Read latest updates about "भोजपुरी कहानिया"

  • सुस्वागतम बसंत...

    मेरे लिए बसंत के पखवारे भर पहले खेतों में महक लिए फूल उठी सरसो ठीक वैसी ही है, जैसे सातवीं क्लास के किसी अल्हड़ किशोर के लिए कक्षा में आई कोई सुंदर किशोरी। सच कहूं तो इन दिनों विद्यार्थी जीवन के अनेक पवित्र आकर्षणों में बंध कर बहाए गये आंसुओं की लघुकथाएं उपन्यास बन कर अध्याय दर अध्याय खुलने लगती...

  • "आदमी के शरीर में बेहाया जनमल बाड़ सन भाई एकनिये के कुफुत से, कुहकत बाड़ी सरस्वती माई"

    गांव के सब लईकन के जुटान भईल बा। कुछ जवान, कुछ अधेड़ अउरी कुछ बुढ लोग भी जुटल बा। सरस्वती पूजा के लेके इ बैठक बा। खास बात इ बाकि विद्या के देवी के पूजा खातिर जुटल अधिकांश लोग अयीसन बा जे यात पढ़ाई से रिटायर हो गईल बा या जब पढ़ाई के समय रहे त सरस्वती माई से छतीस के आकड़ा रहे। इहे हाल कुछ शामिल पढ़निहार...

  • बसंत ऋतु के पाँचवाँ दिन....बसंत पंचमी एगो अइसन पर्व ह जवना के आध्यात्मिक लौकिक दूनों स्तर पर महत्व बा

    अइसन लोकश्रुति ह...कि ब्रह्मा जी सृष्टि के रचना कइके ओकरा के जीवंत कइल भुला गइल रहनी। फेर अपना कमंडल से जल छिरिक के प्राणीमात्र में सरस्वती के प्रभाव से स्वर आ हवा पानी में तरंग पैदा कइनी। सरस्वती महाशक्ति में से एगो मानल जाली। ज्ञान आ कला के देवी। जीवन में चेतना प्राण...

  • गबरा..........रिवेश प्रताप सिंह

    तेरहवीं की उमर पार करने के बाद तालीमी मुआमले में जुनैद मियाँ उतना ही हासिल कर पाये जितना किसी सीसे के कंचे को सालोंसाल तेल के कटोरे में डुबाकर रखने के बाद कन्चा तेल से हासिल करता हो..मियाँ आठवीं जमात तक तो घसीटकर भेजे गये लेकिन आठवीं के बाद उनके अब्बू रहमत मियाँ ने भी हार मान ली क्योंकि अब घसीटते...

  • फिर एक कहानी और श्रीमुख "नपुंसक"

    मृत्युशैया पर पड़े पड़े यमराज की प्रतीक्षा करते बृद्ध के मुह से अवचेतन में एक ही पंक्ति बार बार निकल रही थी- मैं नपुंसक नहीं था, मैं नपुंसक नहीं था... निकट बैठी उसकी पुत्री कभी उसका सर सहलाती, तो कभी उसके लिए ईश्वर से प्रार्थना करती।उस दस फ़ीट की छोटी सी कोठरी में मृत्यु की शांति उतर आई थी।...

  • प्रेम में सफलता के श्रीमुख सूत्र

    यूँ तो प्रेम इस जगत का सबसे पवित्र कार्य है, पर किसी का प्रेम प्राप्त कर पाना अत्यंत कठिन कार्य भी है। पर यदि पूरी लगन और निष्ठा के साथ कठिन परिश्रम और सतत प्रयास किया जाय, तो प्रेयसी का हृदय जीतना बहुत आसान हो जाता है। किसी तरुणी के प्रेम में अनुरक्त युवा को कुछ आवश्यक बातों पर ध्यान...

  • प्रेम का रंग पीत.........

    खेतों में फूली सरसो देख कर किसान का सीना अगर 56 इंच का हो जाता है, तो नवदीक्षित प्रेमी, प्रणयोत्सुक नवयुवकों (देहाती में कहें तो लबलबाह तह-बादर परेमी) का सीना 112 इंच का हो जाता है। सरसो के फूलों की सुगंध जब कलेजे में घुसती है तो कलेजा सेंसेक्स का संवेदी सूचकांक हो जाता है,और मन सेटेलाइट की तरह...

  • चश्मे का लेंस : व्यास तिवारी

    बद्री पांडे अपने कंकाल होते शरीर को देख रहे कितना अच्छा था बचपन जब इलाके के नामी पहलवान में गिनती होती थी पिताजी के आंख के तारे थे अम्मा भी सबसे ज्यादा उन्हें ही मानती थी पर वो मनहूस दिन जब पिताजी को कोई बस वाला साइड मार दिया सारी खुशियां निगल गया ...पिताजी महीनों अस्पताल में पड़े थे जर जमीन महाजन...

  • भोजपुरी के सुप्रसिद्ध गीत "रात दिया बुता के पिया क्या-क्या किया" की व्याख्या

    प्रश्न - भोजपुरी के सुप्रसिद्ध गीत "रात दिया बुता के पिया क्या-क्या किया" की सप्रसंग व्याख्या करें। - (10 अंक) उत्तर - प्रस्तुत वैवाहिक गीत "रात दिया बुता के पिया क्या-क्या किया" को 2017 में आई भोजपुरी की सुपरहिट फिल्म पवन सिंह अभिनीत 'सत्या' से लिया गया है। बक़ौल यूट्यूब, इस गीत को अब तक...

  • बुद्धू - एक प्रेम कहानी

    "रचित बाबू छुट्टी हो चुकी है, घर नहीं जाना है क्या?", मेरे एक साथी कर्मचारी ने हल्की मुस्कान के साथ मुझे नींद से जगाया। "अरे नहीं सर, वो थोड़ी आँख लग गई थी", मैंने झेंपते हुए कहा। मेरा लखनऊ से भोपाल तबादला हुआ था और आज यहाँ मेरी जॉइनिंग का पहला दिन था। लम्बा सफर तय करने की वजह से अभी मेरे शरीर की...

  • उलझी ज़िन्दगी, कच्ची उम्र और रिश्ते...

    जब रात में बुआ के चीखने चिल्लाने की आवाज सुनकर मेरी नींद खुली तो देखा कि फूफ़ा उन्हें पीट रहे थे और बुआ लगातार चिल्लाए जा रही थी, "मत मारिये, रुक जाइये! मत मारिये वो सुन लेगा". "साली कुत्ती अपना खर्चा तो संभल नहीं रहा है, इसको बुलाने की क्या जरूरत थी"."मुफ्त में थोड़ी न रहने आया है,...

  • "खिचड़ी"

    बारह बज गईल। पंडि जी अबे ले ना अईले। लईका त लईका, अब सयान के भी भूख नईखे रोकात। ऊपर से दही के महक मुह में पानी लिया देता। सरजू के घरे सदियों से परम्परा चलत आवता। पहिले पंडिजी खा लेनी तबे केहु मुह जुठारेला।"पंडि जी त आज धोखा दे दिहनि। लगता केहु अउर किहा चल गईनी।""अईसन नईखे हो सकत। जरूर कवनो...

Share it
Share it
Share it
Top