Read latest updates about "भोजपुरी कहानिया" - Page 1

  • फिर एक कहानी और श्रीमुख"मन न भए दस बीस"

    झाँसी और ग्वालियर के बीच में राजपूतों का एक छोटा सा गाँव था, रामपुर। कहने की आवश्यकता नहीं कि यहाँ की मिट्टी फसल से अधिक योद्धा उपजाती थी। उन्नीसवीं शताब्दी के बीच के दिनों में ग्वालियर और झाँसी दोनों राजघराने अपनी प्रतिष्ठा बनाये हुए थे, सो रामपुर के अधिकांश युवक इन्ही दोनों राजघरानों के सैनिक थे।...

  • फिर एक कहानी और श्रीमुख"फिरोजा'.

    थार रेगिस्तान की गोद में बसा भारत का एक छोटा सा सीमांत राज्य जालोर; यहां के पशुओं की नाड़ी में भी रक्त के स्थान पर स्वाभिमान बहता था। यहां के चौहान राजा कन्हड़ देव ने अपनी अतुल्य वीरता के लिए समूचे भारतवर्ष में प्रतिष्ठा प्राप्त की थी। किन्तु पिछले एक सप्ताह से जालोर की हवा में धूल से अधिक अलाउदीन...

  • कौवे और गिद्ध (कथा)

    युगों पुरानी बात है, मूर्खिस्तान के जंगल में असंख्य प्रजाति के पशु पक्षी बड़े प्रेम से रहा करते थे। प्रेम इसलिए था, कि सब अपना अपना आहार इकट्ठा करते थे; अपना खाते थे, सो झंझट का कोई कारण ही नहीं था। पक्षियों में कौवे और गौरैये ही अधिक संख्या में थे, अन्य पक्षियों की संख्या अपेक्षाकृत कम...

  • तेरी मोहब्बत : यूरेका ! यूरेका !

    "तरुणाई के दहकते पन्ने पर जब जज्बात की ख़्यालाती कलम चलती है फिर कहानियाँ नहीं जिंदगिया मचलती हैं।" मचलने से याद आया !मचले तो हम भी थे तेरी 'आविष्कारी इश्क' की छुवन भर से । तुम बंगालन जादूगरनी सी अपने इश्क को साधने में लगी थी , मैं 'मोहब्बतल्लवन बल' में ख़्वाहिशों का गोता लगाते गया...जैसे तेरी...

  • आपकी चिट्ठी मिली तो युगों बाद कोई चिट्ठी मिली....

    आदरणीय कल्पना दीदी सादर चरण स्पर्श...हम यहाँ कुशल पूर्वक रह कर संझा माई और सुरुज बाबा से रोज गोहराते हैं कि आपलोग भी कुशल होंगे।आपकी चिट्ठी मिली तो युगों बाद कोई चिट्ठी मिली। पढ़ कर लगा जैसे हम बीस साल पीछे पहुँच गए हों, जब पड़ोस की रामनिछत्तर बो भउजी रामनिछत्तर भाई का एक्के गो चिट्ठिया हमसे...

  • अब बहिना नाराज क्यो है भाई से यह सब पूछेंगे

    आदरणीय कल्पना बहिना सादर प्रणाम ! दस साल बाद आप इस आभासी पटल पर दिखीं तो मन हुआ की क्षमा मांग कर आपको चिठ्ठी लिखूँ । बियाह होने के बाद आप चली गयी पहुना के साथ तबसे आपको कभी देखे नही हैं ।मुझे मालूम है की आप नाराज क्यों हो ! अब बहिना नाराज क्यो है भाई से यह सब पूछेंगे । बताता...

  • मैं महुआ सी मादकता लिए गुड़ सा गमक रहा हूँ

    बैशाख जानता है कि टपकने को तैयार महुआ के खेप से भरे पेड़ों को देख कर कैसा लगता है। कल्हुआड़ से निकलती गुड़ की सोंधी महक कैसे मदमत्त कर देती है, यह ऊँख की खेती करने वाला किसान ही बताएगा। बिरजभार के पाठ में जब फुलफुर की डायन बहिनिया फुलिया-फुलेसरी बिरजभार को जादू से सुग्गा बना कर कैद कर लेती हैं, तब...

  • कवि मरते नहीं, बस गुजर जाते हैं...

    प्रकृत कवि को मार ही नहीं सकती।जब लम्बे और बोझिल विमर्शों के बाद सभागार में केवल जूते दिखाई देने लगें,तो किसी न किसी को केदारनाथ होना पड़ता है।अपने हक के लिए धुँआधार लड़ते समय मेंदूसरा कौन करेगा फूल, गन्ध, बादल या सड़क के हक की बात?भोंपू से कटते किसानों की पीर कोई कवि ही समझ पाता है न...फिर कैसे मार...

  • पापा कथा सुनवले रहनी...

    अंग्रेजी जबाना रहे, आ गरीबन पर होखे वाला अत्याचार चरम पर रहे। ओहि दिन में अपने बिहार के एगो भोजपुरिया जवान जवन बड़ी निमन कवि आ गायक रहे उ जाली नोट छापे के कारखाना लगवले रहे। नोट छाप के ओह पैसा से उ जवान गरीबन के बड़ी मदत करस। अंग्रेज सरकार हरान रहे कि ई जाली नोट आ कहाँ से जाता। धीरे धीरे ओह...

  • मेरे बाप की अदालत

    नमस्कार, रेडियो मोतीझील के प्रायोजित कार्यक्रम "मेरे बाप की अदालत" में मैं श्रीमुख पार्थ आप सब का हार्दिक स्वागत करता हूँ। सबसे पहले मैं आज के मेहमानों से आपका परिचय करा दूँ। हमारे आज के कार्यक्रम में पहले मेहमान हैं बरिष्ट किन्तु गरिस्ट पत्रकार श्री डोम कानवी। ये अपनी मोदीभक्ति के लिए शोशल मिडिया...

  • मुख्तार मियाँ की कबूतरबाजी

    आसमान में खूब ऊंचाई पर अगर कबूतर घंटों उड़ान भरते दिख जायें तो इलाके के कबूतरबाज़ बिना पूछे जान लेते थे कि यह मुख्तार मियाँ के वफादार हैं। भोपाल की तंग गलियों में मुख्तार मियाँ का नाम सबसे नामचीन कबूतरबाजों में मशहूर है। बचपन का शौक कब पेशे में बदल गया, मुख्तार मियाँ को खुद भी न पता।जो भी लौंडे...

  • बुड़बक आख्यान ८"महामिलन"

    कबूतर हो गया है अरविंद सिंह का मन, लगता है जैसे अभी उड़ के मनोरमा की छत पर बैठ जाएंगे। प्रेम के गड़े मुर्दों को उखाड़ने में यह फागुन का महीना चुनावकाल को भी मात देता है। साल के ग्यारह महीने तक मौन रहने वाला मनोरमा का मनमोहनी प्रेम फागुन में मोदी क्यों हो जाता है, इस विषय पर यदि जे एन यू में शोध हो तो...

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