लीगी इत्जमा) से लौट रही भीड़ को दूसरे रास्तों पर डायवर्ट करने का फैसला सही व उचित समय पर उठाया गया सटीक प्रशासनिक कदम था। इससे बड़ी घटना होने से टाली जा सकी।

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