Read latest updates about "व्यंग ही व्यंग" - Page 2

  • बढ़ गयी -बढ़ गयी भूख : कृष्णेन्द्र राय

    बढ़ गयी भूख । भईया जी अखिलेश ।।दो रोटी ज़्यादा ।खबर ये विशेष ।।सीबीआई झगड़ा ।प्रसन्नचित मुद्रा ।।कलह सीबीआई ।तोड़ डालो तंद्रा ।।मिला है मौक़ा ।निपटाओ अधूरा ।।बोनस है दिवाली ।फ़ायदा हो पूरा ।।व्यंग्यात्मक लेखक:कृष्णेन्द्र राय

  • सियासी हुतुतू ... में पस्त खिलाड़ी ..टूट रहा भ्रम ? : कृष्णेन्द्र राय

    उठापटक तेज़ । दोस्ती है चरम ?बंगले की सौग़ात ।रूख दिखाये नरम ।।बिछ गयी गोटी ।खिचड़ी रही पक ।।लड़ो गर दिल से ।मिल जाये हक ?सियासी ये खेल ।रोज़ नया घटनाक्रम ।।पस्त हुए खिलाड़ी ।टूट रहा भ्रम ?व्यंग्यात्मक लेखक : कृष्णेन्द्र राय

  • सुनो तिवराइन ! लाल सलाम !! आशा ही नहीं 'कुमार विश्वास' है कि 'आप' की हालात #MeToo नहीं होगी !

    सुनो तिवराइन !लाल सलाम !!आशा ही नहीं 'कुमार विश्वास' है कि 'आप' की हालात #MeToo नहीं होगी !हम बता नहीं सकते कितने भय के भयंकर साये में जी रहे हैं !'कहाँ चला था #Me शहजादा बनने , पर 'अकबर' बन के #Too हो गया...' अनारकली भी कहाँ मिली...पर शिकारफली जरूर मिल गई, उ भी एक नहीं बल्कि पूरी पूरी मटर की फली...

  • चुनौतियों पर कुछ लिखा जाना चाहिए.... श्वान कथा - 2

    अब यह लिखना कि कुत्ता एक पालतू जानवर है, उसकी चार टांगे, दो कान और एक लम्बी या जलेबी की तरह गोल पूंछ होती है। कुत्ता एक समझदार और स्वामिभक्त जानवर है..ऐसा लगता है मानो कक्षा छह में कुत्ते पर निबंध लिख रहा हूँ।बात, जब कुत्ते पर चलेगी तो सिर्फ उसके वफ़ादारी का ही ज़िक्र न होगा। बातें और भी उठेंगी। बात,...

  • "योगी जी बतायें पूछ रही आवाम" व्यंग्यात्मक कविता:कृष्णेन्द्र राय

    'योगी जी बतायें पूछ रही आवाम'ना लेते संज्ञान ।आपके अधिकारी ।।आपकी है सत्ता ।फिर क्यों लाचारी ?कथनी-करनी अलग ।ना दिखे परिणाम ।।योगी जी बतायें ।पूछ रही आवाम ।।लालफीताशाही ।ना हुई दूर ।।जमे जमाये अफ़सर ।सपने चकनाचूर ?व्यंग्यात्मक लेखक : कृष्णेन्द्र राय

  • "बढ़े बांग्लादेशी निकाल करो बाहर" व्यंग्यात्मक कविता: कृष्णेन्द्र राय

    बढ़े बांग्लादेशी ।निकाल करो बाहर ।।ढूँढ कर निकालो ।छुपे गाँव शहर ।।हो सकते घातक ।दिमाग़ ख़ुराफ़ाती ।।भेजो इनके मुल्क ।चढ़े हमारे छाती ।।निदान है ज़रूरी ।घातक ये नासूर ।।हम क्यों झेलें..?हमारा क्या क़सूर...?व्यंग्यात्मक लेखक : कृष्णेन्द्र रायKrishnendra Rai

  • व्यंग्यात्मक कविता : कृष्णेन्द्र राय

    बदल गयी सत्ता ।आ गये इमरान ।।बंद दाना-पानी ।हाफ़िज़ ही है जान ।।रूक गयी ख़ैरात ।अमरीका ने ठोका ।।चप्पलचोर पाकिस्तान ।दिया सबको धोखा ।।सादगी का नाटक ।कर गया क्रिकेटर ।।सजग रहना भारत ।चालू किया थिएटर ।।व्यंग्यात्मक लेखक : कृष्णेन्द्र राय

  • लालकिला...

    भारत की छाती पर बना यह महल उसी गाजी शाहजहाँ का बनवाया हुआ है, जिसने जूझर सिंह के ग्यारह वर्ष के पोते को केवल इसलिए कटवा दिया क्योंकि वह हिन्दू था। जिसने ओरछा के सभी मंदिरों को अपवित्र कर तुड़वा दिया। जिसने असंख्य बुन्देला स्त्रियों को लूट कर अमीरों के हरम में भेज दिया। लालकिला का सौंदर्य...

Share it
Share it
Share it
Top