Read latest updates about "व्यंग ही व्यंग" - Page 2

  • "योगी जी बतायें पूछ रही आवाम" व्यंग्यात्मक कविता:कृष्णेन्द्र राय

    'योगी जी बतायें पूछ रही आवाम'ना लेते संज्ञान ।आपके अधिकारी ।।आपकी है सत्ता ।फिर क्यों लाचारी ?कथनी-करनी अलग ।ना दिखे परिणाम ।।योगी जी बतायें ।पूछ रही आवाम ।।लालफीताशाही ।ना हुई दूर ।।जमे जमाये अफ़सर ।सपने चकनाचूर ?व्यंग्यात्मक लेखक : कृष्णेन्द्र राय

  • "बढ़े बांग्लादेशी निकाल करो बाहर" व्यंग्यात्मक कविता: कृष्णेन्द्र राय

    बढ़े बांग्लादेशी ।निकाल करो बाहर ।।ढूँढ कर निकालो ।छुपे गाँव शहर ।।हो सकते घातक ।दिमाग़ ख़ुराफ़ाती ।।भेजो इनके मुल्क ।चढ़े हमारे छाती ।।निदान है ज़रूरी ।घातक ये नासूर ।।हम क्यों झेलें..?हमारा क्या क़सूर...?व्यंग्यात्मक लेखक : कृष्णेन्द्र रायKrishnendra Rai

  • व्यंग्यात्मक कविता : कृष्णेन्द्र राय

    बदल गयी सत्ता ।आ गये इमरान ।।बंद दाना-पानी ।हाफ़िज़ ही है जान ।।रूक गयी ख़ैरात ।अमरीका ने ठोका ।।चप्पलचोर पाकिस्तान ।दिया सबको धोखा ।।सादगी का नाटक ।कर गया क्रिकेटर ।।सजग रहना भारत ।चालू किया थिएटर ।।व्यंग्यात्मक लेखक : कृष्णेन्द्र राय

  • लालकिला...

    भारत की छाती पर बना यह महल उसी गाजी शाहजहाँ का बनवाया हुआ है, जिसने जूझर सिंह के ग्यारह वर्ष के पोते को केवल इसलिए कटवा दिया क्योंकि वह हिन्दू था। जिसने ओरछा के सभी मंदिरों को अपवित्र कर तुड़वा दिया। जिसने असंख्य बुन्देला स्त्रियों को लूट कर अमीरों के हरम में भेज दिया। लालकिला का सौंदर्य...

  • अथ श्रीआरक्षण कथा-४

    'मिले मुलायम कांशीराम' के बल पर अयोध्या काण्ड के खलनायक के रूप में उभरे मुलायम सिंह यादव मुख्यमंत्री तो बन गए पर उनका पाला मायावती से पड़ गया जो हर तरह की राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं में मुलायम सिंह से कहीं ज्यादा बढ़ चढ़ कर दीं। छः-छः महीने के मुख्यमंत्रित्व के जो समझौते हुए थे उसके बीतने...

  • अथ श्री आरक्षण कथा-३

    भाजपा का कांग्रेस के राजनीतिक उत्तराधिकारी के रूप में उदय १९९१ में होने लगा जब १९९० में आडवाणी जी द्वारा अयोध्या में राममंदिर निर्माण को लेकर निकाली गई रथयात्रा को जनता ने अपार समर्थन दिया जिससे न केवल मध्य प्रदेश, राजस्थान, हिमाचल प्रदेश और उत्तरप्रदेश में भाजपा की पूर्ण बहुमत की सरकारें बनीं...

  • अथ श्रीआरक्षण कथा-२

    वीपी सिंह ने इस्तीफा देने से मना कर दिया और कहा कि वह सदन में अपना बहुमत सिद्ध कर देंगे लेकिन हुआ वही जो सबको पता था वीपी का विश्वास प्रस्ताव लोकसभा में गिर गया। आम जनता को इससे कोई बहुत राहत या खुशी नहीं हुई, पूरा देश आरक्षण विरोधी आंदोलन और अयोध्या में कारसेवकों पर मुलायम सिंह और सुरक्षा बलों...

  • मड़ुआ भक्षी द्विज का राहुल के नाम पत्र

    प्रिय राहुल गाँधी जी!सादर प्रणाम। पहले यह बता दूँ कि मैं आपके बाप-दादों का चारण-भाट नहीं हूँ, न ही मुझे यह कहने में रत्ती भर हिचकिचाहट है कि आप एक सिरे से न केवल अयोग्य हैं, बल्कि इस देश के नाम पर आपके बाप-दादा तक काले धब्बे रहे हैं, इसलिए डीएनए की बात न ही करें तो बेहतर है। यह जान लीजिए, भारत का...

  • अथ श्री आरक्षण कथा-१

    १९८९ याद है? अटलजी ने सोमनाथ से रथ यात्रा को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया था और आडवाणी जी उसे लेकर जब अयोध्या के लिए कूच किए थे, तब दिल्ली में विश्वनाथ प्रताप सिंह कि जनता दल की सरकार भाजपा के ५६-५७ सांसदों पर बुरी तरह से आश्रित चल रही थी। १९८४ में इंदिरा जी की हत्या के बाद इस देश ने उनके...

  • मेघदूत (व्यंग्य)

    इक्कीसवीं शताब्दी के दूसरे दशक की बात है, एक मंत्री की सेवा में नियुक्त अरविन्द सिंह नामधारी एक यक्ष जब अपने कार्य से अतिरिक्त कार्य करते पकड़ा गया, तो मंत्री ने उसपर पोटा लगवा कर तड़ीपार करवा दिया। यक्ष का अपराध यह था कि उसने अपने स्वामी का वह गुप्त फेसबुक स्क्रीन शॉट 'जिसमें उसने अपनी तीसरी...

  • हुजूर! माई-बाप! यह हिस्से का बंटवारा घर के अंदर ही फरिया लीजिये

    जज साहेब कह रहे हैं कि न्यायपालिका खतरे में है। वे हाकिम हैं, हुजूर हैं, माई-बाप हैं। कह रहे हैं तो सचमुच न्यायपालिका संकट में ही होगी। मैं लोकतंत्र का एक अदना सा दास हूँ, मेरी इतनी सामर्थ्य कहाँ जो उनकी बात को काट सकूं। मुझे बस एक बात समझ में नहीं आती, कि यह लोकतंत्र तब खतरे में क्यों नहीं आया था...

  • सूर पतित को बेग उबारो...आलोक पाण्डेय

    आजकल बौद्धिक दंगाग्रस्त हूँ, बौद्धिक दंगाग्रस्त मने एक विचार आता है और विचारों का रेला भगदड़ मचाने लगता है, अब जजे साहबों को लीजिए इनका एकेडमिक बैकग्राउंड जब देखता हूँ तो दिखता है वो आवारा लड़का जो हर प्रकार से निकम्मा था, न स्कूल आता था, न टीचरों की इज्जत करता था, मेज पर छुरा गाड़ परीक्षा देता था...

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