Read latest updates about "व्यंग ही व्यंग" - Page 2

  • बहन जी देखो ............ आँख रहीं तरेर : कृष्णेन्द्र राय

    बहन जी देखो ।आँख रहीं तरेर ।।चुनाव मद्देनज़र ।छवि रहीं उकेर ।।दे डालीं धमकी ।हो गया अमल ।।खेलनी है पारी ।उखाड़ना कमल ।।डगर है कठिन ।चल रहे सब दाव ।।पर करेगी जनता ।किससे अब जुड़ाव..?व्यंग्यात्मक लेखक : कृष्णेन्द्र राय

  • कोई आज हामिद से पूछे की मौत के पिंजरे से निकलकर अपनी माँ से लिपट जाना, कैसा होता है?

    हामिद अंसारी के भारत की सरज़मीं पर वापसीे की खबर और विडियो बहुत भावुक करने वाला है। कोई मौत के शिकंजे से छूटकर अपनी माँ के आंचल में छुप जाये तो उस अहसास को शब्दों में बयाँ करना न तो हामिद के वश का है और न ही किसी दूसरे के। उनके उखड़ते शब्द और आँसुओं के बीच की रिक्तता को, हम सिर्फ अपनी संवेदनशीलता से...

  • राहुल जी के सोना सत्याग्रह के बाद भारत के हर घर मे सोना बनने लगा

    2020... राहुल जी को भारत का प्रधानमंत्री बने वर्ष भर हो गए हैं। इस एक वर्ष में राहुल जी ने जो ऐतिहासिक लोकप्रियता प्राप्त की है, वैसी लोकप्रियता महात्मा गाँधी के अतिरिक्त और किसी को नहीं मिली थी। महात्मा गाँधी के नमक सत्याग्रह के बाद जिस तरह देश के घर-घर मे लोग नमक बनाने लगे थे,...

  • नेता या गुंडे ?

    गिर गया स्तर ।घूँसे रहे चल ।।शो बने अखाड़े ।ज़ुबान रही फिसल ।।धक्कामुक्की चरम ।नेता या गुंडे ?नैतिकता बेदम ।तेल पिलाओ डंडे ।।पार्टी के चेहरे ।उदंडता की लहर ।।ऐसी नौबत आयी ।झेलो अब क़हर ।।व्यंग्यात्मक लेखक : कृष्णेन्द्र राय /Krishnendra Rai

  • पाक मोह में सिद्धू हुए विवादित : कृष्णेन्द्र राय

    सिद्धू हुए विवादित ।क्रियाकलाप पर शक ।।कैबिनेट मंत्रि ।छीन रहा हक ?बाजवा इमरान ।चालू है याराना ।।घोप रहा खंजर ।इनका गले लगाना ?बने विश्व उपदेशक ।इमरान इनका हीरो ।।बुरा पर असर ।हो जायेंगे ज़ीरो ?व्यंग्यात्मक लेखक : कृष्णेन्द्र राय/Krishnendra Rai

  • बौखलाये दहशतगर्द : कृष्णेन्द्र राय

    बौखलाये दहशतगर्दधर पकड़ का दौर ।मिल रही सफलता ।।जाबाजों पर नाज ।आतंकी विफलता ।।चौकस शूरवीर ।बौखलाये दहशतगर्द ।।पर नहीं भूलता ।26/11 दर्द ।।मुँहतोड़ जवाब ।देना है जारी ।।लाख फेंको पत्थर ।उतरेगी ख़ुमारी ।।व्यंग्यात्मक लेखक : कृष्णेन्द्र रायKrishnendra Rai

  • चार गंजेड़ी (व्यंग्य) तस्वीर का लेख से कोई सम्बन्ध नहीं।

    किसी गाँव में चार गजेड़ी(गाँजा के पियक्कड़) रहते थे। गंजेड़ी सामान्यतः बुद्धिजीवी होते हैं। ये चारों भी घोर बुद्धिजीवी थे। एक बार चारों ने सोचा कि क्यों न किसी मंदिर-मठ पर रहा जाय, आराम से पड़े पड़े मालपुआ खाएंगे और गाँजा का दम लगाएंगे। चारों में बात तय हो गयी। चारो अपने मन के राजा थे। 'आगे नाथ न पीछे...

  • बढ़ गयी -बढ़ गयी भूख : कृष्णेन्द्र राय

    बढ़ गयी भूख । भईया जी अखिलेश ।।दो रोटी ज़्यादा ।खबर ये विशेष ।।सीबीआई झगड़ा ।प्रसन्नचित मुद्रा ।।कलह सीबीआई ।तोड़ डालो तंद्रा ।।मिला है मौक़ा ।निपटाओ अधूरा ।।बोनस है दिवाली ।फ़ायदा हो पूरा ।।व्यंग्यात्मक लेखक:कृष्णेन्द्र राय

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