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फगुनहट जिन्दाबाद... देश में बड़ी बवाल है रे भाया!

फगुनहट जिन्दाबाद... देश में बड़ी बवाल है रे भाया!



आधा देश सोनभद्र में सोना चाहता है, आधा देश......... यह जनता जगना क्यों नहीं चाहती भाई? फागुन के महीने में डोनाल्ड भाई भउजाई के साथ पधार तो रहे हैं पर गुजरात में! बिहार आते तो इसी बहाने भउजाई को भर मन निहार लेता लड़का सब... भजपाई सब अलगे परेशान हैं। उन्हें डर है कि कहीं हम चिल्ला चिल्ला के नारा लगाने में रह जाएं, आ मिसेज ट्रम्प के साथ फोटो मिस्टर शशि थुरूर खिंचवा लें... वैसे डर जायज है, मिस्टर थुरूर का जो रिकार्ड है उस हिसाब से तो मामला गम्भीर ही है। इस देश के युवकों की छाती पर जितनी मूंग इस थुरूर ने दली है, उतनी और किसी ने नहीं...

इस देश में एक भी व्यक्ति ऐसा नहीं है जिसे पूरा देश पसन्द करता हो, सिवाय स्वरा भाष्कर के... बुद्धिजीवियों को उनका भाषण पसन्द है, और राष्ट्रवादियों को उनके सीन। अच्छे-अच्छे राष्ट्रवादी युवा जो दिन भर स्वरा जी को गालियाँ देते हैं, वे भी रात को छिप कर स्वरा जी के वीडियो क्लिप देखते हुए पकड़े जाते हैं। इस देश में उनका कोई विरोधी नहीं, सब उन्हें प्यार करते हैं।

हाँ, इस देश में एक व्यक्ति है जिसको लोग प्यार नहीं करते, वे हैं श्रीयुत राहुल गांधी। उनका कट्टर समर्थक तक उनका नाम नहीं लेता। वह चर्चा में मोदीजी का बार-बार नाम लेता है, विरोध करता है, गाली देता है, पर अपने नेता का नाम नहीं बताता। हमलोग जब मनमोहन जी का विरोध करते थे तो हमेशा कहते थे, "मनमोहन जी ठीक नहीं हैं, मोदी जी योग्य हैं।" राहुल गांधी के आदमी-जन यह तो कहते हैं कि मोदी बुरे हैं, पर यह नहीं कह पाते कि राहुल जी उनसे अच्छे हैं। भारतीय लोकतंत्र में किसी पार्टी के समर्थकों की इतनी बुरी दशा कभी नहीं हुई थी।

बिहार में बहार आने वाला है, देश भर के नेता अब बिहार की ओर प्रेम भरी निगाहों से देख रहे हैं। इसी बीच में एक दिन मोदी जी लिट्टी-चोखा खा लिए। लिट्टी में शायद मटर का सतुआ भरा गया था, पर आश्चर्यजनक बात यह है कि पेट बिगड़ना चाहिए मोदीजी का, तो बिगड़ गया विपक्ष का... तेजस्वी जी, जीतन जी, फलाने जी, सब लोग चिल्लाने लगे कि लिट्टी काहे खाया? खाना ही था तो अभी क्यों खाया! चुनाव के बाद क्यों नहीं खाया? अबे मन उनका, पेट उनका, देश उनका, तो खाएंगे तुमसे पूछ के? यह मोदी भाई भी अलगे खिलाड़ी हैं, मुस्कुरा के मडर कराने वाले...

जब समूचा विश्व समस्या में घिरा है तो मैं कैसे बच सकता हूँ? मैं पिछले पंद्रह दिन से यह सोच कर परेशान हूँ कि ये गोरखपुर वाले पतरके साहित्यकार आशीष त्रिपाठी, प्रोफेसर मटुकनाथ जुलीवाले की मित्रसूची में क्या कर रहे हैं? समय मिले तो तनिक उनसे पूछा जाय!

खैर! एक बड़ा मजेदार चुटकुला सुना है इधर। आप भी मजे लीजिये... फागुन में चलता है।

भारत में हजारों भाषाएँ बोली जाती हैं, पर देश में एक भी व्यक्ति नहीं जो सारी भाषाएँ समझता हो। हाँ, देश में दो लोग हैं जो इन हजारों भाषायों में रोज गालियां सुनते हैं। कौन?

"डागा और तेजा"

सर्वेश तिवारी श्रीमुख

गोपालगंज, बिहार।

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