Read latest updates about "भोजपुरी कहानिया" - Page 1

  • लखनू पंडित...गायन मंडली . रिवेश प्रताप सिंह

    लखनू पंडित और उनकी गायन मंडली दस बीस गाँवों में अपने गीत-गुंजन हारमोनियम, तबले और खजड़ी से खूब जानी पहचानी जाती थी. पंडीजी के दुआर पर सुबह दो- चार लोग सट्टा बुक करने के लिए खड़े ही मिलते क्योंकि सुबह के बाद मंडली किस गांव या चौराहे पर भजन-कीर्तन गा रही है यह पता करना एक टेढ़ी खीर थी.लखनू पंडित का कोई...

  • सख्त जबरदस्त... रिवेश प्रताप सिंह

    'सख्त' शब्द बहुत वास्तव में 'सख्त' होता है.. इसीलिये तो, जब लोग मना करने पर नहीं मानते तब मिटाकर दुबारा यह लिखना पड़ता है कि 'यहाँ पेशाब करना सख्त मना है' लोग बताते हैं कि जब कोई मोहब्बत से पेश आने पर भी बाज़ न आये तब उस पर सख्ती से पेश आया जाता है. अपने ही अनचाहे बालों को उखाड़ना, सख्ती का एक देखा-...

  • सनातनी परम्परा पैरों की छाप... सर्वेश तिवारी श्रीमुख

    सनातन की परम्परा है, 'नवबधु जब उतरती है तो चौकठ के पास थाल में महावर रखा होता है जिसमें पैर रख कर वह आगे बढ़ती है। अपने पैरों की छाप छोड़ते हुए...' नववधू लक्ष्मी होती है न! वह अपने साथ धन-धान्य-सौभाग्य-आरोग्य ले कर आती है। उसके चरण लक्ष्मी के चरण होते हैं, उन चरणों की छाप लम्बे समय तक घर में बनी...

  • तीज स्पेशल..... रिवेश प्रताप सिंह

    तीज में कल शहर,बाज़ार, चौराहे देर रात तक चहलकदमी और खरीदारी से रौशन रहे। मेंहदी, श्रृंगार और मिष्ठान के प्रतिष्ठानों ने खूब चांदी काटी... मेंहदी रचने वालों के हाथों की तो बल्ले बल्ले थी। और उसमें पुरूष मेंहदी रचनाकारों की तो पूछिए मत! मुझे तो यकीन ही नहीं होता कि जब देर रात को ये पैसा कमाकर घर लौटते...

  • कृष्ण गोकुल से गए ....सिसकियां और आह बची

    कृष्ण गोकुल से जा चुके थे, और साथ ही गोकुल से जा चुका था आनंद। लोगों की हँसी जा चुकी थी, आपसी चुहल जा चुकी थी, पर्व-त्योहार-उत्सव जा चुके थे। गोकुल में यदि कुछ बचा था तो केवल सिसकियां और आह बची थी। पूरे गोकुल में एक ही व्यक्ति था जो सबकुछ सामान्य करने का प्रयत्न करता फिरता था, वे थे नंद।...

  • कभी सूरदास ने एक स्वप्न देखा था, कि रुख्मिनी और राधिका मिली हैं और एक दूजे पर निछावर हुई जा रही हैं।

    कभी सूरदास ने एक स्वप्न देखा था, कि रुख्मिनी और राधिका मिली हैं और एक दूजे पर निछावर हुई जा रही हैं। सोचता हूँ, कैसा होगा वह क्षण जब दोनों ठकुरानियाँ मिली होंगी। दोनों ने प्रेम किया था। एक ने बालक कन्हैया से, दूसरे ने राजनीतिज्ञ कृष्ण से। एक को अपनी मनमोहक बातों के जाल में फँसा लेने वाला...

  • फिर एक कहानी और श्रीमुख . "अधूरा वादा"

    खेत में दस मिनट की देरी से पहुँचे टिकाधर काका को देख कर मनोजवा बो ने टिभोली मारा- कहाँ थे काका? बिरधा पिनसिम के पइसा से ताड़ी पीने नही नु गए थे?काका ने छूटते ही जवाब दिया- गए थे तोरा माई से बियाह करने! पतोहि हो के ससुर से ठिठोली करते लाज नही आती रे बुजरी की बेटी?खेत में सोहनी करती सभी बनिहारिने...

  • एक कहानी .........रहस्य...

    ...बिहार के बेगूसराय जिले का एक सामान्य गाँव, गाँव के जमींदार थे बाबू बटेसर सिंह। बाबू साहब कई सौ बीघे के काश्तकार थे, अगल बगल के दस से अधिक गाँव-टोलों में उनकी जमीनें थी। पूरे जिले में तो नहीं, पर अपनी सम्पन्नता और सहयोगी स्वभाव के कारण पूरे प्रखण्ड भर में प्रतिष्ठा पाते थे बाबुसाहेब। पर कहते हैं...

  • सुन रहे हैं??.........हाँ, बताओ न...: सौरभ चतुर्वेदी

    आज बाबू के स्कूल की छुट्टी ग्यारह बजे ही हो जाएगी..आपकी छुट्टी है ही..वैन के ड्राइवर को फोन करके आप खुद ही स्कूल चले जाइए..बच्चा खुश हो जाएगा कि पापा लेने आए हैं..बच्चा खुश हो न हो, बच्चे की माँ नाराज नहीं होनी चाहिए....बैंकों में जबसे शनिवार को छुट्टी होनी शुरू हुई है, ऐसा लगता है जैसे किसी...

  • अखरेला अधिका सवनवा बटोहिया

    विद्यालय से वापस लौटते आलोक पाण्डेय जब एकाएक झमाझम बारिस में घिर गए, तो जाने क्यों भीगने का मन होने लगा। पॉकेट से पैसा निकाल कर गाड़ी की डिक्की में डालने के बाद जब आलोक ने दोनों हाथों को हवा में लहराया, तो अंदर एक टीस उठी और आलोक पाण्डेय के होठों पर दर्द भरी मुस्कुराहट तैर गयी। सावन की बारिस हमेशा...

  • कहानी : जनाना मर्दाना... रिवेश प्रताप सिंह

    हिन्दी के उन मूर्धन्यों को भी सौ तोपों की सलामी जिन्होंने सजीव के अतिरिक्त निर्जीवों में स्त्रीलिंग-पुलिंग की श्रेणी बना डाली। सजीवों में तो लिंग निर्धारण आसान है किन्तु वह कौन सा परीक्षण है जिसकी कसौटी पर कस कर निर्जीव वस्तुओं का लिंग-निर्धारण किया जाता है?यदि हम आकार के हिसाब से माने तो 'सुराही'...

  • लभ यू तीन गोरियां.... आलोक पाण्डेय

    'बिन मारे बैरी मरे' की खुशी को दबाते हुए आइए सुनते हैं कि अफगानिस्तान, पाकिस्तान और बांग्लादेश अखंड भारत के भाग रहे हैं, अब क्योंकि ये भारत के विखंड हैं, इसलिए ये भारत के शाश्वत बैरी बरीबंड हैं।वास्तव में संसार बैरियों के बरियाई का बेर है, बैरियर है, बैरिकेडिंग है।जिसको 'राष्ट्र' नाम से जाना जाता...

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