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#GorakhpurChildrenTragedy : सरकार संवेदनहीन है मीडिया मौन है, अंधभक्तो का विलाप जारी है

#GorakhpurChildrenTragedy : सरकार संवेदनहीन है मीडिया मौन है, अंधभक्तो का विलाप जारी है

गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कॉलेज में पिछले 3 दिनों में ऑक्सिजन की कमी से 65 से ज्यादा लोगो की मौत जिनमे अधिकतर छोटे बच्चे शामिल थे बेहद मार्मिक और दुखपूर्ण तो हैं ही उत्तर प्रदेश सरकार के चिकित्सा विभाग के मुँह पर कालिख भी पोत रही हैं। इससे भी ज्यादा शर्मनाक हरकत मेडिकल कॉलेज और गोरखपुर प्रशासन ने इतने गंभीर मसले को दबाने की कोशिश की है। इस दुखपूर्ण विषय पर सरकार की आलोचना करने का मन नही था लेकिन कल से लेकर आजतक प्रदेश सरकार के घटिया हथकंडे और क्रियाकलाप देखकर मन बेहद आहत है।
गोरखपुर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का जनपद हैं आप स्वास्थ्य सेवाओ में बदहाली का आलम इसी से समझ सकते हैं की जब मुख्यमंत्री के ग्रह जनपद का ये हाल हैं तो बाकी जगहों पर क्या हालात होंगे??
उसपर भी विडम्बना ये हैं की घटना के 2 दिन पहले ही स्वयं मुख्यमंत्री ने अस्पताल का दौरा किया था। अब सवाल उठता हैं की फिर इस तरह के दौरे का क्या फायदा!!
उत्तर प्रदेश सरकार की संवेदनहीनता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता हैं की घटना के प्रकाश में आने के बाद मेडिकल कॉलेज प्रशासन,गोरखपुर प्रशासन तथा स्वास्थ्य मंत्री सभी के बयानों में विरोधाभाष पाया गया सीधी सी बात हैं की सरकार घटना को प्रकाश में ही नही आने देना चाहती थी। उत्तर प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री ने तो ऑक्सिजन की कमी से ऐसी किसी घटना से ही इंकार कर दिया था जबकी गोरखपुर जिला मजिस्ट्रेट कैमरे पर इसे स्वीकार कर चुके थे।
इतने गंभीर मसले पर तथाकथित बुद्धिजीवियो,राष्ट्रवादियो की चुप्पी आश्चर्यजनक हैं मीडिया भी वन्देमातरम,आतंकवादियो पर खबर चला कर अप्रत्यक्ष रूप से मामले को दबाने में लगा हुआ हैं।
बीजेपी आईटी सेल द्वारा पैड हैण्डलरो को उतार कर किसी भी तरह मामले को दबाने का जो अमानवीय कृत्य किया जा रहा हैं वो इतना घिनोना हैं की किसी भी सही इंसान को शर्म आ जाये। स्वास्थ्य मंत्री ने हँसते हुए चेहरे के साथ जो मौत के आंकड़े और तुलना करके शर्मनाक काम किया हैं वो किसी भी सभ्य समाज में कतई स्वीकार नही किया जा सकता। बार बार रिमाइंडर देने के बावजूद ऑक्सिजन सप्लाई करने वाली कंपनी का बिल क्यों जमा नही किया गया,क्या उत्तर प्रदेश स्वास्थ्य विभाग और गोरखपुर प्रशासन को इस बात की जानकारी थी या नही,2 दिन पहले ही अस्पताल का दौरा कर चुके मुख्यमंत्री के संज्ञान में ये बात थी या नही ये सब जाच का विषय हैं हालांकि मुख्यमंत्री ने जानकारी होने से इंकार किया हैं। कॉलेज के प्रिंसिपल ने इस्तीफा दे दिया हैं जबकी स्वास्थ्य मंत्री का कहना हैं की उन्हें ससपेंड किया गया, क्या 65 बच्चों की दर्दनाक मौत पर इतना ही काफी हैं। मुख्यमंत्री से निवेदन हैं की घटना की सीबीआई जाच कराकर दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा दिलाये चाहे दोषी उनकी ही सरकार के स्वास्थ्य मंत्री क्यों ना हो और मृतको के परिवार जनो को उचित मुआवजा दिया जाये और एक नजीर पेश करे प्रदेश के सामने हालांकि इसकी उम्मीद प्रकरण में सरकार के क्रियाकलाप देख कर कम ही की जा सकती हैं।
असलियत तो ये हैं की
शामशन ,कब्रिस्तान की बात कर जनता को बरगला कर
"गुड़ गवर्नेंस", "सबका साथ सबका विकास" का नारा देकर सत्ता में आने वाली उत्तर प्रदेश की सरकार ने मात्र कुछ महीनो में ही प्रदेश का मटियामेट कर दिया हैं स्वास्थ्य सेवाएँ पूरी तरह बदहाल हैं, हर विभाग में धांधली चरम पर हैं कुल मिला कर "अंधेर नगरी चोपट राजा" जैसी हालत हो गयी हैं प्रदेश की।
इतनी बड़ी घटना पर भी कुतर्क और सरकार का बचाव करने वाले अंधभक्तो से भी निवेदन हैं की मानवता किसी भी विचारधारा से बड़ी होती हैं अतः इस गंभीर लापरवाही पर सरकार से प्रश्न जरूर कीजिये और सरकार का बचाव करना बंद कीजिये।
प्रदेश का स्वास्थ्य विभाग आज पूरी तरह वेंटीलेटर पर आ चूका हैं... सत्ता के नशे और अहंकार में चूर भारतीय जनता पार्टी से भी निवेदन हैं की चुनावो में मिले इस अपार जनसमर्थन का सकरात्मक उपयोग करे और प्रदेश की बेहतरी में काम करे।
अंत में मृतको के परिवार के प्रति गहरी संवेदना, ईश्वर परिवारो को इस दुःख की घडी को सहन करने की शक्ति प्रदान करे। (प्रीति चौबे राष्ट्रीय सचिव युवजन सभा)


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