Read latest updates about "भोजपुरी कहानिया" - Page 1

  • तारिका की फ़टी जीन्स

    युगों पुर्व प्रेमचंद के फ़टे जूते देख कर महान साहित्यकार परसाई के ज्ञान चक्षु कितने खुले थे यह तो वही जानते होंगे, पर इस रूपवती तारिका की फ़टी जीन्स देख कर मेरे ज्ञान चक्षु उसी प्रकार खुल गए जिस प्रकार धर्म परिवर्तन कर लेने से किसी दरिद्र के भाग्य खुल जाते हैं। इस तस्वीर को देखने के पुर्व मैं स्वयं...

  • बाँस...

    बाँस के गुणों और इसकी उपयोगिता से परिचित तो था ही लेकिन जब, बाँस की विकिपीडिया पढ़ा... पता चला जितना मैं जानता था बाँस उससे कहीँ बहुत ज्यादा गुणवान और उपयोगी है। वो बात अलग है कि लोगबाग को बाँस के गुणों के विषय में जानने की उतनी रुचि नहीं रहती जितना किसी उत्सर्जी मार्ग को अवरुद्ध करने की। जी हाँ!...

  • दरार..... : रिवेश प्रताप सिंह

    ईश्वर की अनुकंपा, नियमित दवाइयों के सेवन एवं नपी-तुली नियमबद्ध दिनचर्या के बल पर पिताजी लगभग अस्सी वर्ष की अवस्था में भी बिल्कुल स्वस्थ हैं।वैसे मानव का शरीर एक परिवार की भांति ही होता है। शरीर का प्रत्येक अंग परिवार के सदस्यों की तरह कार्य करता है, और यह शरीर रूपी परिवार बिना किसी परेशानी के...

  • सीता बनवास...

    रामकथा में सीता बनवास एक ऐसा प्रसङ्ग है, जो बुद्धिजीवियों को सदैव आनंदित करता रहा है। कारण यह, कि इस प्रसङ्ग पर तर्क, कुतर्क की अनंत सम्भावनाएं हैं। इस विषय पर ज्ञानी, विज्ञानी, अज्ञानी सब खूब तर्क कर लेते हैं, और सबको तृप्ति मिल जाती है।वैसे अब यह पूर्णतः सिद्ध हो चुका है कि वाल्मीकि रामायण का...

  • पुड़िया.....रिवेश प्रताप सिंह

    थोक गल्ला मंडी में मेरा जाना महीने में केवल एक दिन होता था या यूँ समझिए कि वेतन गिरने के दो-चार दिन के भीतर झोला उठ जाता था।थोक गल्ला मंडी में हर क्रेता की एक फिक्स दुकान होती है और क्रेता किसी विशेषता के कारण अपने विक्रेता को पसंद करता है। वैसे ही जैसे आजकल सबकी अपनी-अपनी पार्टियाँ। खैर मेरी भी एक...

  • लोहे के पिंजड़े में पाँच सौ एसएलआर राइफल वाले सुरक्षा कर्मियों से घिरे....रामलला

    कल अयोध्या में थे। दो फिट चौड़े और सात फुट ऊँचे लोहे के पिंजड़े में डेढ़ किलोमीटर चलने के बाद बीस फिट गुणे तीस फिट के तिरपाल में दिखे रामलला। लगभग पाँच सौ एसएलआर राइफल वाले सुरक्षाकर्मियों से घिरे.... लगभग सौ बीघे जमीन को लोहे के मोटे-मोटे खम्भों से इस तरह घेरा गया है जैसे जगत का सबसे सशक्त बन्दीगृह...

  • डिजिटल कलेजा

    पंचतंत्र की कहानियों में बंदर और मगरमच्छ की कहानी तो सभी ने पढ़ी या सुनी होगी। मगरमच्छ की पत्नी द्वारा उसके मित्र बंदर के दिल खाने की इच्छा और बंदर द्वारा मगरमच्छ को बेवकूफ बनाने पर उसकी पत्नी द्वारा दिए जाने वाले ताने.....नदी के किनारे आने पर बंदरों के झुण्ड द्वारा दगाबाज, विश्वासघाती जैसे तंज,...

  • कथा नहीं, इतिहास "त्याग"

    भाद्रपद की काली अंधेरी रात, आँधी के साथ मिलकर बारिश ने इस रात्रि को और भी भयानक बना दिया था। बन्दीगृह में खिड़कियों से छन कर आती हवा सभी प्रहरियों को मीठी नींद में सुला गयी थी। बन्दीगृह के किंवाड़ से लग कर सोये प्रहरी की कमर से ताली का गुच्छा खींच कर बन्दी ने चुपचाप ताला खोला और धीरे से कहा- अब...

  • शर्मा जी घर में चूहों से बहुत परेशान....

    वैसे चूहे होते भी विचित्र हैं.. ये अपने खाने के अतिरिक्त, मानव जाति के प्रयोग होने वाले उन संसाधनों पर भी दखल रखते हैं जिससे न तो उनका सरोकार है और न कभी उनके पुरखों का रहा। कभी आप चूहे की बिल खोदे तो आप पायेंगे कि चूहे ऐसी भी चीजें बिल में घुसेड़ ले गया जो उसके किसी काम की नहीं.. मसलन-...

  • सुनो तिवाराइन !

    तुमको क्या लगता है ? तुम हमारी मासूम मोहब्बत के फरकच्चे उड़ाते जावोगी और हम अपनी शुद्धता का प्रमाण देते फिरेंगे ?? तुम कौन भरम पाल रही हो आजकल , या फिर हम ही गफलत गले से लगा बैठे हैं ?हमको तनिक भी तुम्हारा ई फरेबी चाल चलन न सुहा रहा... ई जो पहले जी ललचा के और अब चकमा पर चकमा दिए जा रही हो न तो हमारा...

  • भचकन बाबा.... रिवेश प्रताप सिंह

    दोनों पैरों की लम्बाई में दू सूत के अन्तर ने गोधन नाम को बदलकर कब भचकन कर दिया, यह गोधन खुद भी नहीं जान पाये। रोज अखाड़ा में पहलवानों को 'वाह ..पठ्ठे वाह!' ललकारने और अपने शरीर पर माटी पोत कर चार ठो दण्ड बैठक मारने से भचकन कब 'भचकन पहलवान' का दर्जा पा लिये यह भी एक रहस्य ही था। भचकन निठल्लों के...

  • फिर एक कहानी और श्रीमुख."अधूरा वादा"

    खेत में दस मिनट की देरी से पहुँचे टिकाधर काका को देख कर मनोजवा बो ने टिभोली मारा- कहाँ थे काका? बिरधा पिनसिम के पइसा से ताड़ी पीने नही नु गए थे?काका ने छूटते ही जवाब दिया- गए थे तोरा माई से बियाह करने! पतोहि हो के ससुर से ठिठोली करते लाज नही आती रे बुजरी की बेटी?खेत में सोहनी करती सभी बनिहारिने...

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