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भोजपुरी कहानिया - Page 1

  • हे बबिता! हम टिरेन पकड़ के शनिचर को आ रहे हैं हो

    मदरास से। तुम्हारे लिए आसमानी रंग का सड़िया, दु जोड़ा पायल और बिछिया है। बाहरी दरवाजे के लिए छींटदार पर्दा, दू ठो बेडशीट, एक नया अटैची, बाबा कंपनी का दालमोट और आम-इमली वाला चॉकलेट है। हाथ में भर लोटा पानी और माथा पर अचरा लिये ठीक आठ बजे भोर में तुम मेरा इंतज़ार करना हो। देर होने पर तुम पड़ोस के भगीरथ को ...

  • मुल्ला का बकरा : रिवेश प्रताप सिंह

    मुल्ला जी ने एक बकरा पाल रखा था..आप यूं समझें कि मुल्ला जी ने अपने उम्मीदों का एक बकरा पाल रखा था. बकरा, मुल्ला जी के परिवार का कमाऊँ सदस्य था.. उस बकरे पर ही मुल्ला जी के पूरे परिवार के खर्चे का वजन था. वैसे मुल्ला जी का बकरा पेशेवर था! पेशा कुनबापरस्ती का था लेकिन वो अपने पेशे में ईमानदार था....

  • फगुनहट जिन्दाबाद... देश में बड़ी बवाल है रे भाया!

    आधा देश सोनभद्र में सोना चाहता है, आधा देश......... यह जनता जगना क्यों नहीं चाहती भाई? फागुन के महीने में डोनाल्ड भाई भउजाई के साथ पधार तो रहे हैं पर गुजरात में! बिहार आते तो इसी बहाने भउजाई को भर मन निहार लेता लड़का सब... भजपाई सब अलगे परेशान हैं। उन्हें डर है कि कहीं हम चिल्ला चिल्ला के नारा...

  • सलाम तेरी पहली नज़र को सलाम! (लघुकथा)

    साँझ के बेर की बहती फागुनी हवाएँ अथाह दायित्वों के बोझ तले दबे मानव को भी उसके युवावस्था में व्यतीत किये गए वसन्त की याद दिला ही देती हैं।बड़े ही कुशलता व द्रुत गति से साग काट रही सुमित्रा से पड़ोस के मुँहबोले देवर भानू आधे घण्टे से ही मज़ाक़िया लहजे में बात किये जा रहे हैं। हँसि- ठिठोली के इस चिन्मय...

  • हग डे (लघुकथा)

    बहुत देर से अपने कम्प्यूटर के की - बोर्ड को उलट - पलट कर देख रही तृप्ति ने आस - पास नजरें दौड़ाईं तो दिवाकर को अपनी ही तरफ देखता पाया । झट से नजरें नीची कर लीं और काउन्टर पर खड़े बुजुर्ग को देखकर बोली - खाते में बकाया की जानकारी तो मिसकॉल सुविधा से भी ले सकते हैं आप ?बुजुर्ग जागरूक ग्राहक था , उसने...

  • हार नहीं मानूँगा...

    गुलबदन बाबू अभी - अभी आये । आते ही किसी अनाम को बद्दुआएं देने लगे । कारण पूछे जाने पर रुंआसे होकर बोले - ' आपको तो मालूम है न कि घर से निकाल दिए जाने के बाद मैं अपना जीवन कैसे काट रहा हूँ ? '- ' हाँ , यहाँ किसे नहीं मालूम आपके संघर्ष पूर्ण जीवन के बारे में ?'- ' मगर उसे इसकी जरा भी कद्र भी नहीं है । ...

  • ललका गुलाब......

    गोबर उठाते हुए परभुनाथ चचा ने चाची से पूछा है कि आज कौन सा दिन है हो? घर के काम काज में अंझुराई चाची अंगुरी पर दिन का हिसाब बैठाती हैं।जहिया देवनथवा गुजरात गया था उस दिन सोमार था। तो सोमारे सोमार आठ आ मंगर नौ... तब तक मोबाइल पर सिर झुकाए रजेसवा बोल पड़ता है - आज 'रोज-डे' है। परभुनाथ चचा पूछ...

  • "रोज डे का रोज"

    भले हीं प्रेम के सारे ज्ञानपीठ और पद्म पुरस्कार चमचई की तराजू पर तौल कर हीर-राँझा, लैला-मजनू या सिंरी-फरहाद को दे दिए जांय,पर आरा में बहने वाली हवाएँ भी चीख चीख कर कहती हैं कि प्रेम किया तो सिर्फ अरविंद सिंह ने किया। अरविंद सिंह के आगे दूसरे प्रेमियों का प्रेम प्रेम न हो कर प्रेमली जैसा लगता है।...

  • सुनो दो अक्षरों वाली...

    सूरज कई दिनों के बाद निकला है आज, ठीक वैसे ही जैसे हमें बहुत पसंद है। इसीलिए हम सरयू के घाट पर निकल आए हैं अकेले। क्योंकि यही वो जगह है जो हम दोनों को पसंद है। और सरयू के बारे तुलसीदास ने लिखा है कि - कोटि कल्प काशी बसै... नहीं! नहीं ।कुछ नहीं लिखा है तुलसी ने। याद है? यहीं टकराए थे न! हम दोनों पहली ...

  • श्रृंगार की पंखुड़ियाँ...!

    ऐ पँड़ाइन , सुनो न!लेखन की दुनिया के सभी कलमकारों की कलम 'प्रेम' लिखने लगी है...., बताओ न ! बसन्त आ रहा है क्या? तुमको ज्ञात है ? ई बसन्त और सावन हमारे आँख की दोनों पुतरी है....., इन्ही दोनों के मध्यबिंदु 'भाल' पर हम सुर्ख लाल चंदन के रूप में तुम्हारी प्राण-प्रतिष्ठा करते हैं।मुझे ज्ञात भी नही कि ,...

  • गांव का प्रेम और जवानी का जोम

    कहते हैं गांव का प्रेम और जवानी का जोम बड़ी बेखबर चीज होती है...ठीक वैसे ही जैसे बसंती बहार... जैसे गंगा माई का कछार और जैसे चंदन और प्रीति जी का प्यार....कौन चंदन ? कौन प्रीति ...?उफ्फ ...भूल गए ना जी...? क्या करियेगा हम भी तो भूल ही गए हैं...एक हम-एक वो...कुछ सपने.. इनके बीच अपने...अपनो का...

  • हृदय फागुन चढ़ने के पखवाड़े भर पहले से ही महकने लगता ....

    यूँ तो हम भी कोई बहुत पुरानी चीज नहीं हुए, पर वे दिन जरूर पुराने थे जब किसी के मुस्कुराने का मतलब 'इश्क' हुआ करता था। वे ऐसे जल्दबाज दिन थे कि आम में मोजर भले दस दिनों बाद लगें, पर हृदय फागुन चढ़ने के पखवाड़े भर पहले से ही महकने लगता था। जिन्दगी की फटफटिया किसी रेड-लाइट पर खड़ी हो तो पीछे मुड़ कर...

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