Read latest updates about "व्यंग ही व्यंग" - Page 2

  • बौखलाये दहशतगर्द : कृष्णेन्द्र राय

    बौखलाये दहशतगर्दधर पकड़ का दौर ।मिल रही सफलता ।।जाबाजों पर नाज ।आतंकी विफलता ।।चौकस शूरवीर ।बौखलाये दहशतगर्द ।।पर नहीं भूलता ।26/11 दर्द ।।मुँहतोड़ जवाब ।देना है जारी ।।लाख फेंको पत्थर ।उतरेगी ख़ुमारी ।।व्यंग्यात्मक लेखक : कृष्णेन्द्र रायKrishnendra Rai

  • चार गंजेड़ी (व्यंग्य) तस्वीर का लेख से कोई सम्बन्ध नहीं।

    किसी गाँव में चार गजेड़ी(गाँजा के पियक्कड़) रहते थे। गंजेड़ी सामान्यतः बुद्धिजीवी होते हैं। ये चारों भी घोर बुद्धिजीवी थे। एक बार चारों ने सोचा कि क्यों न किसी मंदिर-मठ पर रहा जाय, आराम से पड़े पड़े मालपुआ खाएंगे और गाँजा का दम लगाएंगे। चारों में बात तय हो गयी। चारो अपने मन के राजा थे। 'आगे नाथ न पीछे...

  • बढ़ गयी -बढ़ गयी भूख : कृष्णेन्द्र राय

    बढ़ गयी भूख । भईया जी अखिलेश ।।दो रोटी ज़्यादा ।खबर ये विशेष ।।सीबीआई झगड़ा ।प्रसन्नचित मुद्रा ।।कलह सीबीआई ।तोड़ डालो तंद्रा ।।मिला है मौक़ा ।निपटाओ अधूरा ।।बोनस है दिवाली ।फ़ायदा हो पूरा ।।व्यंग्यात्मक लेखक:कृष्णेन्द्र राय

  • सियासी हुतुतू ... में पस्त खिलाड़ी ..टूट रहा भ्रम ? : कृष्णेन्द्र राय

    उठापटक तेज़ । दोस्ती है चरम ?बंगले की सौग़ात ।रूख दिखाये नरम ।।बिछ गयी गोटी ।खिचड़ी रही पक ।।लड़ो गर दिल से ।मिल जाये हक ?सियासी ये खेल ।रोज़ नया घटनाक्रम ।।पस्त हुए खिलाड़ी ।टूट रहा भ्रम ?व्यंग्यात्मक लेखक : कृष्णेन्द्र राय

Share it
Top